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बंगला बचाने के लिए कितना कारगर होगा मायावती का 'कांशीराम कार्ड'!

कांशीराम के नाम का कार्ड खेल कर मायावती न सिर्फ 13 ए बंगला बचाने की जुगत में हैं बल्कि दलितों को लेकर मचे राजनीतिक शह-मात के दौर में इस तबके की भावनाअों को अपने बंगले से जोड़कर उन्होंने राजनीतिक लाभ का पासा भी चला है

Updated On: May 21, 2018 09:40 PM IST

Ranjib

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बंगला बचाने के लिए कितना कारगर होगा मायावती का 'कांशीराम कार्ड'!

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को अावंटित सरकारी बंगले खाली करवाने के सुप्रीम कोर्ट के अादेश पर अमल की तैयारियों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री अौर बीएसपी प्रमुख मायावती के एक कदम से पूरे मामले में ट्विस्ट अा गया है. उन्हें बतौर पूर्व मुख्यमंत्री अावंटित लखनऊ के मॉल एवेन्यू के 13 ए बंगले के बाहर रातों-रात 'श्री कांशीराम जी यादगार विश्राम स्थल' लिखा बोर्ड लग जाने से मामला पेचीदा हो गया है. इसलिए भी क्योंकि इसी बंगले के ठीक सामने स्थित मॉल एवेन्यू के 9 नंबर बंगले में बीते दो दिनों से रंगाई-पुताई चल रही है अौर इसे मायावती का निजी मकान बताया जा रहा है. जिससे माना जा रहा है कि मायावती 13 ए को छोड़ कर 9 नंबर में रहने चली जाएंगी.

ऐसे में अब बीएसपी के संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम की फोटो के साथ 13ए बंगले को उनका विश्राम स्थल घोषित करता बोर्ड अचानक लग जाने से यूपी के राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं. हालांकि ऐसा बोर्ड लगाने की कोई अाधिकारिक व्याख्या मायावती या उनकी पार्टी की अोर से अभी तक नहीं हुई है. लेकिन सियासी हलकों में कयास लग रहा है कि कांशीराम के नाम का कार्ड खेल कर मायावती न सिर्फ 13 ए बंगला बचाने की जुगत में हैं बल्कि दलितों को लेकर मचे राजनीतिक शह-मात के दौर में इस तबके की भावनाअों को अपने बंगले से जोड़कर उन्होंने राजनीतिक लाभ का पासा भी चला है.

कुछ यूं कि कांशीराम का नाम सामने कर बंगले को उनके विश्राम स्थल यानी स्मारक के नाम पर बचा लेने का अौर फिर भी न बचा तो 9 मॉल एवेन्यू में शिफ्ट होकर यह माहौल बनाना कि केंद्र अौर यूपी की बीजेपी सरकार दलितों के हितों की बात तो करती है लेकिन कांशीराम की यादों को संजोने वाले बंगले को खाली होने देने से नहीं रोका.

दूरदर्शी निकलीं मायावती?

मायावती ने अगर अपने सरकारी बंगले के सामने कांशीराम से संबंधित बोर्ड लगवा लिया है तो वहीं एक अौर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्य संपत्ति विभाग को पत्र लिखकर उन्हें बतौर पूर्व मुख्यमंत्री अावंटित 4 विक्रमादित्य मार्ग का सरकारी अावास दो साल तक उनके पास रहने देने का अनुरोध किया है. इसके पीछे की वजह उन्होंने यह लिखी है कि चूंकि वे पूर्व मुख्यमंत्री हैं लिहाजा जेड प्लस अौर एनएसजी कमांडो वाली सुरक्षा मिली है तो वैसे में उनके पास लखनऊ में कोई इतना बड़ा अावास नहीं हैं जहां इतना बड़ा तंत्र समा सके.

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9 मॉल एवेन्यू

साथ उन्होंने यह भी कहा है कि समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते उनसे रोजाना सैकड़ों लोग मिलने अाते हैं उसके मद्देनजर भी उन्हें बड़ा मकान चाहिए जो तत्काल उपलब्ध नहीं है. राज्य संपत्ति विभाग ने अखिलेश यादव के इस अनुरोध पर अभी अपनी कोई राय नहीं दी है. वैसे इस पूरे मामले में अभी तक तो यही लग रहा है कि अखिलेश अौर उनके पिता व एक अौर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ही लखनऊ में खुद का बड़ा मकान न होने को वजह बताते हुए तुरंत कहीं अौर शिफ्ट करने को लेकर असमंजस में हैं.

वरना एक अौर पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कालिदास मार्ग का अपना सरकारी बंगला खाली करना शुरू भी कर दिया है. वे गोमती नगर के अपने निजी अावास में जाएंगे. दो अौर पूर्व मुख्यमंत्रियों, कल्याण सिंह अौर नारायण दत्त तिवारी को भी बंगला खाली करना है लेकिन अभी इसकी पहल नहीं हुई है.

'सरकारी बंगला छोड़कर कहां जाएं' के सवाल से जूझते इन पूर्व मख्यमंत्रियों में लगता है मायावती ही सबसे दूरदर्शी रहीं. वरना सरकारी बंगले के ठीक सामने अपना निजी बंगला (9 मॉल एवेन्यू) अपनी सरकार रहते न बनवातीं. बताया जा रहा है कि मॉल एवन्यू के निजी बंगलों को सरकार ने लीज पर लेकर उनका अपने लिए इस्तेमाल किया था, वैसे में मायावती की सरकार में 9 मॉल एवेन्यू के बंगले का लीज रिन्यू नहीं किया गया अौर उसे मायावती ने 15 करोड़ रुपए में खरीद लिया था.

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9 मॉल एवेन्यू

अलग-अलग था कांशीराम विश्राम-स्थल और मायावती का बंगला

दरअसल सरकार में रहते हुए मायावती ने लखनऊ में जितने निर्माण करवाए थे उनकी गूंज सुप्रीम कोर्ट अौर चुनाव अायोग ( चुनाव के समय हाथियों की मूर्तियों को ढकने का अादेश ताकि बीएसपी के चुनाव चिह्न का प्रचार न हो) तक पहुंची थी. वे सभी मामले बाबा साहब अंबेडकर, कांशीराम समेत दलित वर्ग के महापुरुषों के नाम पर मकराना के लाल पत्थरों से बने स्मारकों से संबंधित थे.

लेकिन अब, जबकि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने की नौबत अाई है तो यह भी पता चल रहा है कि बीएसपी प्रमुख ने निजी अावास की मुकम्मल व्यवस्था पहले से कर रखी थी. दरअसल जिस 13 ए बंगले में वे बतौर पूर्व मुख्यमंत्री रहती हैं उसके बगल में ही स्थित सरकारी संपत्ति को उनकी सरकार रहते कांशीराम विश्राम स्थल में तब्दील किया गया था. बाद में कथित रूप से विश्राम स्थल को मायावती के बंगले से ही जोड़ दिया गया. मायावती के समर्थकों कहना है कि इसके बड़े हिस्से में कांशीराम विश्राम स्थल है जिसमें उनसे जुड़ी यादें रखी हैं जबकि मायावती इसके एक छोटे से हिस्से में रहती हैं.

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9 मॉल एवेन्यू

अब कांशीराम के नाम पर 13 ए बंगला मायावती के पास ही रहेगा या नहीं यह फिलहाल साफ नहीं लेकिन 9 नंबर बंगले में चल ही तैयारियों से साफ है कि अगर 13 ए से जाना पड़ा तो भी मायावती का पता मॉल एवेन्यू ही रहेगा जैसा कि फिलहाल बाकी पूर्व मुख्यमंत्रियों के मामले में नहीं लग रहा क्योंकि उन सभी को अपनी रिहाइश का मौजूदा इलाका ही छोड़ना पड़ेगा, ऐसा लग रहा है.

खास बात यह कि मॉल एवेन्यू के जिस 13 ए बंगले में मायावती अभी रहती हैं अौर इसे छोड़कर यदि 9 नंबर में जाना पड़ा तो ठीक इसके पीछे 12 मॉल एवेन्यू बीएसपी का प्रदेश कार्यालय है. यानी इस मामले में भी मायावती की सहूलियत बरकरार रहेगी. गौरतलब है कि मायावती ने अपनी सरकार रहते मॉल एवेन्यू से लगे लखनऊ कैंट इलाके में भी एक निजी मकान खरीदा था अौर उसे भी लाल पत्थरों से संवारा गया था लेकिन बाद में उन्होंने उसे बेच दिया.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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