S M L

ट्विटर पर #MeToo के बाद आया #MeTwo

यौन उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन का हैशटैग #MeToo था और जर्मनी में नस्लवाद के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन का हैशटैग #MeTwo है

Updated On: Jul 30, 2018 09:45 PM IST

Bhasha

0
ट्विटर पर #MeToo के बाद आया #MeTwo

दुनियाभर में यौन उत्पीड़न के खिलाफ हैशटैग के रूप में लोकप्रिय हुए ‘MeToo’ आंदोलन के बाद अब नस्लवाद के खिलाफ जर्मनी में भी ‘MeTwo’ आंदोलन हो रहा है. जर्मनी में दूसरी और तीसरी पीढ़ी के आव्रजक अपने साथ हर रोज नस्ल के आधार पर होने वाले भेदभाव और इस बारे में टि्वटर पर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं. इन अनुभवों के आधार पर वह बता रहे हैं कि जर्मन नागरिक के रूप में उनकी स्वीकार्यता के लिए उन्हें अब भी कितने संघर्ष का सामना करना पड़ता है.

यौन उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलन का हैशटैग #MeToo था और जर्मनी में नस्लवाद के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन का हैशटैग #MeTwo है. #MeTwo को तुर्की मूल के 24 वर्षीय पत्रकार अली कैन ने तब बनाया जब तुर्किश-जर्मन फुटबॉल खिलाड़ी मेसुत ओजिल को जर्मनी की राष्ट्रीय टीम से इस्तीफा देना पड़ा था.

ओजिल ने नस्लभेद के बाद दे दिया था इस्तीफा

तुर्किश आव्रजक के बेटे ओजिल ने तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के साथ तस्वीर खिंचवाने के उनके फैसले की जर्मनी में हुई तीखी आलोचना के बाद इस्तीफा दे दिया था. ओजिल ने अपनी प्रतिक्रिया में जर्मन फुटबॉल संघ, इसके अध्यक्ष, प्रशंसकों और मीडिया पर हमला बोला. उन्होंने अपनी आलोचना होने पर इसे नस्लवाद बताया और तुर्की मूल के लोगों के साथ व्यवहार में दोहरे मानक अपनाए जाने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘जब मैं जीतता हूं तब मुझे जर्मन कहा जाता है और जब हार जाता हूं तो तब मुझे एक आव्रजक कहा जाता है.’

दो संस्कृतियों से जुड़ा होने के कारण बनाया #MeTwo

पत्रकार अली कैन ने #MeTwo हैशटैग का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि वह यह दिखाना चाहते थे कि जर्मनी में जातीय अल्पसंख्यक अक्सर खुद को दो संस्कृतियों से जुड़ा महसूस करते हैं. इन दो संस्कृति में से एक जर्मनी की है तो दूसरी उनके पूर्वजों के मूल देश तुर्की की है.

इस हैसटेग  के साथ सोमवार तक टि्वटर पर 60 हजार ट्वीट पोस्ट किए जा चुके थे. जिनमें भेदभाव के उदाहरणों के बारे में बताया गया है. जर्मनी में तुर्की मूल के 40 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. जिन्हें द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण में मदद के लिए 1960 के दशक में बुलाया गया था.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi