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अलविदा 2017 : इस साल के कुछ खास गूगल डूडल पर एक नजर

यूं तो सभी खास मौकों पर गुगल डूडल ने अपनी क्रिएटीविटी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी पर आज हम बात करेंगे उन खास गूगल डूडल के बारे में जो थे भारतीय महिलाओं को समर्पित

Updated On: Dec 25, 2017 07:45 PM IST

FP Staff

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अलविदा 2017 : इस साल के कुछ खास गूगल डूडल पर एक नजर

2017 को अलविदा कहने में केवल एक हफ्ता बाकी है. 2018 का स्वागत करने से पहले एक बार 2017 के पूरे सफर पर नजर मारते हैं. 2017 में कई दिलचस्प चीजे हुईं पर सबसे दिलचस्प थे इस साल के गूगल डूडल. यूं तो सभी खास मौकों पर गुगल डूडल ने अपनी क्रिएटीविटी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी मगर सबसे खास थे गूगल-डूडल जो भारतीय महिलाओं के बारे में थे.

रखमाबाई राउत

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रखमाबाई राउत का गूगल डूडल उनके 153वें जन्मदिन पर उन्हें समर्पित किया गया था. भारत की पहली महिला डॉक्टर्स में से एक होने के साथ-साथ उन्हें एक नारीवादी के तौर पर भी याद किया जाता है. रखमाबाई राउत एक ऐसी महिला थी जिनकी 11 साल के उम्र में शादी होने के बाद उन्होने अपने पति के साथ जाने से इनकार कर दिया.इसके बाद वो लंदन स्कूल ऑफ मेडिसिन में डॉक्टरी की पढ़ाई करने गईं.

 कोर्नेलिया सोराबजी

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15 नवंबर के दिन देश की पहली महिला वकील का जन्मदिन मना रहा था गूगल डूडल. कोर्नेलिया सोराबजी न केवल देश की पहली महिला वकील थी बल्कि देश महिलाओं के लिए वकालत शुरू करने की पहल भी इन्होंने ही की थी. सोराबजी ऑक्सफोर्ड से पढ़ने और बॉम्बे यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट होने वाली पहली महिला भी हैं. इसके अलावा उन्होंने पर्दा प्रथा के खिलाफ भी काफी काम किया है. उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं.

अनसूया साराभाईanasuya (1)

अनसूया साराभाई का गूगल डूडल उनके 132वें जन्मदिन पर बनाया गया था. यूं तो अनसूया साराभाई एक सम्पन्न परिवार से थी पर उन्होने अपना आधे से ज्यादा जीवन मजदूरों और वंचितों के हक की लड़ाई लड़ने में लगाया. बुनकरो की हक के लिए लड़ने की लड़ाई में खुद महात्मा गंधी ने भी अनसूया साराभाई का साथ दिया था.

 सितारा देवी

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गूगल ने 8 नवंबर को कथक क्वीन सितारा देवी के जन्मदिन पर गूगल डूडल समर्पित किया था. कथक क्वीन का नाम सितारा देवा को रवींद्रनाथ टैगोर ने दिया था. जिस सितारा देवी ने अपने नृत्य के जरिए पूरी दुनिया में नाम कमाया, उन्हीं को कभी उनके मां बाप ने नौकरानी को सौप दियां था. वजह थी उनका मुह थोड़ा टेढ़ा होना. इसके बाद वे अपने मां बाप के पास वापस आ गई और अपने पिता से कथक सीखा.

 बेगम अख्तर

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7 अक्टूबर को बेगम अख्तर का का डूडल बनाकर गूगल ने अपनी क्रिएटीविटी का एक नमूना पेश किया था. इस खूबसूरत डूडल में बेगम अख्तर सितार बजाती दिख रहीं थी, वहीं कुछ लोग नीचे हाथ में फूल लिए बैठे नजर आ रहे थे. मल्लिका-ए-गजल के नाम से पहचानी जाने वाली बेगम अख्तर हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक में दादरा और ठुमरी के लिए जानी जाती थीं. बेगम अख्तर को कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1968 में पद्म श्री और सन 1975 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

 नूतन

nutan (1)4 जून को गूगल ने एक बेहद खूबसूरत डूडल बनाया. ये डूडल था बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकारा नूतन का जिसे गूगल डूडल ने बहुत कलात्मक ढंग से दर्शाया था. नूतन अपने चेहरे के भाव भंगिमाओ के द्वारा ही सब कुछ कह जाती था. नूतन की इसी खासियत को बखूबी दर्शाते हुए गूगल ने नूतन के डूडल में नूतन के चहरे के चार भाव दिखाए जो कई इमोशन बयां कर रहे थे. पुरुष प्रधान फिल्मों के दौर में नूतन ने अपने अभिनय क्षमता से महिला किरदारों को जगह दिलाई. उनकी महिला प्रधान फिल्मों में बंदिनी, सुजाता, सीमा जैसी फिल्मों का नाम आता है.

 सावित्रीबाई फूले

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3 जनवरी 2017 को भारत की पहली महिला के शिक्षिका के नाम समर्पित किया गूगल ने अपना डूडल. गूगल ने सावित्रीबाई फूले को उनके 186वें जन्मदिवस पर उन्हें याद किया था. गूगल ने डूडल में सावित्रीबाई फूले को अपने आंचल में कई महिलाओं के समेटते हुए दर्शाया था. ये ही सावित्रीबाई फूले की खासियत. उन्होंने ब्रिटिश शासनकाल के समय औरतों की शिक्षा के बारे में सोचा जो उस समय एक नई सोच के रूप में उभरी. सावित्रीबाई फूले ने अपना संकल्प पूरा करते हुए महिलाओं के भविष्य के लिए एक बेहतर रूपरेखा तैयार कर दी थी.

आशिमा चटर्जी

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साइंस में डॉक्टरेट हासिल करने वाली  भारत की पहली महिला आशिमा चटर्जी के नाम था 23 सितंबर का गूगल डूडल. आशिमा चटर्जी के 100 वें जन्मदिन पर गूगल ने एक खास डूडल बनाया. रसायनशास्त्री चटर्जी को ऑर्गेनिक केमेस्ट्री और फाइटोमेडिसिन यानी पौधों की बीमारियों के विज्ञान, में उनके योगदान के लिए जाना जाता है. वो सन 1982 से 1990 तक राज्यसभा की सदस्य भी रहीं.  1975 में इंडियन साइंस कांग्रेस की महाअध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं.

होमई व्यारावाला 

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9 दिसंबर को गूगल ने अपना डूडल भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट होमई व्यारावाला के नाम किया था. . होमई 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर ध्वजारोहण समारोह की तस्वीरें खींचने के लिए जानी जाती हैं. फोटो आर्कइव में होमई डालडा 13 के नाम से मशहूर है. इस कोड नेम डालडा 13 दरअसल उनकी कार की नंबर प्लेट DLD 13 से पड़ा

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