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प्रियंका के राजनीति की अटकलों पर सोनिया गांधी ने क्यों लगाया विराम ?

कांग्रेस में प्रियंका गांधी को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं. कयास ये लग रहा था कि प्रियंका गांधी 2019 में सक्रिय राजनीति मे कदम रख देंगी.

Syed Mojiz Imam Updated On: Mar 10, 2018 09:23 AM IST

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प्रियंका के राजनीति की अटकलों पर सोनिया गांधी ने क्यों लगाया विराम ?

कांग्रेस में प्रियंका गांधी को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं. कयास ये लग रहा था कि प्रियंका गांधी 2019 में सक्रिय राजनीति मे कदम रख देंगी. ये भी लग रहा था कि रायबरेली से 2019 में लोकसभा का चुनाव लड़ सकती हैं. लेकिन पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है. सोनिया गांधी ने कहा कि प्रियंका गांधी अभी अपने बच्चों को संभालने में लगी है. ऐसे में राजनीति कैसे करेंगी?

हालांकि सोनिया गांधी ने कहा कि ये प्रियंका तय करेंगी कि वो राजनीति में कब आना चाहती हैं. ये इशारा साफ है कि सोनिया गांधी फिलहाल प्रियंका को राजनीति में नही आने देना चाहती हैं. सोनिया गांधी के इस बयान का मतलब साफ है कि राहुल गांधी 2019 में कांग्रेस की ड्राइविंग सीट पर होंगे.

जाहिर है कि पार्टी के भीतर प्रियंका गांधी को लाने की आवाज भी सोनिया गांधी ने दबा दी है. कांग्रेस में एक खेमा ऐसा है जो चाहता है कि प्रियंका गांधी कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाएं. इस खेमे को यकीन है कि राहुल गांधी से प्रियंका गांधी ज्यादा करिश्माई नेता हैं. प्रियंका के अंदाज भी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह मिलता है.

सोनिया के इस बयान की वजह

India's main opposition Congress party president Sonia Gandhi addresses her supporters before what the party calls "Save Democracy" march to parliament in New Delhi

कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है. जिसकी वजह से लगातार राहुल गांधी की लीडरशिप पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. त्रिपुरा में कांग्रेस जीरो पर है. बीजेपी ने सरकार बना ली है. कांग्रेस लगातार चुनावी राजनीति में बीजेपी से पिछड़ती जा रही है. पार्टी के भीतर प्रियंका गांधी को लेकर शोर उठता रहता है. जो नेता राहुल गांधी के साथ सहज नहीं है या फिर राहुल गांधी के नए सिस्टम से खुश नहीं हैं. वो प्रियंका को राजनीति मे लाने के लिए पुरजोर तरीके से लगे रहते हैं. सोनिया गांधी ने इन नेताओं को इशारा दे दिया है. कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ही रहेंगे. इसलिए अपने चुनाव लड़ने के फैसले को भी राहुल गांधी पर छोड़ दिया है. राहुल गांधी ने दिसंबर में ही पार्टी के अध्यक्ष पद संभाला है.

सोनिया गांधी बखूबी समझती हैं कि जैसे ही प्रियंका गांधी ने राजनीति मे कदम रखा वैसे ही दोनों के बीच तुलना शुरू हो जाएगी. पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ जाएगी. जो कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित होगा. प्रियंका गांधी के राजनीति मे न आने की असली वजह यही है, क्योंकि प्रियंका गांधी से लोगों का कनेक्ट अच्छा है. इंदिरा गांधी की तर्ज पर बीच सड़क पर रुक कर किसी भी कार्यकर्ता को नाम से पुकारना पंसद है.

इसलिए प्रियंका गांधी से कार्यकर्ताओं का जुड़ाव अच्छा है. प्रियंका कार्यकर्ता के परिवार का हालचाल पूछना नहीं भूलती हैं. इस तरह वोटर से भी संवाद बनाने का उनका तरीका निराला है. 2009 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के बूढ़ी वाले बयान का जवाब प्रियंका गांधी ने बखूबी दिया था. जिसने चुनाव का रुख बदला था.

प्रियंका पर्दे की पीछे

सार्वजनिक तौर पर प्रियंका गांधी राजनीति मे नहीं है. लेकिन कई मामलों में सक्रिय है. अमेठी रायबरेली का चुनावी कामकाज प्रियंका गांधी के हवाले है. इन दोनों क्षेत्रों के लोगों से मिलने का सिलसिला भी प्रियंका ने बना रखा है. 2014 में राहुल गांधी को स्मृति ईरानी ने कांटे की टक्कर दी थी. लेकिन प्रियंका गांधी के चुनावी मैनेजमेंट से राहुल गांधी चुनाव जीत पाने में सफल रहे हैं.

इसके अलावा राहुल गांधी के दफ्तर के कामकाज पर भी प्रियंका गांधी की निगाह है. यूपी के मामलों में प्रियंका गांधी की सलाह राहुल गांधी सुनते हैं. सूत्रों के मुताबिक 2012 के विधानसभा के चुनाव में राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी से यूपी की कमान संभालने के लिए कहा था लेकिन प्रियंका गांधी ने इनकार कर दिया.

रायबरेली अमेठी तक सीमित प्रियंका की सियासत

प्रियंका गांधी सोनिया गांधी के चुनाव की कमान 1998 से संभाल रही हैं. पहले अमेठी फिर 2004 से रायबेरली में कांग्रेस का कामकाज प्रियंका गांधी ही देख रही हैं. रायबरेली से जब सोनिया गांधी ने चुनाव लड़ा था तब अखिलेश सिंह सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे.

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर प्रियंका गांधी अखिलेश से बात करने के लिए सीधे उनके घर पहुंच गई थीं. हालांकि अखिलेश सिंह कांग्रेस में हैं और उनकी बेटी अदिति सिंह कांग्रेस से विधायक हैं. 2014 में अमेठी में राहुल गांधी की राह आसान करने के लिए संजय सिंह को राज्यसभा प्रियंका गांधी की सलाह पर भेजा गया था. प्रियंका गांधी ने राहुल और सोनिया के चुनावी क्षेत्र की बखूबी देखभाल की है.

प्रियंका के राजनीति में आने का यकीन

कांग्रेस में प्रियंका गांधी के करीबी लोगों का दावा है कि 2019 में राजनीति में कदम रखेंगी. इन लोगों का दावा है कि प्रियंका गांधी को पार्टी का महासचिव बनाया जा सकता है. राहुल गांधी की अध्यक्षता में पार्टी के संगठन का कामकाज संभाल सकती हैं. इन लोगों का ये भी दावा है कि वो लोकसभा का चुनाव रायबरेली से लड़ सकती हैं. अगर सोनिया गांधी लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ती हैं. ये भी दावा किया जा रहा है कि प्रियंका राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करेंगी . कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में ध्यान लगाएगी.

प्रियंका ने किया था रायबरेली से चुनाव लड़ने से इनकार

Priyanka Gandhi

राहुल गांधी की ताजपोशी के दिन प्रियंका गांधी से सवाल किया गया, 2019 में रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी ? प्रियंका गांधी ने साफ तौर पर जवाब दिया कि रायबरेली से सोनिया गांधी चुनाव लड़ेंगी. हालांकि इलाहाबाद में प्रियंका गांधी को पार्टी की कमान देने के लिए पोस्टर सामने आए हैं. गाहे-बगाहे इसके चर्चे भी होते रहे हैं. गांधी परिवार के भीतर इस बात का फैसला नहीं हो पाया है कि प्रियंका गांधी राजनीति मे रहेंगी या फिर पर्दे के पीछे से काम करेंगी.

गुजरात चुनाव में राहुल गांधी के हिंदू होने पर जब बीजेपी ने सवाल खड़ा किया तो सोशल मीडिया में प्रियंका गांधी की ही सलाह से पुरजोर जवाब दिया गया था. सारे फोटोग्राफ प्रिंयका गांधी ने कांग्रेस को दिए थे.

बहन-भाई के बीच संबध मधुर

2007 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी से बातचीत का अवसर मिला था. प्रियंका गांधी से जब पूछा कि वो क्या चाहती हैं, तो सबसे पहले उन्होंने कहा कि वो चाहती हैं कि राहुल गांधी शादी कर ले और भारत के प्रधानमंत्री भी बने. लेकिन एक बात जोर देकर कही थी कि वो प्रिंयका वाड्रा कहलाना पंसद करती है.

दोनों भाई-बहन के बीच रिश्ते काफी अच्छे हैं. राहुल गांधी खाली वक्त प्रियंका गांधी के बच्चों या फिर उनके घर में बिताते हैं. पेचीदा मुद्दों पर प्रिंयंका गांधी से सलाह मशविरा भी करते हैं, लेकिन राजनीति प्रियंका गांधी के आने से राहुल गांधी के ग्राफ पर असर पड़ सकता है.

इसलिए ऐसा लगता है कि सोनिया गांधी चाहती हैं कि 2019 मे राहुल गांधी को काग्रेस और परिवार के भीतर से कोई चुनौती का सामना ना करना पड़े. जिस तरह राहुल गांधी अध्यक्ष बने उसी तरह प्रधानमंत्री भी बन जाएं. हालांकि 2019 की राह काफी मुश्किल है. कांग्रेस के सामने नरेंद्र मोदी हैं. साथ ही शरद पवार और ममता बनर्जी जैसे नेता भी राहुल गांधी के सामने मुश्किल खड़ी कर सकते हैं.

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