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‘एकला चलो रे’ की राह पर चलने वाले अरविंद केजरीवाल क्यों गठबंधन की राह पर चलने को आमादा हैं?

साल 2014 में अगर बीजेपी की तुलना में कांग्रेस और आप के वोटिंग प्रतिशत को मिला दें तो कांग्रेस और आप को दिल्ली की 7 में से 6 सीटों पर बीजेपी से ज्यादा वोट मिले थे

Updated On: Jun 02, 2018 09:48 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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‘एकला चलो रे’ की राह पर चलने वाले अरविंद केजरीवाल क्यों गठबंधन की राह पर चलने को आमादा हैं?

देश में इस समय गठबंधन की राजनीति की बयार चल रही है. इस बयार का आनंद का लाभ अब आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी समझ में आने लगा है. आम आदमी पार्टी को समझ में आने लगा है कि दिल्ली में बगैर गठबंधन किए वह बीजेपी का मुकाबला नहीं कर सकती. ऐसे में आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडेय के एक ट्वीट ने दिल्ली की सियासत को और गरमा दिया है. दिलीप पांडेय के ट्वीट से साफ झलकता है कि साल 2019 लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस पार्टी और ‘आप’ के बीच कुछ न कुछ खिचड़ी जरूर पक रही है.

बता दें कि हाल के दिनों में कांग्रेस सहित दूसरी कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां भी गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में गई हैं. इस गठबंधन के सकारात्मक परिणाम भी बिहार, कर्नाटक और यूपी में देखने को मिले हैं. गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में जाने से अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं. इस परिणाम के सामने आने के बाद से ही आम आदमी पार्टी के अंदरखाने गठबंधन को लेकर चर्चा शुरू हुई है. ऐसे में अब पार्टी को लगने लगा है कि क्यों न गठबंधन कर के दिल्ली में बीजेपी को हराया जाए.

दिल्ली में आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत शुरू हो गई है

देशभर में पीएम मोदी के विरोध के नाम पर बन रहे गठजोड़ के बीच आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली में कांग्रेस के लिए एक लॉलीपॉप फेंका है. दिल्ली में नए सिरे से राजनीतिक जमीन तलाश रही कांग्रेस पार्टी के लिए यह ऑफर टॉनिक का काम कर सकता है. आम आदमी पार्टी की तरफ से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से दिल्ली सहित कुछ अन्य राज्यों में गठबंधन को लेकर बात चल रही है.

दिलीप पांडेय के ट्वीट से साफ झलकता है कि दिल्ली में आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत शुरू हो गई है. इसको तब और बल मिला, जब पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ की थी.

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पिछले दिनों अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट करते हुए कहा था कि लोगों को अब मनमोहन सिंह जैसे पढ़े-लिखे प्रधानमंत्री की याद आ रही है. पीएम तो पढ़ा लिखा ही होना चाहिए. अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर फर्जी कॉलेज डिग्री रखने का आरोप भी लगाया था.

दरअसल केजरीवाल हमेशा से ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ करते आएं हों, ऐसा नहीं है. आपको बता दें कि पहले यही केजरीवाल पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को महाभारत का 'धृतराष्ट्र' बता चुके हैं. जिसके सामने सब कुछ गलत होता रहता है पर वो फिर भी कुछ नहीं कहता.

अक्टूबर 2013 में केजरीवाल ने ट्वीट कर मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा था कि भ्रष्ट कांग्रेस ने केंद्र में मनमोहन सिंह को अपना चेहरा बनाया है. मनमोहन कांग्रेस और अपनी ही सरकार में भ्रष्टाचार रोकने में सफल नहीं हो सके. 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी केजरीवाल ने किरण बेदी को बीजेपी का मनमोहन सिंह बताया था.

 

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अजय माकन राजनीति के मास्टर खिलाड़ी हैं

अरविंद केजरीवाल के मनमोहन सिंह पर किए गए ताजा ट्वीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने ट्वीट कर कहा था कि अब आपको कपिल सिब्बल, पवन खेड़ा, शीला दीक्षित और पी चिदंबरम से माफी मांगनी चाहिए. आप बीजेपी समर्थित टीम अन्ना के साथ मिलकर कांग्रेस नेताओं के बारे में झूठ फैलाया और मोदी को सत्ता में लाए. लोकपाल कहां है?.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन के ट्वीट से शुरू हुई इस खबर पर आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडेय के ट्वीट ने लगभग मुहर लगा दी है. शनिवार को कांग्रेस नेता अजय माकन के ट्वीट से साफ झलकता है कि वह अरविंद केजरीवाल को माफ करने के मुड में नहीं हैं. दूसरी तरफ उनके ट्वीट से यह भी झलकता है कि वह किसी रणनीति पर काम कर रहे हैं. इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि अजय माकन राजनीति के मास्टर खिलाड़ी हैं.

माकन भले ही मीडिया के सामने अलग बातें बोल रहे हैं, लेकिन दिल्ली की राजनीति में वह पिछले काफी सालों से हैं. दिल्ली की राजनीति का यह पुराना खिलाड़ी कांग्रेस की तैयार रणनीति के पत्ते अभी पूरी तरह से खोलना नहीं चाहता है. ऐसे में माना जा रहा है कि शनिवार को अरविंद केजरीवाल पर किया गया ट्वीट भी उसी का एक एक हिस्सा है.

दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल ने पिछले सप्ताह ही कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कहा था कि लोग मोदी से नाराज हैं और उनको हटाना चाहते हैं. पहले लोग कह रहे थे कि उनके पास क्या विकल्प है अब लोग कह रहे हैं कि मोदी विकल्प नहीं हैं.

दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल के हाल के ट्वीट से भी साफ झलकता है कि वह अब अकेला चलो की रणनीति को त्याग कर गठबंधन पर काम कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी के भीतर दिलीप पांडेय का कद बड़ा है. पांडेय हमेशा से अरविंद केजरीवाल के लिए वफादार का काम किया है. ऐसे में दिलीप पांडेय ने अगर ट्वीट कर गठबंधन की बात को सामने रखा है तो कहीं न कहीं इसमें अरविंद केजरीवाल की सहमति है और यह एक रणनीति का भी हिस्सा है.

शनिवार को पूरे दिन इस सियासी दोस्ती पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ही नकाराते रहे. वहीं दिलीप पांडेय ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से गठबंधन की बात को स्वीकार कर लिया. इस खबर के सामने आने के बाद अजय माकन का कहना था कि किसी भी कीमत पर आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन का सवाल नहीं है. अजय माकन तर्क देते रहे कि पिछले दो उपचुनावों में दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के वोट प्रतिशत में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. ऐसे में कांग्रेस आलाकमान प्रदेश के नेताओं से चर्चा किए बिना कोई कदम नहीं उठाएगा.

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडेय के ट्वीट के बाद कोई पार्टी का दूसरा नेता इस मामले में कुछ भी बोलने से बचता रहा. इस खबर के सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा है.

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बीजेपी को 46.6 प्रतिशत और कांग्रेस-आप को 48.3 प्रतिशत वोट शेयर मिले थे

बीजेपी ने इस नए सियासी समीकरण के बाद आप और कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है. दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता मीडिया से बात करते हुए कहते हैं, हमलोगों को पहले से ही पता है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस पार्टी की बी टीम है.

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दरअसल इस खबर को तभी से हवा लगी थी जब कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सात सीटों में से सिर्फ पांच सीटों के लिए ही अपना प्रभारी घोषित किया था. आप ने नई दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली के लिए अपना प्रभारी घोषित नहीं किया था. पार्टी ने दक्षिणी दिल्ली के लिए राघव चड्डा, चांदनी चौक सीट के लिए पंकज गुप्ता, पूर्वी दिल्ली के लिए आतिशी मर्लिना, उत्तरी-पश्चिमी सीट के लिए गुगन सिंह और दिलीप पांडेय के लिए उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट के लिए प्रभारी बनाया था.

दिल्ली में 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी लहर के सामने किसी की भी एक नहीं चली थी. दिल्ली की सातों सीट पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी खाता तक नहीं खोल पाई थी.

ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि दिल्ली में अगर आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो जाता है तो बीजेपी के लिए मुश्किल हो सकता है. साल 2014 में अगर बीजेपी की तुलना में कांग्रेस और आप को वोटिंग प्रतिशत मिला दें तो दोनों पार्टियों को 7 में से 6 सीटों पर बीजेपी से ज्यादा वोट मिले थे. अगर दिल्ली की सभी सीटों की वोटिंग प्रतिशत मिला दें तो बीजेपी को 46.6 प्रतिशत और कांग्रेस-आप को 48.3 प्रतिशत वोट शेयर मिले थे.

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