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सीबीआई का सामना करने से क्यों कतरा रहे हैं लालू और तेजस्वी?

सीबीआई ने पहले 11 और 12 सितंबर को लालू यादव और तेजस्वी को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन वो नहीं आए

Updated On: Sep 24, 2017 07:00 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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सीबीआई का सामना करने से क्यों कतरा रहे हैं लालू और तेजस्वी?

रेलवे के होटल टेंडर घोटाला मामले में सीबीआई आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके पुत्र तेजस्वी यादव से पूछ-ताछ करने वाली है. सीबीआई की यह पूछताछ 25 और 26 सितंबर को होने वाली है. दोनों से पूछताछ दिल्ली के सीबीआई मुख्यालय में होगी.

सीबीआई ने इससे पहले 11 और 12 सितंबर को पूछताछ के लिए लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी को बुलाया था. हालांकि, दोनों तय तारीख पर हाजिर नहीं हो पाए थे. दोनों ने 11 और 12 सिंतबर को दिल्ली आने में असमर्थता जाहिर की थी. इसके बाद सीबीआई ने एक और नया डेट दिया है.

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक अगर 25 और 26 सितंबर को लालू और तेजस्वी यादव हाजिर नहीं होते हैं तो उनकी मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं.

ताक पर रेलवे के नियम

सीबीआई को मिले दस्तावेज के मुताबिक, होटल लीज पर देने के नाम पर रेलवे के नियमों को ताक पर रखा गया था. लालू प्रसाद यादव उस वक्त रेल मंत्री थे. रेलवे को रांची और पुरी के होटल लीज पर देने को लेकर लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के साथ झारखंड से राज्यसभा सांसद और पार्टी के नेता प्रेमचंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता को अभियुक्त बनाया गया है.

इसके साथ ही इस मामले में होटल लीज पर लेने वाले विनय कोचर, विजय कोचर और पी के गोयल को भी आरोपी बनाया गया है. सीबीआई पहले ही कोचर बंधुओं, पीके गोयल और सरला गुप्ता से पूछताछ कर चुकी है.

अस्थाना के हाथ में केस

सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे से पूछताछ करेंगे. राकेश अस्थाना ही इस केस की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना लालू प्रसाद यादव के लिए कोई नया नाम नहीं हैं.

लालू प्रसाद यादव और राकेश अस्थाना का सामना पहले भी कई मौकों पर हो चुका है. लेकिन, इस बार लालू प्रसाद यादव के साथ उनके पुत्र तेजस्वी यादव का भी सामना होगा. दोनों बाप-बेटे को आमने-सामने बैठाकर सीबीआई पूछताछ करेगी.

राकेश अस्थाना इससे पहले भी देश में चर्चित चारा घोटाले की प्रारंभिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. राकेश अस्थाना के सीबीआई में रहते ही लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले में शिकंजा कसा गया था.

राकेश अस्थाना के हाथ एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की बेनामी संपत्ति और साल 2006 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे के दो होटलों की नीलामी में गड़बड़ी की जांच की जिम्मेदारी है.

क्या हैं जांच के नतीजे?

सीबीआई के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि होटल आवंटन में गड़बड़ियां हुई हैं. होटल लीज पर लेने के बदले जमीन ली गई. पटना के बेली रोड स्थित प्राइम लोकेशन पर तीन एकड़ जमीन लालू परिवार को दिया गया. इसकी कीमत उस वक्त करोड़ों में आंकी जा रही थी. 32 करोड़ की जमीन सिर्फ 65 लाख में दी गई. इसी जमीन पर तेजस्वी यादव मॉल का निर्माण करा रहे थे. जिसे बाद में रुकवा दिया गया था.

पटना के बेली रोड पर तीन एकड़ की जमीन कोचर बंधुओं की थी. कोचर बंधुओं ने यह जमीन पहले प्रेमचंद्र गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की कंपनी के नाम ट्रांसफर किया.

बाद में सरला गुप्ता की कंपनी ने यह जमीन लालू परिवार की कंपनी डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिया. बाद में डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड का नाम बदल कर लारा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया.

सीबीआई ने इसको लेकर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के केस में आईपीसी की धारा 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया था.

मीसा पर भी शिकंजा 

कुछ दिन पहले ही ईडी ने कार्रवाई करते हुए मीसा भारती और उनके पति शैलेश के दिल्ली स्थित बिजवासन फार्म हाउस को सील कर दिया है. वहीं कुछ दिनों पहले ही बेनामी संपत्ति मामले में ही आयकर विभाग ने पटना स्थित कार्यालय में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से लंबी पूछताछ की थी.

सीबीआई ने लालू प्रसाद और उनसे संबंधित आधा दर्जन लोगों के पटना से लेकर दिल्ली स्थित कुल 12 ठिकानों पर 7 जुलाई को बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी.

इस छापेमारी के दौरान रेलवे होटल लीज से संबंधित कुछ कागजात मिले थे. इन कागजातों से यह पता चला है कि प्रसिद्ध होटल व्यवसायी विनय कोचर और विजय कोचर को रांची और पूरी में रेलवे के दो बड़े होटल लीज पर दिए जाने के बदले में कोचर बंधुओं से बड़े पैमाने पर लाभ लिया गया.

दस्तावेजों से क्या पता चला

आयकर विभाग और सीबीआई की छापेमारी में बरामद दस्तावेज बताते हैं कि पूर्व में कोचर बंधुओं को रांची और पूरी के होटल 30 साल की लीज पर दी गई थी. लेकिन, बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 60 साल कर दी गई. लालू प्रसाद पर आरोप है कि होटलों की लीज की अवधि बढ़ाने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है.

रेलवे होटल लीज मामले में जांच के दौरान सीबीआई ने कई तरह की अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज जब्त किए थे. सीबीआई इन दस्तावेजों का सत्यापन खुद लालू प्रसाद और तेजस्वी से पूछ-ताछ कर करेगी. जिस तरह से बाप-बेटे सीबीआई को जांच में सहयोग करने से कतरा रहे हैं, उससे आसान नहीं होगा उनके लिए सीबीआई के सवालों का जावाब देना.

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