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अलविदा 2017: राजनीति के वो चहरे जिनके लिए बेमिसाल रहा ये साल

आइए जानते हैं राजनीति के गलियारों में किसके लिए साल 2017 रहा सबसे बेमिसाल...

Updated On: Dec 29, 2017 08:24 AM IST

FP Staff

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अलविदा 2017: राजनीति के वो चहरे जिनके लिए बेमिसाल रहा ये साल

साल 2017 खत्म होने वाला है. लेकिन अपने साथ सभी के लिए कुछ न कुछ छोड़ कर भी जा रहा है. कुछ के लिए ये साल बेमिसाल रहा, तो कुछ के लिए ये साल उतार-चढ़ाव वाला रहा. हालांकि देश की राजनीति में कुछ लोगों ने इस साल नई बुलंदियों का छुआ. आइए जानते हैं राजनीति के गलियारों में किसके लिए साल 2017 रहा सबसे बेमिसाल...

योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए 2017 बेहतरीन रहा. योगी की पॉपुलैरिटी 2017 में बेहिसाब बढ़ी. साल 2017 को आप उनके राजनीतिक करियर का टर्निंग प्वाइंट भी कह सकते हैं. 11 मार्च को सामने आए यूपी विधानसभा के नतीजों ने सभी को चौंका दिया.

बीजेपी ने 325 से सीटें जीतीं. लेकिन इससे भी बड़ा चौंकाने वाला फैसला तब सामने आया जब पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया. किसी को उम्मीद नहीं थी कि यूपी में योगी सरकार बनेगी. लेकिन पार्टी के इस फैसले ने योगी के राजनीतिक करियर को चमका दिया.

Lucknow: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Aditiyanath before a press conference at Vidhan Bhawan in Lucknow on Monday. PTI Photo by Nand Kumar (PTI12_18_2017_000084B)

सीएम बनने के बाद योगी की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती चली गई और देखते-देखते वो बीजेपी के हर एक अहम कार्यक्रम का अहम हिस्सा बनने लगे. कर्नाटक से गुजरात और गुजरात से हिमाचल तक योगी पार्टी के स्टार कैंपेनर के रूप में जमकर रैलियां करते नजर आए. 2017 ने जाते-जाते भी योगी का कद बढ़ाया. साल के आखिरी महीने में हुए निकाय चुनावों में योगी के नेतृत्व में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया.

निर्मला सीतारमण

योगी की ही तरह साल 2017 निर्मला सीतारमण के लिए भी कमाल का रहा. उनके राजनीतिक करियर का ग्राफ भी 2017 में तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा. विधानसभा चुनावों के बाद गोवा में नेतृत्व संकट की वजह से मनोहर पर्रिकर को रक्षामंत्री का पद छोड़ना पड़ा.

इस दौरान कई दिनों तक रक्षामंत्री का पद खाली रहा. शायद ही किसी ने सोचा होगा कि किसी महिला को ये पद दिया जा सकता है. लेकिन मोदी सरकार के इस कमाल के फैसले का सभी ने स्वागत किया और देश को निर्मला सीतारमण के रूप में पहली पूर्णकालिक महिला रक्षामंत्री मिली.

nirmala sitaraman

निर्मला सीतारमण मोदी सरकार में पहले से कैबिनेट मंत्री है. लेकिन रक्षा मंत्रालय मिलना उनके करियर का अभी तक का सबसे बड़ा मुकाम है. उनसे पहले प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने दो साल तक रक्षा मंत्रालय अपने पास रखा था. अमेरिका में वीजा नियमों में सख्ती से भारतीय कंपनियों और खासतौर पर आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों के प्रभावित होने को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की चिंता को असरदार तरीके से रखने वाली निर्मला सीतारमण आज नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल की अहम सदस्यों में से एक हैं.

आंध्रप्रदेश की रहने वाली निर्मला सीतारमण वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, वित्त एवं कारपोरेट मामलों की राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुकी है. निर्मला 2006 में बीजेपी से जुड़ी और प्रवक्ता के तौर पर उन्होंने पार्टी की नीतियों का प्रभावी ढंग से प्रचार और बचाव किया. साल 2014 में जब लोकसभा चुनाव हुए तब बीजेपी की प्रवक्ता रहते हुए निर्मला ने 'प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी' संदेश का असरदार तरीके से प्रचार किया.

अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक

Hardik-Alpesh_Jignesh

साल 2017 गुजरात के तीन युवा नेता अल्पेश, जिग्नेश और हार्दिक के लिए भी एक कामयाब साल रहा. इन तीनों ही नेताओं की लोकप्रियता राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी. साल के अंत में हुए गुजरात चुनाव में तीनों ही नेताओं का नाम खूब सुर्खियों में रहा. जहां अल्पेश और जिग्नेश पहली बार विधायक बने. वहीं हार्दिक ने चुनाव न लड़ते हुए बीजेपी के पसीने छुड़ा दिए.

हार्दिक और अल्पेश ने चुनाव में कांग्रेस का साथ दिया, तो जिग्नेश ने अकेले चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की. आज इन तीनों नेताओं को गुजरात की राजनीति के भविष्य के रूप में देखा जा रहा है. 2017 में हुए चुनाव ने इन तीनों नेताओं के सितारे चमका दिए. और राजनीति में इन्हें मुश्किल दौर का सामना कैसे करना ये भी सिखला दिया.

गुजरात सीएम और हिमाचल सीएम

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए भी साल 2017 बेमिसाल रहा. गुजरात चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर हुई. खुद सीएम रूपाणी के लिए अपनी राजकोट पश्चिम की सीट बचाना मुश्किल हो गया था. उनके खिलाफ गुजरात के सबसे अमीर उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरु खड़े थे.

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वोटों की गिनती में रूपाणी शुरुआत में पिछड़ते नजर आए. लेकिन अंत में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार इंद्रनील राजगुरु को 21 हजार से अधिक वोटों से हराया. रूपाणी 7 अगस्त, 2016 में पहली बार गुजरात के सीएम बने थे. ऐसे में एक साल में अपने नेतृत्व को साबित कर पाना कोई आसान काम नहीं था.

गुजरात में जीत के बाद पीएम मोदी ने एक बार फिर उनपर भरोसा दिखाया और उन्हें फिर से गुजरात की कमान सौंपी. साल 2017 रूपाणी के राजनीतिक करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाला रहा.

Shimla: Prime Minister Narendra Modi greets the newly sworn-in Chief Minister of Himachal Pradesh, Jairam Thakur as BJP President Amit Shah looks on, after the oath ceremony at Ridge in Shimla on Wednesday. PTI Photo (PTI12_27_2017_000068B)

हिमाचल विधानसभा चुनाव में धूमल की हार ने जयराम ठाकुर की राजनीति के लिए नया रास्ता खोल दिया. चुनाव नतीजों में बीजेपी को बहुमत तो मिला. लेकिन उसके सीएम उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए. नतीजे आने के बाद सीएम पद के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का नाम भी खूब उछला. लेकिन इस हार का सीधा फायदा सिर्फ जयराम ठाकुर को मिला.

ऐसा नहीं है कि हिमाचल की राजनीति में उनका पहले से नाम नहीं था. वो सीएम बनने से पहले छह बार विधायक भी रह चुके हैं. राजनीति में वाकई 2017 का साल योगी, रूपाणी, अल्पेश, जिग्नेश, हार्दिक और निर्मला सीतारमण के नाम रहा.

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