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गूगल ने खास डूडल बनाकर 'भारत रत्न' बिस्मिल्ला खां को किया याद

मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को उनके जीवनकाल में 'भारत रत्न' समेत ढेरों पुरस्कार और सम्मान से नवाजा गया था

Updated On: Mar 21, 2018 10:11 AM IST

FP Staff

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गूगल ने खास डूडल बनाकर 'भारत रत्न' बिस्मिल्ला खां को किया याद
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भारत रत्न शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के 102वें जन्मदिन पर गूगल ने एक खास डूडल बनाकर उन्हें याद किया है. दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल के डूडल में सफेद पोशाक पहने उस्ताद बिस्मिल्ला खां की शहनाई बजाते हुई तस्वीर है.

देश और पूरी दुनिया में शहनाई को लोकप्रिय बनाने वाले उस्‍ताद बिस्मिल्लाह खां किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने शहनाई वादन में अपना अलग ही मुकाम बनाया.

1916 को जन्मे उस्ताद बिस्मिल्लाह खां भारत रत्न से सम्मानित होने वाले तीसरे भारतीय संगीतकार थे. उन्हें 2001 में भारत रत्न, 1980 में पद्म विभूषण, 1968 में पद्म भूषण और 1961 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था. इसके अलावा भी उन्हें ढेरों पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

Ustad Bismillah Khan

बिस्मिल्ला खां को 15 अगस्त, 1947 को आजादी के दिन दिल्ली के लाल किले पर शहनाई बजाने का गौरव हासिल है. इसके अलावा उन्होंने 26 जनवरी, 1950 को पहले गणतंत्र दिवस पर भी शहनाई की तान छेड़ी थी.

बिस्मिल्लाह खां की पैदाइश एक बिहारी मुस्लिम परिवार में पैगंबर खां और मिट्ठन बाई के घर हुआ था. उनके बचपन का नाम कमरुद्दीन था, लेकिन वह बिस्मिल्लाह के नाम से जाने गए. बिस्मिल्लाह का शाब्दिक अर्थ है, श्री गणेश. वो अपने माता-पिता की दूसरी संतान थे. उनके खानदान के लोग भी शहनाई वादक थे और दरबारी राग बजाने में माहिर थे.

मात्र 6 साल की उम्र में बिस्मिल्ला खां अपने पिता के साथ बिहार से यूपी के बनारस आ गये. यहां उन्होंने अपने मामा अली बख्श 'विलायती' से शहनाई बजाना सीखा. उनके उस्ताद मामा 'विलायती' विश्वनाथ मंदिर में स्थायी रूप से शहनाई-वादन का काम करते थे.

बिस्मिल्ला खां शहनाई को अपनी दूसरी 'बेगम' कहते थे

बिस्मिल्ला खां जब 16 साल के थे तो उनका निकाह मुग्गन ख़ानम के साथ हुआ. उनकी बेगम उनके मामा सादिक अली की दूसरी बेटी थीं. बिस्मिल्ला खां और मुग्गन ख़ानम की 9 संतानें हुईं. उस्ताद अपनी बेगम से बेहद प्यार करते थे लेकिन वो शहनाई को अपनी दूसरी 'बेगम' कहते थे.

बिस्मिल्ला खां लगातार 30-35 वर्षों तक अपनी संगीत साधना में हर दिन 6 घंटे रियाज करते थे. बिस्मिल्लाह खां शिया मुसलमान थे, लेकिन उनके लिए संगीत ही उनका धर्म था. वह काशी के बाबा विश्वनाथ मंदिर में जाकर शहनाई बजाते थे, साथ ही गंगा किनारे बैठकर घंटों रियाज भी किया करते थे.

21 अगस्त, 2006 को दिल का दौरा पड़ने से उस्ताद बिस्मिल्ला खां का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया. तब ऐसा लगा मानो शहनाई से उसकी तान ही उससे छिन गई.

(विकीपीडिया से भी इनपुट)

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