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क्या शिवराज के कन्या पूजन का जवाब है सिंधिया का माला न पहनना?

सिंधिया ने घोषणा की है कि वे जब तक बीजेपी सरकार को उखाड़ नहीं फेंकेंगे, फूल माला नहीं पहनेंगे, इस घोषणा के साथ ही सिंधिया सिर्फ सूत की माला ही स्वागत में स्वीकार कर रहे हैं

Dinesh Gupta Updated On: Dec 21, 2017 08:52 AM IST

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क्या शिवराज के कन्या पूजन का जवाब है सिंधिया का माला न पहनना?

राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान के मुकाबले में कांग्रेस के चेहरे को लेकर सस्पेंस अभी बना हुआ है. राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद यह माना जा रहा है कि सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर राज्य में प्रोजेक्ट किया जा सकता है. सिंधिया की राह में सबसे बड़ी रुकावट पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ को माना जा रहा है. चुनावी वर्ष शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भविष्य की चुनौती को भांपते हुए राज्यव्यापी दौरे तेज कर दिए हैं. नई लोकप्रिय योजनाओं की घोषणाएं भी रोज हो रहीं हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस बार के चुनाव में अपनी मामा की छवि को भुनाने की तैयारी में लग गए हैं. इसका संकेत मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में भी दिखाई देने लगा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हर कार्यक्रम की शुरुआत कन्या पूजन से कर रहे हैं. मुख्यमंत्री सभा के लिए बनाए गए मंच पर ही दस साल से छोटी नौ कन्याओं का पूजन करते हैं. उनके पैर धुलाते हैं. उनसे आशीर्वाद भी लेते हैं. कार्यक्रम राजनीतिक हो अथवा सरकारी सभी में कन्याओं की उपस्थिति को पहली प्राथमिकता में रखा गया है. मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम काफी लोकप्रिय भी हो रहा है. जहां भी मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी साधना सिंह मौजूद होती हैं, वहां वे भी कन्या पूजन में हिस्सा लेती हैं. कन्या पूजन के बाद ही मुख्यमंत्री अपने भाषण में महिलाओं से बहन और मामा के अपने रिश्ते की बात करते हैं.

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सिंधिया ने छोड़ दी है फूल माला 

कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को आम चुनाव से पहले बीजेपी से बड़ी चुनौती अपने ही संसदीय क्षेत्र में मिल रही है. उनके संसदीय क्षेत्र गुना के कोलारस एवं मुंगावली विधानसभा में उप चुनाव नए साल में होने हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस के कब्जे वाली इन दोनों सीटों को बीजेपी की झोली में ड़ाल कर सिंधिया का मनोबल तोड़ना चाहते हैं. सिंधिया की घेराबंदी के लिए आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों को इन विधानसभा क्षेत्रों में अभी से तैनात कर दिया गया है. सिंधिया यहां इन मंत्रियों का मुकाबला लोकप्रियता से करने में लगे हुए हैं. किसानों की आत्महत्या और फसल के वाजिब दाम न मिलने पर वे सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उनका आरोप है कि राज्य की बीजेपी सरकार किसान विरोधी है.

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उन्होंने मुंगावली में घोषणा की कि वे जब तक बीजेपी सरकार को उखाड नहीं फेंकेंगे, फूल माला नहीं पहनेंगे. इस घोषणा के साथ ही सिंधिया सिर्फ सूत की माला ही स्वागत में स्वीकार कर रहे हैं. सिंधिया द्वारा फूल माला न पहनने की घोषणा पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सिंधिया को स्किन एलर्जी है, इस कारण वे फूल माला नहीं पहनना चाहते. इससे पहले पवैया यह ऐलान भी कर चुके हैं कि यदि कोई सिंधिया से हाथ मिला ले तो वे एक लाख रुपए का ईनाम देंगे. पवैया की इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर ऐसे फोटो की भरमार हो गई थी, जिनमें सिंधिया लोगों को गले लगा रहे हैं और हाथ मिला रहे हैं.

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विदिशा के इंजीनियरिंग कॉलेज में टकराव 

विदिशा का सम्राट अशोक इंजीनियरिंग कॉलेज का संचालन जीवाजी राव एजूकेशन सोसायटी द्वारा किया जाता है. सिंधिया इस सोसायटी के अध्यक्ष हैं. पिछले दिनों सिंधिया ने कतिपय शिकायतों के चलते पूर्व सांसद प्रतापभानु शर्मा को सचिव के पद से हटा दिया था. अगले दिन ही शर्मा ने कुछ बीजेपी नेताओं का सहयोग लेकर सिंधिया को अध्यक्ष के पद से हटा दिया. सोसायटी में चल रहे विवाद के कारण सभी बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं. सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. शर्मा द्वारा घोषित की गई समिति में राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री दीपक जोशी को भी शामिल किया गया है. सरकार विवाद का लाभ उठाते हुए दीपक जोशी को अध्यक्ष बनाने की तैयारी में लग गई है.

कन्यादान और लाडली लक्ष्मी योजना से बने हैं मामा

शिवराज सिंह चौहान जब मुख्यमंत्री नहीं थे केवल सांसद थे तब से गरीब लड़कियों के विवाह करा रहे हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने देश में पहली बार लाडली लक्ष्मी योजना शुरू की. इस योजना के तहत लड़की का जन्म होने पर कुल एक लाख रुपए की राशि सरकार द्वारा माता-पिता को दी जाती है. वर्ष 2006 से लागू की गई इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं के शैक्षिक और आर्थिक स्तर में सुधार लाकर उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के साथ-साथ कन्या जन्म के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाना है. योजना के तहत बालिका के जन्म के बाद उसके पक्ष में प्रति वर्ष छ: हजार रुपए के राष्ट्रीय विकास पत्र पांच वर्ष तक शासन द्वारा क्रय किए जाते हैं. इस प्रकार यह राशि तीस हजार रुपए होती है.

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बालिका के कक्षा छठवीं में प्रवेश पर उसे दो हजार रुपए , नौवी में प्रवेश पर चार हजार रुपए , ग्यारहवीं में प्रवेश पर 7500 रुपए तथा ग्यारहवीं और बाहरवीं की पढ़ाई के समय दो वर्ष तक दौ सौ रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं. बालिका के 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर एवं 18 वर्ष के पूर्व विवाह न करने तथा बारहवीं कक्षा की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एक मुश्त राशि का भुगतान योजना के तहत किए जाने का प्रावधान है.  यह राशि एक लाख रुपए होती है.

बहुत लोकप्रिय हैं ये योजनाएं

शिवराज सिंह चौहान की सरकार की दूसरी लोकप्रिय योजना कन्यादान योजना है. योजना का उद्देश्य गरीब, जरुरतमंद, निराश्रित/निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/परित्याक्ता के विवाह के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है. यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है. इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु पूरी कर ली हो.

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पूर्व में इसके तहत 6500 रुपए की सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिए तथा एक हजार रुपए सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे र्की पूर्ति के लिए दी जाती थी. अब इस राशि को बढ़ाकर दस हजार रुपए कर दिया गया है. इसमें नौ हजार रुपए कन्या की गृहस्थी के लिए और एक हजार रुपए सामूहिक विवाह आयोजन खर्च के लिए है. इन दो योजनाओं की लोकप्रियता के कारण ही शिवराज सिंह चौहान की पहचान मामा के तौर पर होती है. मामा की पहचान रखने वाले वे देश के अकेले मुख्यमंत्री हैं. उनकी इसी पहचान के चलते कौन बनेगा करोड़पति में भी एक सवाल यह पूछा जा चुका है कि देश के किस मुख्यमंत्री को मामा के नाम से भी पहचाना जाता है.

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