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महज 2.5 रुपए के लिए राजनाथ सिंह से क्यों गुस्सा है आम आदमी पार्टी

राघव चड्ढा ने गृह मंत्रालय को 2.50 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भेजा है, उन्होंने कहा कि यह रकम उन्होंने सलाहकार के पद पर रहते हुए कमाई जिससे मुझे बर्खास्त किया गया

FP Staff Updated On: Apr 18, 2018 05:01 PM IST

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महज 2.5 रुपए के लिए राजनाथ सिंह से क्यों गुस्सा है आम आदमी पार्टी

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार में नियुक्त किए गए 9 सलाहकारों की बर्खास्तगी के बाद पार्टी के नेताओं ने पहले तो बयानबाजी की लेकिन अब तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने बुधवार को 2.50 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट गृह मंत्रालय को भेजा है. इसके साथ उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र भी भेजा है.

उन्होंने कहा है कि जिस पद से उनकी बर्खास्तगी हुई है, उस पद पर रहने के एवज में मुझे 2.50 रुपए मिले थे. चड्ढा उन 9 सलाहकारों में शामिल थे जिन्हें विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में केजरीवाल सरकार ने नियुक्त किया था.

उन्होंने बताया कि मैं सलाहकार के पद पर 75 दिन रहा था. मैं महीने की एक रुपए सैलरी लेता था, ऐसे में मेरी कुल तनख्वाह 2.50 रुपए हुई जिसे में लौटा रहा हूं. चड्ढा ने यह सवाल भी पूछा है कि जब मैं पद छोड़ चुका था, तो बर्खास्तगी किस बात की.

गृह मंत्रालय के सलाह पर सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने केजरीवाल सरकार के 9 सलाहकारों को बेपद करने का फैसला लिया था. अपने फैसले में जीएडी ने बताया था कि नेशनल कैपिटल टेरीटरी के 'सर्विस' (किसी नए पद का गठन या नियुक्ति) से जुड़े फैसले केंद्र सरकार की अनुमति के बगैर नहीं लिए जा सकते.

जीएडी के फैसले के तुरंत बाद चड्ढा ने केंद्र पर आरोप लगाया था कि मोदी सरकार उन्नाव-कठुआ रेप केस और देश में कैश क्रंच की समस्या से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रही है. चड्ढा के बयानों और 2.50 रुपए के डिमांड ड्राफ्ट भेजने के बाद तो यही लग रहा है कि ध्यान भटकाने का काम खुद राघव चड्ढा ही कर रहे हैं.

हर बार यहीं होता है कि जब भी केजरीवाल सरकार की कमियों का कच्चा-चिट्ठा सामने आता है तो वो केंद्र सरकार पर दोष मढ़ने लगते हैं. आखिर आम आदमी पार्टी अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप का खेल क्यों खेलने लगती है?

केंद्र सरकार के इस फैसले पर भी आम आदमी पार्टी अपनी जानी-पहचानी राह ही अपना रही है और सारे दोष केंद्र के माथे मढ़ रही है. वो कब तक ऐसे कर के बचते रहेंगे ये सोचने वाली बात होनी चाहिए. क्योंकि सलाहकारों की नियुक्ति की प्रक्रिया सही नहीं थी. यहीं कारण रहा कि सभी 9 सलाहकारों को पदस्थ होना पड़ा और केजरीवाल की एक बार फिर किरकिरी हुई. ऐसा तब हुआ जब गृह मंत्रालय पहले भी इस बात की जानकारी केजरीवाल सरकार को दे चुका था.

सवाल यह उठता है कि जब बात महज 2.50 रुपए की है तो राघव चड्ढा गृह मंत्री को डिमांड ड्राफ्ट भेज कर क्या साबित करना चाहते हैं या उनके नजर में एक सलाहकार की कीमत सिर्फ 2.50 रुपए हैं. चड्ढा के इस नाटकीय हरकत से आम आदमी पार्टी की उस सोच का पता चलता है, जो सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करने के लिए है. अगर ऐसा नहीं होता तो पार्टी और उसके नेता एक के बाद एक गलतियां नहीं करते बल्कि गलतियों को स्वीकार कर दिल्ली की भलाई के लिए काम करते.

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