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अलविदा 2017: ज़ीरो की नई परिभाषा समेत हुए कई नए 'आविष्कार'

मोर के आंसुओं का महत्व भी भारत में ही तलाशा गया

Updated On: Dec 27, 2017 01:58 PM IST

FP Staff

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अलविदा 2017: ज़ीरो की नई परिभाषा समेत हुए कई नए 'आविष्कार'

दुनिया में हर साल कई नई चीज़ें खोजी जाती हैं. बहुत सारे नए आविष्कार होते हैं. भारत में नया तलाशने की पुरानी परंपरा है. जब ज़ीरो दिया मेरे भारत में तो आपने सुना ही होगा. खैर इस साल कई नए आविष्कार भारत की धरती पर देखने को मिले. ऐसी-ऐसी खोज हुईं जिन्होंने खुदा की पूरी कायनात को बदल कर (आपने इश्क नाम की फिल्म तो देखी होगी) रख दिया.

मोर के आंसू

राष्ट्रीय पशु जा पहुंचा संसद की बिल्डिंग में अपनी मोरनी और बच्चे के साथ. (पीटीआई)

खुशी के आंसू और खून के आंसू के बाद साल 2017 में हिंदुस्तानियों ने मोर के आंसू का महत्व समझा. राजस्थान हाइकोर्ट के जज महेशचंद्र शर्मा ने इस इंटरव्यू में यह भी कहा कि मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी इसलिए है क्योंकि यह आजीवन ब्रह्मचारी रहता है. मोर-मोरनी आपस में सेक्स नहीं करते बल्कि मोरनी मोर के आंसू को पीकर गर्भवती होती है. जज ने यह भी कहा भगवान कृष्ण भी इसी वजह से मोरपंख को धारण करते थे. अब जीव विज्ञान की धारणा को बदल देने वाला इस विचार को लेकर लोगों ने तमाम जोक बना डाले.

ढिंचक पूजा

dhinchak pooja salman

निदा फाजली ने शेर कहा है, हिन्दू भी मज़े में है मुसलमां भी मज़े में, इंसान परेशान यहां भी वहां भी. पाकिस्तान ने 2016 में ताहिर शाह के एंजल के साथ संगीत में कुछ नया करने की कोशिश की थी मगर हिंदुस्तान ने उसके सामने ढिंचक पूजा नाम को किया. सेल्फी मैने ले ली आज, दिलों का शूटर है मेरा स्कूटर जैसे गाने वायरल हुए. ढिंचक पूजा को बिग बॉस में भी एंट्री ली. इसके साथ ही हमने सीखा कि गाना हिट करवाने के लिए कॉन्फिडेंस चाहिए, सुर लय और ताल नहीं.

गाय-गाय-गाय

प्रतीकात्मक तस्वीर

ये साल गाय के नाम पर रहा. कहा गया कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए. टीवी चैनल का एक स्क्रीन शॉट भी वायरल हुआ जिसमें गाय के सांस में ऑक्सीजन लेने और छोड़ने वाले एकमात्र पशु होने की बात की गई थी. आपको बता दें कि गायों की जुगाली में बहुत ज्यादा मीथेन गैस बनती है जो ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ाती है. हरयाणा में गायों के हॉस्टल बनाने का आदेश भी सरकार ने दिया. इसके साथ-साथ गौमूत्र पर साइंटिफिक रिसर्च के लिए पैनल बनाने की बात सरकार ने कही.

प्रदूषण रहित पटाखे

Crackers

दिल्ली में पिछले साल दिवाली पर प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया था. इस साल इसके लिए एनसीआर में दीपावली के दौरान पटाखे बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. तमाम लोगों की भावनाएं आहत हो गई. फिर कहा गया कि भले ही फेफड़े खराब हो जाएं मगर पटाखे तो चलेंगे ही. इसी कड़ी में सरकार के मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि वैज्ञानिक अगले साल तक प्रदूषण रहित पटाखे विकसित करें. सीरियसली! एचआईवी, बिना पेट्रोल के चल सकने वाली गाड़ियां, सैटेलाइट वगैरह छोड़कर पटाखे बनाएंगे.

टू जी था ही नहीं

A Raja acquitted in 2G scam case

जिस घोटाले ने देश की राजनीति बदल दी, नए नेता, पीएम सीएम सब बना दिए वो दरअसल था ही नहीं. 2017 खत्म होते होते पता चला कि एक लाख 76 हजार करोड़ दरअसल ज़ीरो के बराबर होता है. भारत में ही ये खोज संभव थी. एक बार फिर से कहिए, जब ज़ीरो दिया मेरे भारत ने.

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