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फैजाबाद का नाम बदलना 'राम मंदिर निर्माण' के बदले की खानापूर्ति है?

छोटी दीपावली के मौके पर राम भक्तों के बीच पहुंचकर उम्मीद के मुताबिक, योगी ने जनपद फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या करने का ऐलान कर दिया.

Updated On: Nov 06, 2018 08:11 PM IST

Amitesh Amitesh

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फैजाबाद का नाम बदलना 'राम मंदिर निर्माण' के बदले की खानापूर्ति है?
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दीपावली के ठीक एक दिन पहले उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम की नगरी अयोध्या में थे. छोटी दीपावली के मौके पर राम भक्तों के बीच पहुंचकर उम्मीद के मुताबिक, योगी ने जनपद फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या करने का ऐलान कर दिया. योगी के ऐलान के बाद पूरी अयोध्या नगरी राम मय हो गई.

योगी आदित्यनाथ ने छोटी दीपावली के मौके पर अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के पिता राजा दशरथ के नाम पर मेडिकल कॉलेज खोलने की भी घोषणा की. अयोध्या में बनने वाले एयरपोर्ट का नाम राम के नाम पर करने का भी ऐलान कर दिया. इसके पहले भगवान राम की बड़ी मूर्ति सरयू तट पर स्थापित करने का भी ऐलान किया जा चुका है.

योगी आदित्यनाथ ने इसके पहले अयोध्या पहुंचकर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के ‘स्वरूप’ को लंका विजय और चौदह साल के वनवास के बाद वापस अयोध्या पहुंचने पर स्वागत किया. इन सांकेतिक स्वरूपों को रामायण में वर्णित उस वक्त की मान्यताओं के मुताबिक पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन पर स्वागत किया गया. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. पिछले साल भी मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने पहली दीपावली के मौके पर इसी तरह से भगवान राम के अयोध्या आगमन पर स्वागत किया था.

फोटो: पीटीआई

फोटो: पीटीआई

अयोध्या में दीपोत्सव मनाया गया. सरयू नदी का तट तीन लाख दियों के साथ जगमग हो रहा था. इस मौके पर रामकथा और प्रवचन भी हो रहा था. कई देसी और विदेशी कलाकारों की तरफ से रंगारंग प्रस्तुति भी की गई. लेजर शो का आयोजन भी किया गया. मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़ी झांकियां राम की नगरी की शोभा बढ़ा रही थी.

दीपावली के मौके पर जगमग अयोध्या नगरी पूरी तरह राममय थी. इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘अयोध्या हमारी आन, बान और शान का प्रतीक है.’ योगी ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी अयोध्या के साथ अन्याय नहीं कर सकता.

योगी आदित्यनाथ का दीपावली के मौके पर अयोध्या पहुंचना और वहां पहुंचकर इस तरह की घोषणा करना दिखाता है कि अयोध्या और राम उनके लिए कितना अहम है. हालांकि, योगी आदित्यनाथ ने पिछली बार भी इसी तरह के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद ही अयोध्या में दीपावली के मौके पर इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम की परंपरा की शुरुआत हुई थी. लेकिन, इस बार अयोध्या में इस तरह के कार्यक्रम का महत्व ज्यादा बढ़ गया है.

इस वक्त राम मंदिर निर्माण को लेकर साधु-संतों से लेकर विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग कर दी है. संतों की तरफ से देशभर में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है. मंदिर नहीं बनने की सूरत में फिर से बड़े आंदोलन की धमकी भी दी जा रही है. यहां तक कि मंदिर निर्माण को लेकर बीजेपी के भीतर से भी आवाजें निकल रही हैं. सबकी तरफ से अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की मांग की जा रही है. एक बार फिर से मंदिर मुद्दा काफी गरम हो गया है.

लेकिन, हकीकत है कि राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर सरकार की तरफ से कानून बनाने की दिशा में कोई साफ रुख नजर नहीं आ रहा है. इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ की तरफ से अयोध्या में राम मंदिर नहीं तो कम से कम राम की मूर्ति बनाने की बात करना, राम के अयोध्या वापस लौटने की मान्यताओं के आधार पर दीपावली के मौके पर बड़े दीपोत्सव का आयोजन करना, फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या करना और वहां मेडिकल कॉलेज और एयरपोर्ट निर्माण का ऐलान करना राम की नगरी मे विकास के प्रति सरकार की कोशिशों को दिखाता है.

yogi adityanath

योगी आदित्यनाथ का यह कहना कि अयोध्या के साथ कोई अन्याय नहीं होगा, विरोधियों के आरोपों की धार को कुंद करने की कोशिश है. विरोधियों की तरफ से अक्सर यह सवाल उठाया जाता रहा है कि सत्ता में आने के लिए बीजेपी राम का नाम लेती है, लेकिन, सत्ता में आते ही वो राम को भूल जाती है.

योगी को लगता है कि राम मंदिर निर्माण में अभी कई तरह की बाधाएं हैं. भले ही उन बाधाओं को दूर कर मंदिर निर्माण की बात वो करते हैं. लेकिन, उसके पहले अयोध्या में विकास की गंगा बहाकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि राम उनके जेहन में सबसे ऊपर हैं.

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