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गूगल डूडल: कौन थे सर विलियम हेनरी पर्किन? कैसे बना सिंथेटिक डाई?

12 मार्च को गूगल डूडल ब्रिटिश केमिस्ट सर विलियम हेनरी पर्किन का 180वां जन्मदिन मना रहा है. पर्किन ने सबसे पहले सिंथेटिक डाई का आविष्कार किया था

FP Staff Updated On: Mar 12, 2018 11:22 AM IST

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गूगल डूडल: कौन थे सर विलियम हेनरी पर्किन? कैसे बना सिंथेटिक डाई?

12 मार्च को गूगल डूडल ब्रिटिश केमिस्ट सर विलियम हेनरी पर्किन का 180वां जन्मदिन मना रहा है. यूं तो काफी लोग पर्किन के नाम से अपरिचित होंगे, लेकिन उनका आविष्कार हमारी जिंदगी के गहरे तक घुसा हुआ है. सर विलियम हेनरी पर्किन ने सबसे पहले सिंथेटिक डाई का आविष्कार किया था.

पर्किन ने गलती से पर्पल (मॉवीन) कलर के डाई का आविष्कार कर लिया था, जो कपड़ा उद्योग में काफी हिट हुआ. आज का गूगल डूडल उनके उसी डाई के आविष्कार पर बनाया गया है.

इस डूडल को इंग्लैंड की इलस्ट्रेटर सॉनी रॉस ने बनाया है. इस डूडल में उन्होंने उसी पर्पल कलर से प्रेरणा ली है. इस डूडल में दिख रहे सभी लोगों ने पर्पल कलर के कपड़े पहने रखे हैं.

12 मार्च, 1838 को इंग्लैंड के ईस्ट एंड में जन्मे पर्किन के पिता एक जाने-माने बढ़ई थे. पर्किन ने लंदन स्कूल में पढ़ाई की. महज 15 साल की उम्र में ही पर्किन ने जाने-माने जर्मन केमिस्ट ऑगस्ट विलहेम वॉन हॉफमैन के साथ रॉयल कॉलेज ऑफ केमेस्ट्री (अब इंपीरयल कॉलेज ऑफ लंदन) लेबोरेटरी असिस्टेंट के रूप में काम करने लगे. ये दोनों उस वक्त कुछ पेड़ों की छाल से निकलने वाले एक तरह के केमिकल कुनैन की मलेरिया से लड़ने की संभावनाओं पर कुछ प्रयोग कर रहे थे.

गूगल ब्लॉग की मानें तो पर्किन जब 18 साल के थे तभी एक बार वो एक असफल प्रयोग के दौरान इस्तेमाल हुए बीकर को साफ कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने देखा कि बीकर में बचा केमिकल (एनिलिन) अल्कोहल के साथ मिलाने पर एक गहरे पर्पल कलर का पदार्थ बना रहा था.

पर्किन ने गलती से एक ऐसा पदार्थ बना लिया था, जिसे कपड़ों को पर्पल कलर में रंगा जा सकता था. सौभाग्य की बात ये थी कि उस वक्त कपड़ों में पर्पल कलर की काफी भारी मांग थी. इस कलर को राजसी और अभिजात वर्ग से जोड़कर देखा जाता था. अब तक कपड़ों को इस रंग में रंगने के लिए महंगे प्राकृतिक चीजों की मदद ली जाती थी, जिनका प्रयोग बहुत बड़े स्तर पर नहीं किया जा सकता था.

इस सुनहरे मौके को देखते हुए पर्किन और उनके भाई ने इस नए डाई को पेटेंट करा लिया और फैक्ट्रियां बनवाईं. इस कलर की मांग तब और बढ़ गई, जब 1862 के रॉयल एक्जीबिशन में महारानी विक्टोरिया ने खुद इस कलर के कपड़े पहने.

सर विलियम हेनरी पर्किन को 1906 में नाइटहुड की उपाधि मिली. 1907 में उनका निधन हो गया.

आज का ये गूगल डूडल यूएस, साउथ अमेरिका के वेस्ट कोस्ट, यूनाइटेड किंगडम सहित कुछ यूरोपीय देशों और भारत, जापान और इंडोनेशिया में देखा जा सकता है.

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