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गुलाम नबी आजाद खुद को आतंकी क्यों मान रहे हैं!

गुलाम नबी आजाद ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि विपक्षी नेताओं का फोन टैप करके उन्हें आतंकियों की श्रेणी में खड़ा कर दिया गया है

Amitesh Amitesh Updated On: Feb 06, 2018 03:13 PM IST

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गुलाम नबी आजाद खुद को आतंकी क्यों मान रहे हैं!

क्या विपक्ष के सारे नेता आतंकवादी हैं. क्या सरकार उनको आतंकवादी मान रही है. क्या विपक्षी नेताओं के साथ आतंकवादियों जैसा सलूक हो रहा है. कांग्रेस के नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के बयानों से तो कुछ ऐसा ही लग रहा है. उन्होंने राज्यसभा में केंद्र सरकार पर इस तरह के आरोपों की झड़ी लगा दी.

बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गुलाम नबी आजाद ने सरकार पर फोन टैपिंग का आरोप लगाकर बड़ा हमला बोला. आजाद ने कहा कि इस वक्त देश भर में एक तरह से भय का माहौल है. विपक्षी नेताओं के फोन टैप किए जा रहे हैं और उन्हें आतंकवादियों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया गया है.

आजाद के गंभीर आरोप

आजाद ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक दलों के नेताओं को ईडी, इनकम टैक्स और एनआईए के जरिए भी परेशान किया जा रहा है. यहां तक कि व्यापारी और कारोबारी वर्ग भी हम लोगों से फोन से बात करने में कतरा रहा है. उन्हें भी इस बात का खतरा है कि कहीं उनका फोन टैप न हो रहा हो. नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि व्यापारी वर्ग भी सरकार की तरफ से जानबूझकर परेशान होने के खतरे से डरा हुआ है.

आजाद ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने आतंकवादियों पर पैनी नजर रखने के लिए फोन टैपिंग कराई थी. लेकिन, आज तो हालात ऐसे हो गए हैं कि सभी विपक्षी नेताओं के लिए इस तरह किया जा रहा है. यहां तक कि आपने हमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी बना दिया है.

बयान पर खड़े हुए सवाल!

ऊपरी सदन में नेता प्रतिपक्ष की तरफ से इस तरह के बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल है कि क्या सरकार हकीकत में ऐसा कर रही है. क्या सरकार पर लगाए गए आरोपों में दम है. अगर ऐसा है तो फिर गुलाम नबी आजाद इसका कोई सबूत क्यों नहीं देते. अगर उनकी तरफ से कोई सबूत नहीं दिया जाता है तो फिर यह महज एक सियासी स्टंट बनकर ही रह जाएगा.

गुलाम नबी आजाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में बोल रहे थे. वो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कही गई बातों का जवाब दे रहे थे. कई दूसरे मुद्दों को लेकर आजाद ने मोदी सरकार पर हमला बोला.

विपक्षी नेताओं के फोन टैप किए जाने का मुद्दा उठाकर उन्होंने सबसे बड़ा हमला किया है. दरअसल, विपक्ष की तरफ से लगातार मोदी सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया जा रहा है. चाहे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ए के जोति और उनके फैसले को लेकर सवाल उठाना हो या फिर सीबीआई की अलग-अलग मामलों में भूमिका को लेकर सवाल हो.

अपने फायदे के लिए एजेंसी का इस्तेमाल! 

लगातार कांग्रेस की तरफ से सरकार पर हमला हो रहा है. सीबीआई, ईडी, एनआईए से लेकर सभी जांच एजेंसियों की भूमिका संदेह के घेरे में है. बीजेपी ने पहले सीबीआई का नाम कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन रखा था. अब कांग्रेस ने सीबीआई का नाम बीजेपी कैप्टिव ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन कर दिया है. आरोप है कि सरकार इन एजेंसियों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है.

दरअसल, गुलाम नबी आजाद का राज्यसभा के भीतर दिया गया बयान मोदी सरकार की नीयत पर शक पैदा करने की कोशिश के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. क्योंकि आरोपों में दम होता तो गुलाम नबी आजाद या दूसरे कांग्रेसी नेता अबतक फोन टैपिंग का सबूत दे चुके होते.

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