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पटाखों पर पॉलिटिक्स करने वाले गैर जिम्मेदार नेताओं को रोका क्यों नहीं जाता ?

बीजेपी के दिल्ली के प्रवक्ता तेजेंद्र सिंह बग्गा ने उन लोगों को शाबाशी दी है जिन्होंने तय वक्त के पहले या बाद में भी पटाखे छोड़े

Updated On: Nov 08, 2018 07:20 PM IST

FP Staff

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पटाखों पर पॉलिटिक्स करने वाले गैर जिम्मेदार नेताओं को रोका क्यों नहीं जाता ?
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दिल्ली में दीपावली के पहले ही प्रदूषण के चलते परेशानी थी, अब दीपावली के बाद भी कई इलाकों में प्रदूषण से परेशानी हो रही है. पटाखें जलाने के चलते दिल्ली की हवा प्रदूषित भी हुई है, जिससे निपटने में लोगों के पसीने छूट रहे हैं. लेकिन,इन सबके बावजूद इस परेशानी को दूर करने के उपायों पर चर्चा के बजाए  बीजेपी प्रवक्ता दिल्ली के पटाखा जलाने वाले लोगों को बधाई देते हुए कहते हैं दिल्ली वालों बधाई हो, आपने केवल पटाखे नही जलाए, कुछ और भी जलाया है.

यह बीजेपी के एक प्रवक्ता का बयान है. आखिर बग्गा क्या दिखाना चाहते हैं. क्या उनकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट को हिंदू विरोधी बताने की कोशिश है. क्या वो यह दिखाना चाहते हैं कि दीपावली के मौके पर प्रदूषण रोकने के लिए लगाया गया पटाखों पर बैन हिंदूओं के खिलाफ साजिश है. कम से कम उनकी बातों से तो यही लगता है. हकीकत यही है कि अधिकतर लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया, लेकिन, जिन लोगों ने पालन नहीं किया उनकी ही करतूतों का नतीजा है कि दिल्ली में काफी जगह दीपावली की अगली सुबह धुंआ-धुंआ नजर आ रहा है.

बीजेपी हो या कांग्रेस या आप, किसी ने प्रदूषण से निजात दिलाने में मदद नहीं की

अब दिल्ली के ऐसे ही लोगों के साथ बग्गा खड़े हो रहे हैं. हकीकत भी यही है कि तमाम राजनीतिक दल चाहे बग्गा की पार्टी बीजेपी हो या फिर कांग्रेस या फिर दिल्ली की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी, किसी की तरफ से भी ऐसा अभियान नहीं चलाया गया है जिससे दिल्ली के लोगों को प्रदूषण से निजात दिलाने में मदद हो.

नेताओं की तरफ से दीपावली के मौके पर शुभकामनाएं भी दी जाती हैं. लेकिन, उनकी तरफ से दीपावली के मौके पर अपने प्रशंसकों और अपने कैडर से यह अपील नहीं की जाती है कि दिल्ली को साफ-सुथरी रखने के लिए पटाखे फोड़ने से बाज आएं. अगर ऐसा होता तो शायद तेजेंद्र बग्गा जैसे लोगों को इतना साहस नहीं होता कि खुलकर इस तरह की बात करें.

जब पानी सिर से ऊपर निकल जाता है तब जाकर प्रदूषण के मुद्दे पर उनकी तरफ से कदम उठाने की बात की जाती है. दिल्ली सरकार की तरफ से कुछ कदम उठाने की बात भी की जाती है. कभी फिर से ऑड-ईवन फॉर्मूला भी लागू कर दिया जा सकता है. लेकिन, यह उस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है.

एक बार फिर से वही कहानी यानी प्रदूषण पर पॉलिटिक्स होगी. केंद्र और राज्य में बैठी सरकारें और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहेंगे. लेकिन, बग्गा जैसे लोगों पर कोई नियंत्रण नहीं रखेंगे जो प्रदूषण फैलाने वालों के समर्थन में पॉलिटिक्स कर रहे हैं.

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