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होमई व्यारावाला: आज़ादी के दौर की खास फोटोग्राफर

देश की पहली महिला प्रेस फोटोग्राफर होमई को शुरुआत में उनके पति के नाम पर क्रेडिट दिया जाता था

FP Staff Updated On: Dec 09, 2017 09:15 AM IST

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होमई व्यारावाला: आज़ादी के दौर की खास फोटोग्राफर

9 दिसंबर का गूगल-डूडल भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट होमई व्यारावाला के नाम है. व्यारावाला के 104वें जन्मदिन पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया है. होमई 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर ध्वजारोहण समारोह की तस्वीरें खींचने के लिए जानी जाती हैं. फोटो आर्कइव में होमई डालडा 13 के नाम से मशहूर है. इस कोड नेम डालडा 13 दरअसल उनकी कार की नंबर प्लेट DLD 13 से पड़ा.

होमई का जन्म गुजरात की पारसी फैमिली में हुआ था. पिता की घूमंतू थियेटर कंपनी होने के कारण उनका ज्यायातर बचपन घूमते हुए बीता. होमई ने मुबंई के जेजे स्कूल ऑफ़ आर्ट से फ़ोटोग्राफ़ी की शिक्षा लेने के बाद उन्होंने किशोरावस्था से ही कैमरे से दुनिया को देखना शुरू कर दिया था.

ब्रिटिश डेप्युटी हाईकमिश्नर की पत्नी के साथ जवाहरलाल नेहरू की ये तस्वीर फेक न्यूज़ के साथ काफी शेयर होती है. फोटो सोर्स- अल्काजी कलेक्शन ऑफ फोटोग्राफी

ब्रिटिश डेप्युटी हाईकमिश्नर की पत्नी के साथ जवाहरलाल नेहरू की ये तस्वीर फेक न्यूज़ के साथ काफी शेयर होती है. फोटो सोर्स- अल्काजी कलेक्शन ऑफ फोटोग्राफी

पद्म विभूषण से सम्मानित होमई का करियर टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ शुरू हुआ था. करियर की शुरूआत के समय फोटो क्रेडिट में उनके पति मॉनेकशॉ व्यारावाला या फिर उनके कोड नेम से जाता था. 1930 से 1970 के बीच वह एक मात्र प्रोफेशनल महिला फोटो पत्रकार थीं.

फोटोग्राफी की दुनिया में होमई की असली पहचान 1942 में दिल्ली में ब्रिटिश सूचना सेवा में काम करने के दौरान बनी. जब उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं की तस्वीर खींची थी. उन्होंने लार्ड माउंटबेटन की विदाई, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के दाह संस्कार की तस्वीरें भी खींची थी. इसके अलावा उन्होंने तिब्बत से बच कर आए दलाई लामा और क्वीन एलिजाबेथ की तस्वीर खींचने वाली पहली फोटोग्राफर थीं.

भारत आते दलाई लामा. फोटो सोर्स- अल्काजी कलेक्शन ऑफ फोटोग्राफी

भारत आते दलाई लामा. फोटो सोर्स- अल्काजी कलेक्शन ऑफ फोटोग्राफी

1970 में अपने पति की मौत के बाद होमई ने अपने करियर को छोड़ दिया था. होमई ने अपना फोटोग्राफ कलेक्शन दिल्ली की अल्काजी फाउंडेशन फॉर आर्ट्स को सौंप दिया था. साल 2012 में 15 जनवरी को फेंफड़ों की बीमारी के चलते उनकी मौत हो गई थी.

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