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क्या तेलंगाना में समय से पहले चुनाव कराने के लिए मोदी केसीआर की मदद करेंगे?

केसीआर के प्रस्ताव पर सहमति देना, मोदी के ही एक राष्ट्र, एक चुनाव के विचार के खिलाफ जाना होगा

Updated On: Aug 26, 2018 01:54 PM IST

FP Staff

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क्या तेलंगाना में समय से पहले चुनाव कराने के लिए मोदी केसीआर की मदद करेंगे?

मार्च में गैर बीजेपी और गैर कांग्रेस फ्रंट की योजना बनाने वाले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अब तक का सबसे उदार संबंध दिखाया है. शनिवार को दोनों ने बीते 2 महीने में तीसरी बार मुलाकात की. अगस्त में इनकी दूसरी मुलाकात हुई. इसके साथ ही मोदी ने केसीआर के बेटे और तेलंगाना के आईटी मंत्री केटी रामा राव को भी मिलने के लिए समय दिया.

बताया जा रहा है कि पीएम मोदी और के. चंद्रशेखर राव के बीच हुई हालिया बैठक में तेलंगाना के विधानसभा चुनावों पर चर्चा हुई, जो साल 2018 की सर्दी में पड़ेंगे. सूत्रों की मानें तो केसीआर सितंबर में विधानसभा भंग कर देंगे और चुनाव आयोग तेलंगाना का चुनाव भी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ करा सकता है.

हालांकि केसीआर यह नहीं चाहते कि चुनाव आयोग उनके साथ वह करे जो साल 2003 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह ने चंद्रबाबू नायडू के साथ किया था. उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त ने आंध्र प्रदेश सीएम को तुरंत चुनाव का लाभ नहीं लेने दिया.

तेलंगाना में टीआरएस की सकारात्मक छवि

इसकी वजह थी अक्टूबर 2003 में चंद्रबाबू नायडू पर नक्सलियों की ओर से किए गए हमले. इसके चलते वह सहानुभूति ले सकते थे. चुनाव साल 2004 के अप्रैल में कराए गए. ऐसे में केसीआर के वरिष्ठ सलाहकार इस हफ्ते में चुनाव आयोग गए थे. तेलंगाना के मुख्यमंत्री विधानसभा भंग करने से पहले चुनाव की तारीखों के बारे में निश्चिंत होना चाहते हैं.

साल 2014 के चुनाव में टीआरएस ने 119 में से 63 सीटें जीती थीं. इसकी कुछ वजहें थीं. दिसंबर में कराए गए चुनाव के लिए कांग्रेस तैयार नहीं थी. कांग्रेस एक बटे हुए घर की तरह थी, जहां कई नेता मुख्यमंत्री बनने की अभिलाषा लिए बैठे थे, जबकि टीआरएस अपने प्रत्याशियों, फंड और गाड़ियों के साथ तैयार थी. पिछले कुछ दिनों में केसीआर चुनावी मोड में चले गए हैं. लगभग हर समुदाय के लिए कोई न कोई ऐलान हो रहा है. इसमें मंदिर के पुजारी, सरकारी कर्मचारी और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह भी शामिल हैं.

तेलंगाना में अच्छी बारिश होने से भी केसीआर खुश हैं. रितु बंधू स्कीम के तहत 58 लाख किसानों को 8,000 रुपए देने के फैसले ने राजनीतिक रूप से सकारात्मक छवि बनाई है.

क्या समय से पहले चुनाव कराने के लिए मोदी केसीआर की मदद करेंगे? 

टीआरएस की चिंता यह भी है कि जिस तरह संयुक्त आंध्र प्रदेश में साल 1999 के बाद से लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ होते रहे हैं. अगर ऐसा ही हुआ तो राहुल गांधी को कांग्रेस की तरफ से बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार पेश किया जाना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है. दूसरी तरफ बीजेपी तेलंगाना में बहुत मजबूत नहीं है, ऐसे में केसीआर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते.

गणित यह भी है कि कांग्रेस हिंदी बोलने वाले तीन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद लगाए बैठी है और इसी के साथ वह 2019 के सियासी समर में कूदेगी. तेलंगाना की सीमा छत्तीसगढ़ के साथ लगती है और टीआरएस नहीं चाहती कि किसी भी तरह से उसके मतदाता प्रभावित हों.

सवाल यह है कि समय से पहले चुनाव कराने के लिए मोदी केसीआर की मदद करेंगे? हर कोई मोदी और केसीआर से समीकरण को करीब से देख रहा है. पीएम यह जानते हैं कि कांग्रेस, बीजेपी को टीआरएस की 'बी टीम' बताएगी. क्या मोदी-शाह दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्य में यह तमगा चाहते हैं?

केसीआर के प्रस्ताव पर सहमति देना, मोदी के ही एक राष्ट्र, एक चुनाव के विचार के खिलाफ जाना होगा

दूसरी बात अगर चुनाव उत्तर भारत के तीन राज्यों के साथ कराए जाते है तो तेलंगाना के परिणाम वहां के मूड का संकेत देंगे. बीजेपी राज्य में बहुत अच्छा करने की स्थिति में नहीं है तो यह दक्षिण भारत में यह पार्टी को खारिज किए जाने का संदेश जाएगा.

तीसरी बात यह है कि केसीआर के प्रस्ताव पर सहमति देना, मोदी के ही एक राष्ट्र, एक चुनाव के विचार के खिलाफ जाना होगा. अगर एक चुनाव कराना, पैसा बचाने की जुगत है तो तेलंगाना चार महीने के भीतर दो बार मतदान करेगा. दिसंबर में विधानसभा चुनाव के लिए और अप्रैल में लोकसभा चुनाव के लिए.

मोदी को साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भी देखना होगा. बीजेपी को 272 अंकों से कम होने पर टीआरएस के समर्थन की आवश्यकता हो सकती है और केसीआर केंद्र में अपने सांसदों के लिए मंत्री पद के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. दूसरा पक्ष यह है कि मोदी को पता है कि केसीआर ने कांग्रेस को हटाया जिसने यह वादा किया था कि तेलंगाना बनने के बाद उनका विलय हो जाएगा.

कागज पर, पीएम-सीएम की बैठक केवल आधिकारिक कामों के बारे में है लेकिन हैदराबाद में चारों ओर यह चर्चा है कि टीआरएस ने चुनावों को की संभावना पर मुलाकात की और इसे राजनीतिक रंग दिया.

(न्यूज 18 के लिए टीएस सुधीर का लेख)

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