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यूपी सरकार की मंत्री का विवादित बयान, दलितों के घर मच्छर काटते हैं फिर भी BJP नेता वहां जाते हैं

इससे पहले यूपी सरकार के मंत्री सुरेश राणा ने भी दलित के घर खाना खाया था जिस पर विवाद हो गया

Updated On: May 04, 2018 02:36 PM IST

FP Staff

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यूपी सरकार की मंत्री का विवादित बयान, दलितों के घर मच्छर काटते हैं फिर भी BJP नेता वहां जाते हैं
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यूपी सरकार की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने गुरुवार को एक विवादित बयान दिया. उन्होंने कहा कि मच्छर काटने के बावजूद बीजेपी नेता दलितों के घर जाते हैं और खाना खाते हैं. इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है.

जायसवाल ने कहा, समाज के सभी वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं. इसे लागू कराने और लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार के मंत्री कई क्षेत्रों में दौरा करते हैं. बावजूद इसके कि उन्हें सारी रात मच्छर काटते रहते हैं.

जायसवाल ने यह बयान एक सवाल के जवाब में दिया जिसमें राज्य के मंत्री सुरेश राणा के दलित के घर खाना खाने के बाद पनपे विवाद को लेकर पूछा गया था.

इससे पहले यूपी सरकार के गन्ना विकास और जिला प्रभारी मंत्री सुरेश राणा ने भी दलित के घर खाना खाया था लेकिन उनकी इस पर काफी आलोचना हुई. इसकी वजह यह रही कि राणा ने हलवाइयों के बनाए पालक पनीर, मखनी दाल, छोला, रायता, तंदूर, कॉफी, रसगुल्ला और बोतलबंद पानी का स्वाद चखा था.

हालांकि मंत्री सुरेश राणा ने इस बात से इनकार करते हुए कहा, 'खाना गांव वालों ने गांव में ही बनाया था.' खबरों के मुताबिक मंत्री और उनके सहयोगी एक दलित के घर रात के खाने पर पहुंचे लेकिन उन्होंने बाहर से खाना और मिनरल वाटर मंगवाया क्योंकि परिवार को मंत्री के आने की सूचना नहीं थी.

इस भोज के तमाम व्यंजन और चम्मच-कटोरी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. दलित परिवार ने दावा किया है कि उन्हें भोज के कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी. उन्हें मेहमानों की खातिरदारी के लिए रात 11 बजे नींद से जगाया गया.

देश में राजनेताओं की ओर से दलितों के घरों में खाना खाने के बढ़ते चलन के बीच बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने इसे दिखावा और बहुजन समाज का ‘अपमान‘ करार दिया है. दलितों के घर में खाना खाए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर बहराइच लोकसभा सीट से सांसद सावित्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भारत के संविधान में जाति व्यवस्था को खत्म करते हुए सबको बराबर की जिंदगी जीने का अधिकार दिया है, लेकिन आज भी अनुसूचित जाति के प्रति लोगों की मानसिकता साफ नहीं है.

(इनपुट भाषा से)

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