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सोनिया के भोज से गायब पर मोदी के भोज में शिरकत, आखिर नीतीश के मन में क्या है?

बीजेपी विरोधी मोर्चा में लालू की बढ़ती अहमियत को लेकर भी शायद नीतीश खुश न हों जिसके चलते सोनिया के भोज से किनारा कर लिए हों.

Updated On: May 27, 2017 11:32 AM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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सोनिया के भोज से गायब पर मोदी के भोज में शिरकत, आखिर नीतीश के मन में क्या है?

बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार कह रहे हैं कि सोनिया गांधी की तरफ से दिए गए विपक्षी पार्टियों के लिए भोज में उनके नहीं शामिल होने का गलत मतलब निकाला जा रहा है. लेकिन, उनकी लाख सफाई के बावजूद सियासी अटकलबाजी पर विराम नहीं लग पा रहा है.

ऐसा होना लाजिमी भी है. राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की रणनीति तय करने को लेकर सोनिया गांधी ने भोज दिया. इसमें लालू, ममता, सीताराम येचुरी, अखिलेश और मायावती समेत विपक्ष के बहुत सारे लोग शिरकत कर रहे थे.

लेकिन, इसमें नदारद थे बिहार के मुख्यमंत्री और विपक्ष की तरफ से सबसे भरोसेमंद चेहरे नीतीश कुमार.

नीतीश की गैरमौजूदगी में उनकी पार्टी की नुमाइंदगी करने के लिए शरद यादव और केसी त्यागी जरूर मौजूद रहे. लेकिन, उनकी मौजूदगी से कहीं ज्यादा नीतीश की गैर मौजूदगी को लेकर चर्चा होती रही.

बैठक खत्म होने के बाद भी विपक्ष की तरफ से किसी एक नाम को लेकर सहमति नहीं हो पाई है कि राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार कौन होगा.

शायद विपक्ष को अबतक की परंपरा का इंतजार होगा जिसमें पहले सत्ताधारी दल की तरफ से किसी उम्मीदवार के नाम का ऐलान हो या सरकार आम सहमति बनाने की कोशिश करे.

लेकिन, इस बैठक के अगले ही दिन नीतीश कुमार दिल्ली पहुंच रहे हैं. इस बार नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भोज में शिरकत करेंगे. यह भोज मॉरिशस के प्रधानमंत्री के सम्मान में दिया गया है जो भारत के दौरे पर हैं.

ये भी पढ़ें: सोनिया के लंच में न जाकर नीतिश ने साबित कर दिया कि विपक्ष के सबसे बड़े नेता वही हैं

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राष्टपति चुनाव की रणनीति को लेकर विपक्षी दलों की बैठक

मोदी से मुलाकात

नीतीश कुमार इस भोज के बाद प्रधानमंत्री से अलग से भी मुलाकात करेंगे. गंगा की सफाई के मुद्दे पर उनकी प्रधानमंत्री से मुलाकात होने वाली है. इस मुलाकात को भी सियासी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है.

फिलहाल नीतीश कुमार बीजेपी विरोध के नाम पर ही अपनी राजनीति बढ़ा रहे हैं. लेकिन, सियासत में संकेतों के बड़े मायने होते हैं. नीतीश कुमार का विपक्षी दलों की बैठक में न जाना इस बात का संकेत है कि नीतीश कुमार बिहार में अपने सहयोगी लालू यादव के साथ मंच साझा करने से कतरा रहे हैं.

नीतीश कुमार नहीं चाहते कि लालू की बनी दागदार छवि के साथ वो खड़े दिखें. लिहाजा बिहार में लालू के समर्थन के साथ सत्ता चलाने के बावजूद उनके साथ खड़े नहीं दिखने की कोशिश कर रहे हैं.

बीजेपी विरोधी मोर्चा में लालू की बढ़ती अहमियत को लेकर भी शायद नीतीश खुश न हों जिसके चलते सोनिया के भोज से किनारा कर लिए हों.

लेकिन..बात इतनी भर नहीं है. जहां कांग्रेस और बाकी विरोधी दल मोदी सरकार के तीन साल पूरा होने के मौके पर मोदी सरकार के कामकाज को लेकर बखिया उधेड़ रहे हैं वहां, नीतीश कुमार ने मोदी सरकार के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला है. लिहाजा सियासी अटकलें तो लगेंगी ही.

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