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कर्नाटक चुनाव में योगी का ‘मिशन मठ’ और हिंदुत्व का फॉर्मूला दिलाएगा बीजेपी को जीत?

योगी की कट्टर हिंदुत्व की छवि को कर्नाटक चुनाव में भुनाने के लिए बीजेपी ने उन्हें सेनापति बनाया है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: May 04, 2018 01:30 PM IST

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कर्नाटक चुनाव में योगी का ‘मिशन मठ’ और हिंदुत्व का फॉर्मूला दिलाएगा बीजेपी को जीत?

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की चुनावी रैलियों के बाद सियासी पारा चरम पर पहुंच चुका है. पीएम मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के रैलियों में वार-पलटवार के बीच अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ एक बड़ी जिम्मेदारी के साथ मोर्चा संभालने के  लिए रैलियों के मैदान में उतर चुके हैं.

Modi-Yogi

(फोटो: पीटीआई)

बड़ा सवाल ये है कि क्या योगी त्रिपुरा की तरह ही कर्नाटक में भी हिंदुत्व की अलख जगा कर कर्नाटक के तमाम पंथों का बीजेपी के प्रति झुकाव पैदा कर सकेंगे?

त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय को मानने वालों की लाखों में तादाद है और नाथ संप्रदाय के प्रमुख योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी. वैसा ही करिश्मा कर्नाटक में भी बीजेपी योगी के प्रचार से देखना चाहती है क्योंकि  कांग्रेस लिंगायत कार्ड खेल कर चुनावी मुकाबले में मनोवैज्ञानिक बढ़त बना चुकी है. ऐसे में योगी की कट्टर हिंदुत्व की छवि को कर्नाटक चुनाव में भुनाने के लिए बीजेपी ने उन्हें सेनापति बनाया है. माना जा रहा है कि कर्नाटक में योगी की 30 से ज्यादा रैलियां हो सकती हैं.

yogi adityanath

योगी का ‘कर्नाटक कनेक्शन’

योगी आदित्यनाथ कर्नाटक पहुंचते ही अपने काम में जुट भी गए. उन्होंने बीजेपी की मजबूती के लिए शिमोगा के रामचंद्रपुरा मठ के महंत राघवेश्वर भारती से मुलाकात की. इससे पहले अपने कर्नाटक दौरे मे योगी आदित्यनाथ आदिचुंचुनागरी मठ में एक रात रुके थे. नाथ संप्रदाय के इस मठ के प्रमुख निर्मलानंद नाथ स्वामी हैं. खुद योगी भी गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं. उन्होंने खुद का कर्नाटक के साथ पुराना रिश्ता बताते हुए कहा था कि उनका योगेश्वर मठ वहां मौजूद है.

कर्नाटक में नाथ संप्रदाय से जुड़े लोगों की तादाद भी बहुत है. यहां के कद्री मठ और नाथ संप्रदाय के बीच आत्मीय रिश्ता है. यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कद्री मठ का दौरा कर चुके हैं.

yogi adityanath

कर्नाटक में लिंगायत समाज के करीब 450 मठ हैं तो वोक्कालिगा के करीब सौ से ज्यादा मठ हैं. वहीं कुरबा समुदाय के 70 मठ तो नाथ संप्रदाय के भी कई मठ हैं. कर्नाटक की सियासत में इन मठों की अपनी अहमियत है और योगी आदित्यनाथ के जरिए बीजेपी आध्यात्मिक एकता के रूप में अपनी जीत की बुनियाद पक्की करना चाहती है.

योगी की रैलियां खासतौर से उन इलाकों में रखी गई हैं जहां लिंगायत, वोक्कालिगा, कुरुबा और ब्राह्मण समुदायों के मठ है जिन पर आस्था रखने वालों की तादाद लाखों में है.

योगी के भगवा आवरण की ही तरह इन संप्रदायों के मठाधीश भी भगवा धारण करते हैं और सभी वर्ग भगवद्धगीता, वेद और उपनिषदों का अध्ययन करते हैं. बीजेपी योगी के भगवा रूप और आध्यात्मिक अवतार के जरिए तमाम पंथों और मठों में अपनी सहमति और स्वीकार्यता तलाश करने की कोशिश कर रही है ताकि चुनाव में बीजेपी के पक्ष में संदेश जा सके.

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यही वजह है कि योगी के पिछले कर्नाटक दौरे के वक्त से ही उनकी कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के साथ जुबानी जंग और ट्वीटर-वॉर चरम पर है. जब योगी पहली दफे कर्नाटक प्रचार के लिए आए तो सिद्धारमैया ने उन पर तंज करते हुए कहा था कि 'उनका स्वागत है और वो कर्नाटक से यूपी के लिए बहुत कुछ सीख सकते हैं.'

गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद सिद्धारमैया के हमले और तीखे हो गए. उन्होंने योगी की कर्नाटक यात्रा पर तंज कसते हुए कहा था कि ‘जो अपना लोकसभा क्षेत्र नहीं बचा सके वो कर्नाटक में बीजेपी का बेड़ा कैसे पार लगाएंगे?’ सिद्धारमैया ने योगी के कर्नाटक आने को ‘माइनस-प्वाइंट’ करार दिया था.

लेकिन हिंदुत्व के अलावा योगी के तरकश में कांग्रेस के सीएम सिद्धारमैया पर हमला करने के लिए कई दूसरे तीर भी हैं. कर्नाटक में किसानों की खुदकुशी को लेकर सिद्धारमैया बीजेपी को बड़ा मुद्दा दे चुके हैं. योगी आदित्यनाथ यूपी में किसानों की कर्जमाफी को कर्नाटक में बीजेपी की उपलब्धि और किसान हितैषी छवि के रूप में प्रचारित कर सकते हैं. साथ ही वो कर्नाटक में किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर सिद्धारमैया सरकार को घेरते हुए किसानों की अनदेखी का आरोप भी लगा सकते हैं.

Kannur: Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath joins Kerala BJP President Kummanam Rajasekhara's ‘Janaraksha Yathra’ in Kannur on Wednesday. PTI Photo (PTI10_4_2017_000069B)

एक तरफ योगी का मिशन मठ तो दूसरी तरफ उनके उग्र हिंदुत्व के बयान भी हिंदू भावनाओं में गर्माहट पैदा करने का काम करेंगे. वो पिछले दौरे में ही अपने इरादों का यह कह कर आगाज कर चुके थे कि कर्नाटक को जेहादियों की शरण स्थली नहीं बनने देंगे. उन्होंने कर्नाटक सरकार पर हिंदुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या के आरोप लगाए थे.

साथ ही यूपी और कर्नाटक के बीच श्रीराम और हनुमान के जरिए ऐतिहासिक रिश्तों का पुल भी तैयार किया था. उन्होंने कहा था कि वनवास के वक्त जब सीता की तलाश में राम भटक रहे थे तब कर्नाटक में ही उन्हें हनुमान मिले थे. लेकिन हनुमान की जन्मस्थली में हनुमान की जगह टीपू सुल्तान की पूजा में कांग्रेस जुटी हुई है. योगी के बयानों से बीजेपी की कोशिश वोटों के ध्रुवीकरण की है ताकि यूपी विधानसभा चुनाव की ही तरह एकतरफा नतीजे पक्ष में आएं.

Bengaluru: BJP National President Amit Shah speaks as State President B S Yeddyurappa looks on, during an interactive meeting with the professionals & entrepreneurs in Bengaluru on Thursday. PTI Photo by Shailendra Bhojak (PTI4_19_2018_000237B)

कर्नाटक को दक्षिण का दरवाजा कहा जाता है. कर्नाटक ही दक्षिण भारत में बीजेपी के लिए वो पहला राज्य था जहां उसने बीएस येदुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाई थी. येदुरप्पा के पार्टी छोड़कर जाने के बाद उसे साल 2013 में हार का मुंह देखना पड़ा और सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार बना ली. लेकिन येदुरप्पा की पार्टी में वापसी के बाद न सिर्फ लोकसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा हुआ बल्कि कर्नाटक में फिर से सरकार बनाने की उम्मीदें भी जगी हैं. येदुरप्पा लिंगायत समाज से आते हैं लेकिन कांग्रेस ने लिंगायत को अलग पंथ का दर्जा देकर बड़ा सियासी दांव चल दिया. कर्नाटक में 17 फीसदी लिंगायत समाज से हैं जबकि 24 फीसदी दलित आबादी के बड़े हिस्से पर जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) और कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत किए हुए है.

भले ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीएस येदुरप्पा दलितों के घर खाना खा कर दलितों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हों. लेकिन यहां वोटों का ध्रुवीकरण ही गेमचेंजर साबित होगा वर्ना त्रिशंकु विधानसभा के आसार दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में योगी की पूरी कोशिश होगी कि वो हिंदुत्व के जरिए सभी जातियों को एक ही पाले में लाने की कोशिश करें क्योंकि तभी बीजेपी के लिए जीत की राह तय हो सकेगी.

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