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सर्गेई आइजेंस्टाइन: सिनेमा को फ्रेम-दर-फ्रेम जोड़ने वाला फिल्ममेकर

सोवियत फिल्ममेकर सर्गेई आइजेंस्टाइन को फिल्म मोन्टाज का फादर कहा जाता है. मोन्टाज एक तरीके की एडिटिंग टेक्नीक है

FP Staff Updated On: Jan 22, 2018 12:53 PM IST

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सर्गेई आइजेंस्टाइन: सिनेमा को फ्रेम-दर-फ्रेम जोड़ने वाला फिल्ममेकर

सिनेमा की दुनिया को फिल्म मोन्टाज से परिचय कराने वाले सर्गेई आइजेंस्टाइन की आज 120वीं जन्मतिथि है. इस मौके पर गूगल ने एक ब्लैक एंड वाइट डूडल के जरिए उन्हें याद किया है.

सोवियत फिल्ममेकर सर्गेई आइजेंस्टाइन को फिल्म मोन्टाज का फादर कहा जाता है. मोन्टाज एक तरीके की एडिटिंग टेक्नीक है. फ्रेंच में मोन्टाज का मतलब भी होता है- एडिटिंग. उन्होंने ही मोन्टाज ऑफ अट्रैक्शन्स फॉर्म बनाया. इस तकनीक में फिल्म रोल को एक क्रमबद्ध तरीके से काटकर जो़ड़ा जाता है तो वो अर्थपूर्ण दृश्य पेश करे. ये तकनीक कई मशहूर फिल्मों जैसे- सिटीजन केन, द कराटे किड, गॉडफादर और फाइट क्लब में इस्तेमाल हुई है.

सर्गेई का मानना था कि अगर दो तस्वीरों को जोड़कर एक मेंटल इमेज बनाई जाए, तो वो एक तस्वीर से ज्यादा प्रभावी होती है. ऐसे में कई तस्वीरों को जोड़कर इस तरह प्रभावी तरीके से बात कही जा सकती है, जिसके लिए संवादों की जरूरत ही नहीं होगी.

इस डूडल में सर्गेई आइजेंस्टाइन को फिल्म रोल से घिरा हुआ दिखाया गया है. उन्होंने हाथ में एक कैंची पकड़ रखी है, जो एडिटिंग को दर्शाता है. इन फिल्मों को ध्यान से देखे तो उन्हें मूव करते हुए देखा जा सकता है.

सर्गेई आइजेंस्टाइन का जन्म लातविया के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उन्होंने पेट्रोग्राड इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग से आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. 1918 में बोल्शेविक क्रांति के जोश में वो लाल सेना में भर्ती हो गए. 1920 में वो मॉस्को चले गए और वहां थिएटरों में डिजाइनिंग क्षेत्र में काम करने लगे.

इसके बाद वो फिल्मों की ओर मुड़े. सर्गेई को उनकी फिल्म बैटलशिप पोटेमकिन, स्ट्राइक, अक्टूबर: 10 डेज़ दैट शुक द वर्ल्ड, अलेक्जैंडर नेव्स्की, इवान द टैरिबल के दो पार्ट और द जनरल लाइन के लिए याद किया जाता है. उनकी किताब एन अमेरिकन ट्रेजेडी पर भी फिल्म बनाने की तैयारियां हुई थीं लेकिन ये फिल्म स्क्रिप्ट से आगे नहीं बढ़ पाई.

बैटलशिप पोटेमकिन उन्होंने 1905 की क्रांति पर बनाई थी. ये फिल्म विश्व सिनेमा का एक मास्टरपीस मानी जाती है. इस फिल्म में उन्होंने अपना यादगार ओडेसा स्टेप्स सीक्वेंस इस्तेमाल किया है, जिसके लिए उन्हें खासतौर पर जाना जाता है. इसके पहले तक किसी ने भी ऐसा कुछ नहीं देखा था. उनकी फिल्में मोशन पिक्चर की बेहतर समझ का बेहतरीन उदाहरण समझी जाती हैं.

सर्गेई आइजेंस्टाइन की मौत महज 50 साल की उम्र में 1948 में हो गई लेकिन तब तक वो दुनिया को काफी कुछ दे चुके थे.

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