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जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह क्या बीजेपी को झटका देंगे ?

क्या मानवेंद्र सिंह अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ अब बीजेपी को अलविदा कह देंगे?

Updated On: Sep 03, 2018 05:38 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह क्या बीजेपी को झटका देंगे ?

बीजेपी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह क्या अलग राह पर चलेंगे? क्या मानवेंद्र सिंह अपनी पत्नी चित्रा सिंह के साथ अब बीजेपी को अलविदा कह देंगे? क्या मानवेंद्र बीजेपी को अलविदा कह राहुल गांधी का हाथ पकड़ेंगे ? मेवाड़ की राजनीति में इन दिनों ये चर्चा काफी गर्म है.

ऐसा होना भी स्वाभाविक है. क्योंकि इन दिनों मेवाड़ में मानवेंद्र सिंह की होने वाली स्वाभिमान रैली को लेकर तैयारी जोर-शोर से चल रही है. स्वाभिमान रैली को सफल बनाने को लेकर मानवेंद्र सिंह और उनके समर्थक काफी मेहनत कर रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि उसी दिन बाड़मेर के पचपदरा में होने वाली स्वाभिमान रैली में मानवेंद्र सिंह अपने अगले कदम का ऐलान कर देंगे.

दरअसल, मानवेंद्र सिंह लंबे वक्त से बीजेपी के भीतर हाशिए पर चल रहे हैं. पिता जसवंत सिंह बीमार होने की वजह से सक्रिय राजनीति से काफी लंबे वक्त से दूर हैं. दूसरी तरफ, विधायक मानवेंद्र सिंह की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ अदावत जारी है. आलम यह है कि अभी अपनी गौरव यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री राजे ने उनके जिले में जाने के बावजूद उनके विधानसभा क्षेत्र का दौरा नहीं किया. यह बात मानवेंद्र सिंह को अखर गई है.

vasundhara raje

मानवेंद्र सिंह के परिवार का वसुंधरा राजे के साथ पहले से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त भी उनके पिता जसवंत सिंह को बीजेपी का टिकट नहीं दिया गया था. विरोध में जसवंत सिंह ने बाड़मेर से निर्दलीय ही मैदान में उतरने का फैसला कर लिया था. लेकिन, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने यहां से जाट समुदाय के कर्नल सोनाराम को जिताने में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया. जसवंत सिंह की हार हुई.

हालांकि, उसके बाद भी शिव से विधायक मानवेंद्र सिंह को पार्टी के भीतर या राजस्थान में सरकार के भीतर कोई पद नहीं दिया गया. अपनी उपेक्षा से परेशान मानवेंद्र सिंह की तरफ से अब नए कदम की तैयारी शुरू कर दी गई है.

मानवेंद्र को लगता है कि राजस्थान में राजपूत समुदाय के भीतर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ पहले से ही गुस्सा है. अगर इस समुदाय की मुख्यमंत्री के खिलाफ नाराजगी को भुनाना है तो यह सही वक्त है. मानवेंद्र सिंह राजपूत समुदाय के उस गुस्से के प्रतीक के तौर पर अपने-आप को स्थापित करना चाहते है. उन्हें लगता है कि वसुंधरा के खिलाफ ताल ठोंक कर इस बार वो समाज के नायक बन सकते हैं.

हालांकि राजपूत समुदाय के भीतर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ नाराजगी कई मुद्दों को लेकर है. सबसे ताजा नाराजगी तो अभी बीजेपी अध्यक्ष पद को लेकर है. बीजेपी आलाकमान केंद्रीय मंत्री और जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष के पद पर बैठाना चाहता था. लेकिन, मुख्यमंत्री के विरोध करने के चलते ही शेखावत का पत्ता कट गया. राजपूत समुदाय इस बात को भुला नहीं पा रहा है. मुख्यमंत्री के खिलाफ इस पूरे इलाके में काफी गुस्सा है.

इसके अलावा जोधपुर के समरऊ की उस घटना को लेकर भी राजपूत समुदाय के भीतर गुस्सा है, जिसमें राजपूत समुदाय के लोगों के घर कथित तौर पर जाट समुदाय के लोगों ने जला दिए थे. महिलाओं के साथ भी बदसलूकी हुई थी. राजपूत समुदाय में नाराजगी है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी.

आनंदपाल सिंह के राज्य सरकार के मंत्रियों से संबंध बताए जा रहे हैं

इसके अलावा आनंदपाल एनकाउंटर मामले को लेकर भी समाज के भीतर नाराजगी है. उस वक्त राजपूत समुदाय के लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. नाराजगी उस पर भी थी. लेकिन, अब चतुर सिंह हत्याकांड को लेकर भी नाराजगी है. क्षत्रिय युवक संघ की तरफ से आनंदपाल एनकाउंटर और चतुर सिंह हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग की जा रही है. सरकार ने इस मांग को नहीं माना है, जिसके बाद अब क्षत्रिय समाज मुख्यमंत्री के खिलाफ दिख रहा है.

ऐसे वक्त में अपने-आप को राजपूत की बेटी कहने वाली मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए अपने समाज को साधना काफी मुश्किल हो रहा है. ऐसे में मानवेंद्र सिंह अगर अलग रास्ता अख्तियार कर लेते हैं तो फिर वसुंधरा की मुश्किलें बड़ी हो सकती हैं.

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