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योगी आदित्यनाथ! यूपी के सीएम बनिए दारोगा नहीं...

योगी फिलहाल गलत कारणों से खबरों में रह रहे हैं.

Ajay Singh Ajay Singh Updated On: Mar 24, 2017 05:43 PM IST

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योगी आदित्यनाथ! यूपी के सीएम बनिए दारोगा नहीं...

क्वांटम फिजिक्स में 'अनिश्चितता का सिद्धांत' कहता है कि किसी कण की स्थिति और गति को एकसाथ एकदम ठीक-ठीक नहीं मापा जा सकता. स्थिति जितनी अधिक शुद्धता से मापी जाएगी, उसके संवेग यानी गति को मापने में उतनी ही अशुद्धता बढ़ जाएगी. अब जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पिछले तीन साल में देश की राजनीति में अपनी प्रधान भूमिका को पुख्ता करती जा रही है, विज्ञान का यह सिद्धांत राजनीति पर फिट बैठता दिख रहा है.

चुनाव नतीजों के बाद देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीतिक उथलपुथल को ही देखिए. बीजेपी की अपार जीत के बाद नए सीएम के नाम का सवाल उठ खड़ा हुआ? इस तरह से नाम उछाले और गिराए गए कि भारी अनिश्चितता की स्थिति बनती नजर आई.

यह मानना तो बचकानी बात होगी कि गोरखनाथ पीठ के महंत आदित्यनाथ के नाम का चुनाव अनायास ही कर लिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि अपने आप में ताकतवर और सख्त नेता की है, ऐसे में सोच से परे है कि संघ परिवार या कोई अन्य नेता उन्हें किसी सौदेबाजी के लिए मजबूर कर दें. फिर भी आदित्यनाथ का सीएम बनना सामान्य समझ से तो परे था ही.

मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला हो जाने के बाद भी अनिश्चितता बाकी है. अब यह सामाजिक स्तर पर है. मुख्यमंत्री का हजरतगंज थाने का अचानक निरीक्षण कुछ और नहीं बल्कि यूपी के दारोगा के रूप में दिखने की उनकी चाहत का नजारा थी. दारोगा एक अहम प्रतीक है जो सरकार की ताकत और सर्वव्यापिता का प्रतिनिधित्व करता है.

नतीजा ये है कि राज्य की पूरी पुलिस मशीनरी हदराए हुए घूम रही है. यह देखना अपने आप में दयनीय था कि कैसे सभी शीर्ष पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री को थाने के कामकाज के बारे में समझा रहे थे जबकि अपने भ्रष्ट आचरण के बदनाम उनके जूनियर खड़े ताक रहे थे.

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थाने में सीएम आदित्यनाथ

इसमें दोराय नहीं है कि थानों या पुलिस स्टेशनों की हालत में सुधार करने और उन्हें जनता के लिए और मददगार बनाने की जरूरत है. लेकिन सवाल है कि 'क्या इसके लिए यह सही तरीका है?'

इसी तरह हर कोई मानेगा कि पब्लिक प्लेस में बने अवैध बूचड़खानों एक परेशानी थे. बीच बाजार जानवरों की कटाई राज्य में दिखने वाले सबसे वीभत्स दृश्यों में था. राजनीतिक सरपरस्ती के दम पर बूचड़खाने चला रहे लोगों को कई डर-भय नहीं था और वह कानून को ठेंगे पर रखते थे. पश्चिमी यूपी में यह सामाजिक असंतोष का मामला भी था क्योंकि लोगों को लगता था कि इन बूचड़खानों में चोरी कर लाए गए दुधारू पशुओं की कटाई होती है.

लेकिन इन अवैध बूचड़खानों का पूरा ठीकरा पुलिस के सिर फोड़ना सही नहीं होगा. दशकों से इस रैकेट में नागरिक प्रशासन से लेकर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स और जानवरों के डॉक्टरों की भी मिलीभगत रही है. इसे सुधारने के लिए दीर्घावधि संस्थागत हल की जरूरत है न कि सिर्फ दिखाने के लिए एक झटके में पुलिसवालों के दम पर जबरन बंदी करा देना.

एक अन्य सामाजिक मुद्दा महिलाओं की सुरक्षा का है. पिछले 5 वर्षों में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं की जड़ में छेड़छाड़ की ऐसी घटनाएं रही हैं. मुजफ्फरनगर दंगों के पीछे की वजह भी यही रही. लेकिन पार्कों और शॉपिंग मॉल्स में यूपी पुलिस का जो उन्मत व्यवहार अब देखने को मिल रहा है, वह न केवल अशिष्ट बल्कि घृणित भी है.

जिन्हें यूपी पुलिस के बारे थोड़ा भी पता है, वह इस बात की गवाही देंगे कि सिपाहियों और अफसरों को महिलाओं से व्यवहार को लेकर दीर्घकालीन व विस्तृत शैक्षणिक ज्ञान दिए जाने की जरूरत है. ऐसे उदाहरण हैं जहां पुलिस थानों में रेप की घटनाएं हुई हैं. अगर लोकल थानों के दारोगाओं को 'मोरल पुलिसिंग' के लिए ताकत दे दी जाती है तो यह इलाज बीमारी से ज्यादा खतरनाक होगा. आदित्यनाथ ठीक यही कर रहे हैं.

इसमें कोई शक नहीं है कि योगी गलत कारणों से खबरों में रह रहे हैं. विशाल जनादेश के बाद जहां राज्य को स्थिरता और निश्चितता के रास्ते पर बढ़ना चाहिए था लेकिन वह अंधेरी-अनजान गलियों में भटकता दिख रहा है. इसके पीछे वजह योगी का रहस्यमयी राजनीतिक व्यक्तित्व है जो आधुनिक राजसत्ता के बने-बनाए सिद्धांतों के परे दिखता है. वह एक ऐसी शख्सियत हैं जो स्पष्ट रूप से धर्म को फिर से स्थापित करने की बातें करता है. लेकिन वह अब 'आधुनिक व सेकुलर राज्य' के नेता हैं. यह विरोधाभास इतना साफ है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

जाहिर है यह कहना जल्दबाजी होगी कि योगी अनिश्चितता के इस रास्ते पर ही कदम बढ़ाते रहेंगे. संभावना है कि वह अपनी जिम्मेदारियों को समझकर राजनीतिक और सामाजिक संतुलन जल्द बना लें. अगर ऐसा नहीं होता है तो विज्ञान के 'अनिश्चितता के सिद्धांत' का राजनीति में प्रयोग एक सामाजिक 'पागलपन' को जन्म दे सकता है. इसका नतीजा भला नहीं हो सकता.

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