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फेसबुक पोस्ट के जरिए 30 लेखकों ने मिलकर लिखा एक अनूठा उपन्यास

तीस विभिन्न लेखकों ने 30 दिन में फेसबुक पोस्ट के जरिए एक कहानी प्लॉट को अपनी विशिष्ट शैली और अनूठी कल्पनाशक्ति से ‘30 शेड्स ऑफ बेला’ को एक उपन्यास का रूप दिया है

Bhasha Updated On: Jan 14, 2018 04:58 PM IST

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फेसबुक पोस्ट के जरिए 30 लेखकों ने मिलकर लिखा एक अनूठा उपन्यास

नित नूतन प्रयोगों के लिए मशहूर इंटरनेट जगत में ‘30 शेड्स ऑफ बेला’ के रूप में एक नई पहल सामने आई है जिसमें तीस विभिन्न लेखकों ने 30 दिन में एक कहानी प्लॉट को अपनी विशिष्ट शैली और अनूठी कल्पनाशक्ति से एक उपन्यास का रूप दिया है.

वरिष्ठ पत्रकार जयंती रंगनाथन के संपादन में आई यह पुस्तक दरअसल आभासी दुनिया में पहले उतरी और उसने ‘कागजी पैरहन’ बाद में पहना. इस कहानी को तीस विभिन्न लेखकों ने फेसबुक की पोस्ट के माध्यम से आगे बढ़ाया है.

हिंदी साहित्य में दशकों पहले एक कृति आई थी ‘बहती गंगा’ उपन्यास. शिवप्रसाद मिश्र 'रुद्र' के इस उपन्यास में काशी के 200 साल के इतिहास को अलग-अलग कहानियों में पिरोया गया था. ये कहानियां अपने आप में स्वतंत्र होने के बावजूद आपस में किसी न किसी प्रकार से जुड़ी हैं और इसे एक उपन्यास का स्वरूप प्रदान करती हैं.

दिलचस्प है कि ‘30 शेड्स ऑफ बेला’ का कहानी प्लॉट भी बनारस के आसपास ही घूमता है. बनारस देश-विदेश के युवा-बुजुर्ग सहित सभी श्रेणी के पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है. कहानी की शैली पर्यटक वाली रुचि के साथ शुरू होकर भावनात्मक और रहस्य-रोमांच के तमाम सीढ़ियों पर चढ़ते हुए पाठकों की उत्सुकुता को बनाए रखती है.

एक साथ 30 लेखकों द्वारा लिखा पहला हिंदी उपन्यास

हिंदी में अभी तक दो या तीन लेखकों द्वारा कोई उपन्यास लिखने के उदाहरण तो मिलते हैं. किंतु एक साथ तीस लेखकों का एक ही कहानी को आगे बढ़ाने का यह बिल्कुल नवीन प्रयोग है.

पुस्तक पढ़ते समय लेखकों को कई बार कहानी में कुछ शिथिलता महसूस हो सकती है. किंतु हमें यह बाद भी याद रखना चाहिए कि मूल लेखन फेसबुक पोस्ट के रूप में हुआ है जिसकी अपने लाभ और सीमितताएं होती हैं. साथ ही मूल लेखन हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी हुआ है. अंग्रेजी लेखन का बाद में हिंदी में अनुवाद हुआ.

बेला एक पढ़ी-लिखी आधुनिक विचार वाली भारतीय लड़की है. उसके जीवन में घटनाचक्र कुछ इस तरह से घूमता है कि उसे अपने आसपास, अपने पति, माता-पिता तक पर संदेह होने लगता है. लेखक बदलने के साथ साथ बेला की कहानी में नए-नए मोड़ भी आते रहते हैं. वैसे यदि कुछ घटनाएं कम होती तो भी बेला के चरित्र को बखूबी संवारा जा सकता है. बहरहाल, यह तय है कि यदि आप इस पुस्तक के दो पृष्ठ भी पढ़ लेंगे तो आपके लिए फिर इसे अधूरा छोड़ना मुश्किल लगेगा.

(तस्वीर 30 शेड्स ऑफ बेला के फेसबुक से साभार)

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