S M L

राजस्थान: राज्य बीजेपी के नए अध्यक्ष की घोषणा के साथ तय होगा वसुंधरा का भविष्य

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को गुरुवार को दिल्ली तलब किया गया था. बीजेपी आलाकमान के बुलावे पर वसुंधरा राजे पार्टी मुख्यालय पहुंची थी, जहां उनकी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महामंत्री रामलाल के साथ बैठक हुई.

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 26, 2018 07:03 PM IST

0
राजस्थान: राज्य बीजेपी के नए अध्यक्ष की घोषणा के साथ तय होगा वसुंधरा का भविष्य

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को गुरुवार को दिल्ली तलब किया गया था. बीजेपी आलाकमान के बुलावे पर वसुंधरा राजे पार्टी मुख्यालय पहुंची थी, जहां उनकी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महामंत्री रामलाल के साथ बैठक हुई.

बैठक के बाद भी अभी राजस्थान में नए अध्यक्ष को लेकर नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है. हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लग जाएगी.

बीजेपी आलाकमान ने अपनी तरफ से केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री और जोधपुर से सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम को लगभग फाइनल कर लिया था. लेकिन, वसुंधरा राजे को शेखावत के नाम पर सबसे ज्यादा ऐतराज है.

राजे और उनके समर्थकों का तर्क है कि शेखावत के सहारे राजस्थान में जातीय समीकरण को साधना मुश्किल होगा. क्योंकि खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजपूत समुदाय से हैं और उसी समुदाय के गजेंद्र शेखावत को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

लेकिन, बीजेपी आलाकमान वसुंधरा राजे और उनके समर्थकों के तर्क से संतुष्ट नहीं है. पार्टी आलाकमान के फैसले को मानने में आनाकानी करने के राजे के पुराने तरीके से भी नाराजगी है. वसुंधरा के करीबी पुराने बीजेपी नेता देवी सिंह भाटी ने खुलकर गजेंद्र सिंह शेखावत का विरोध किया है. उन्होंने गजेंद्र सिंह शेखावत को केवल जोधपुर तक सीमित ऐसा नेता बताया जिसकी छवि जाट विरोधी है. भाटी जैसे कई नेता मानते हैं कि शेखावत के अध्यक्ष बनने से पार्टी से  जाट वोट खिसक जाएंगे.

दूसरी तरफ, वसुंधरा राजे सरकार के करीब दर्जन भर मंत्री और कई विधायक इन दिनों दिल्ली में डेरा डाले हैं. ये सभी नेता पार्टी के दिग्गज नेताओं से मुलाकात कर शेखावत के नाम का विरोध कर रहे हैं.

वसुंधरा राजे के खासमखास ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की अगुवाई में कई मंत्री और विधायकों ने पिछले चार दिन में संगठन महामंत्री रामलाल, बीजेप महासचिव भूपेन्द्र यादव, गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं से मुलाकात की है.

gajendra singh shekhawat

गजेंद्र सिंह शेखावत की फेसबुक वॉल से साभार

दरअसल, वसुंधरा खेमे को इस बात का डर सता रहा है कि गजेंद्र सिंह शेखावत के सहारे महारानी के पर कतरने की तैयारी हो रही है. गजेंद्र सिंह शेखावत अभी युवा हैं और उन्हें आगे कर बीजेपी राज्य में एक नए नेतृत्व को उभार सकती है.

लेकिन, वसुंधरा समर्थकों की दबाव बनाने की कोशिश से आलाकमान खासा नाराज है. फिर भी इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठाया जा रहा है.

वसुंधरा से सतर्क क्यों है आलाकमान ?

दरअसल, वसुंधरा राजे का पहले का इतिहास ऐसा ही रहा है  जिसको लेकर इस बार आलाकमान किसी तरह की गलती नहीं करना चाहता. पहली बार किसी प्रदेश के नेता ने मोदी-शाह के नेतृत्व के सामने इस तरह ना-नुकुर करने की हिम्मत भी जुटाई है. लेकिन, अपनी रणनीति के लिए पहचाने जाने वाले शाह इस बार सतर्क होकर कोई फैसला करना चाह रहे हैं. कारण वसुंधरा का पहले का इतिहास रहा है.

2008 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव की करारी हार ने वसुंधरा की नेतृत्व क्षमता पर कई सवाल खड़े कर दिए थे. नवंबर 2009 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष ओम माथुर, प्रदेश के संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र और नेता प्रतिपक्ष वसुंधरा राजे को खराब प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देने को कहा था. ओम माथुर और प्रकाश चंद्र ने तो इस्तीफा दे दिया. लेकिन, वसुंधरा आना-कानी करती रहीं.

यहां तक कि वसुंधरा ने अपने समर्थक विधायकों की दिल्ली में परेड भी कराकर पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. उस वक्त बीजेपी के 79 विधायकों में से 56 विधायकों के समर्थन का दावा था. आखिरकार वसुंधरा को फरवरी 2010 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देना ही पड़ा था.

हालांकि दिसंबर 2009 में ही बीजेपी की कमान राजनाथ सिंह के बाद नितिन गडकरी को सौंप दी गई थी. लेकिन, वसुंधरा की नाराजगी के चलते नेता प्रतिपक्ष का पद लगातार खाली ही रहा.

बाद में गुलाब चंद कटारिया को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था. लेकिन, मई 2012 में जब कटारिया ने मेवाड़ इलाके में ‘लोक जागरण यात्रा’ निकालने की कोशिश की तो उसके विरोध में वसुंधरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा सौंप दिया था. यहां तक कि बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के दिल्ली बुलाने पर भी वसुंधरा नहीं आईं. बाद में कटारिया को अपनी यात्रा स्थगित भी करनी पड़ी.

आखिरकार जब बारी 2013 विधानसभा चुनाव की आई तो वसुंधरा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान देने के साथ-साथ मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर भी पेश किया गया और फिर चुनाव जीतने के बाद वसुंधरा राजे प्रदेश की मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रही हैं.

अब जबकि उनके चहेते  अशोक परनामी को अध्यक्ष के पद से हटाकर उनके किसी विरोधी को बैठाने की तैयारी हो रही है, तो फिर से वसुंधरा को यह नागवार गुजर रहा है. लेकिन, इस बार पार्टी का नेतृत्व बदल चुका है. अब बीजेपी का नेतृत्व मोदी-शाह के हाथों में है, लिहाजा वसुंधरा को भी एक कदम पीछे खींचना होगा.

कौन-कौन हैं अध्यक्ष पद की दौड़ में ?

vasundhara raje

अध्यक्ष पद के तौर पर जिन नामों को वसुंधरा ने सामने बढ़ाया था, उनमें से कईयों के नाम ऐसे थे जिनको आलाकमान ने खारिज कर दिया था. कई नामों पर वसुंधरा को भी आपत्ति थी. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, अशोक परनामी की छुट्टी होने के बाद वसुंधरा ने पूर्व अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के नाम को आगे बढ़ाया था. लेकिन, पार्टी आलाकमान को यह नाम मंजूर नहीं था.

इसके अलावा जयपुर के विधायक सुरेंद्र परिक और श्रीचंद कृपलानी के नाम पर भी वसुंधरा खेमे की तरफ से बढ़ाया गया. परिक संघ के करीबी हैं, जबकि कृपलानी सिंधी समाज से आते हैं. इन दोनों को वसुंधरा का बेहद करीबी माना जाता है. लिहाजा पार्टी आलाकमान को यह नाम मंजूर नहीं थे.

उधर बीजेपी आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री और बीकानेर के सांसद अर्जुन राम मेघवाल के नाम को लेकर वसुंधरा को राजी करने की कोशिश की थी. बीजेपी की कोशिश दलित समाज से आने वाले मेघवाल को सामने लाकर दलितों की नाराजगी दूर करनी थी. लेकिन, मेघवाल और वसुंधरा में छत्तीस का आंकड़ा है. ऐसे में वसुंधरा राजे ने उनके नाम पर अपनी सहमति नहीं दी.

हालांकि कोटा से सांसद ओम बिड़ला का नाम भी चर्चा में आया था. लेकिन, उनके भी नाम पर वसुंधरा को आपत्ति थी. इतनी सारी चर्चा के बाद बीजेपी आलाकमान ने गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम पर अपनी सहमति दे दी. लेकिन, अभी तक उनके नाम पर वसुंधरा की सहमति नहीं हो पा रही है. अब देखना है कि आखिरकार राजे मान पाती हैं या नहीं. अमित शाह और रामलाल से  मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो जाएगा.

महारानी की बढ़ेंगी मुश्किलें ?

भैरो सिंह शेखावत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद राजस्थान की राजनीति में बीजेपी को एक बड़े चेहरे की तलाश थी. वाजपेयी सरकार में मंत्री रही वसुंधरा राजे को 2003 में राजस्थान की बागडोर सौंपी गई थी. वसुंधरा को ललित किशोर चतुर्वेदी, घनश्याम तिवाड़ी और गुलाब चंद कटारिया जैसे दावेदार नेताओं के ऊपर तरजीह दी गई थी. जातियों में बंटी राजस्थान की राजनीति को बहुत चतुराई से साधकर उन्होंने कांग्रेस को मात दी.

वसुंधरा ने अपने आप को राजपूत की बेटी, जाटों की बहू और गुर्जरों की समधन के तौर पर पेश कर राजस्थान की राजनीति में अपनी पैठ को मजबूत किया था. लेकिन, धीरे-धीरे संगठन और सरकार पर वसुंधरा का एकाधिकार हो गया. इसके चलते संघ के लोगों से भी उनकी खटास सामने आती रही.

यही कारण रहा कि संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र शर्मा के इस्तीफे के बाद लगभग 8 सालों से इस पद पर कोई दूसरा व्यक्ति नहीं आया था. अब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिमी यूपी के संगठन मंत्री रहे चंद्रशेखर मिश्रा को राजस्थान का जिम्मा सौंपा है. चंद्रशेखर मिश्रा काशी क्षेत्र के संगठन मंत्री भी रह चुके हैं. यहां तक कि वाराणसी में बने ‘मिनी पीएमओ’ का प्रबंधन भी वो संभाल चुके हैं.

BJP National President Amit Shah in Mysore

चंद्रशेखर मिश्रा की नियुक्ति के बाद अब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह राजस्थान के अध्यक्ष पद पर ऐसे व्यक्ति को लाने में लगे हैं जो वसुंधरा खेमे का नहीं हो. ऐसा कर चुनावी साल में पार्टी संगठन पर वसुंधरा के एकाधिकार को खत्म करन की कोशिश की जा रही है. पार्टी अध्यक्ष और संगठन मंत्री के तौर अपने करीबी लोगों को बैठाकर पार्टी आलाकमान टिकट बंटवारे में वसुंधरा की मनमानी रोकने की तैयारी कर रहा है. हो सकता है कि गजेंद्र सिंह शेखावत जैसे नए अध्यक्ष को सामने लाकर एक नए विकल्प की तलाश भी हो रही हो.

राजस्थान में बीजेपी के भीतर हो रहे इन बदलावों के दूरगामी परिणाम होने वाले हैं. क्योंकि पार्टी की दो लोकसभा और एक विधानसभा उपचुनाव में हुई हार के बाद भी बीजेपी आलाकमान को जो फीडबैक मिल रहा है  उसमें नाराजगी वसुंधरा राजे के खिलाफ दिख रही है, न कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार से.

ऐसे में पूरी रणनीति उसी इर्द-गिर्द बनाई जा रही है, जिससे वसुंधरा के पर कतर कर उनके कद को कम किया जा सके. वसुंधरा की परेशानी भी यही है. यही वजह है कि चुनावी साल में अध्यक्ष पद के चयन में मैराथन बैठक के बाद भी विलंब हो रहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Social Media Star में इस बार Rajkumar Rao और Bhuvan Bam

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi