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केजरीवाल मजाक के पात्र क्यों बनते जा रहे हैं ?

खुद की सरकार पर ध्यान दिए बिना दूसरों पर हमले क्यों कर रहे हैं केजरीवाल

Updated On: Mar 15, 2017 06:05 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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केजरीवाल मजाक के पात्र क्यों बनते जा रहे हैं ?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बुधवार को जब मीडिया से मुखातिब हुए तो उनके चेहरे पर पंजाब की पराजय और गोवा की हार का गम साफ-साफ दिख रहा था. लेकिन, दोनों राज्यों में हार को न केजरीवाल पचा पा रहे हैं और न ही उनकी पार्टी.

केजरीवाल की तरफ से तो कहा यही जा रहा है कि मुझे मालूम है कि आप मेरा मजाक उड़ाएंगे. मेरे नाम के साथ हैशटैग चलाएंगे.

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ईवीएम मशीन में गड़बडी और छेड़छाड़ का आरोप लगाकर केजरीवाल की तरफ से अपने चेहरे को छुपाने की कवायद हो रही है. लेकिन, पंजाब और गोवा की हार इतनी बड़ी है कि शायद केजरीवाल का चेहरा ईवीएम की आड़ में भी न छुप पाए.

ईवीएम को क्यों दे रहे हैं दोष

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ईवीएम मशीन पर हार का ठीकरा फोड़ने वाले केजरीवाल ये भूल गए कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के वक्त भी मतदान ईवीएम मशीन के जरिए ही हुआ था. लेकिन, 70 में से 67 सीटें जीतने के बाद उस वक्त उनके जेहन में बैलेट पेपर से मतदान का तनिक भी ख्याल क्यों नहीं आया?

केजरीवाल एंड कंपनी की अति महात्वाकांक्षा ने उन्हें दिल्ली से बाहर अपने पांव-पसारने को लेकर हरसंभव प्रयास किया. पंजाब से लेकर गोवा तक और आगे गोवा से लेकर गुजरात तक की तैयारी थी. लेकिन, दिल्ली से पंजाब तक का सफर बीच में ही इस कदर फंस गया कि आने वाले दिनों में गुजरात में मोदी के रथ को रोकने की उनकी आस भी काफूर होती दिख रही है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल ने जो सब्जबाग दिल्ली की जनता को दिखाए थे, उस पर उस हद तक अमल तो हो नहीं पाया. लेकिन, दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी चुनाव की चिंता केजरीवाल को सताए जा रही है.

उनको लगता है कि यूपी से लेकर उत्तराखंड की हवा कहीं दिल्ली तक पहुंच गई तो शायद दिल्ली में उनके काम को लेकर भी सवाल खड़े होने लगेंगे. ये बात अलग है कि एमसीडी में अभी बीजेपी सत्ता में है और आम आदमी पार्टी पहली बार एमसीडी चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही है.

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लेकिन, दिल्ली विधानसभा में अपने विरोधियों का सूपड़ा साफ करने के बाद आप के ऊपर एमसीडी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन को लेकर भारी दबाव है. ये दबाव विरोधियों की रणनीति को लेकर भी है.

क्योंकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जिस अंदाज में भोजपुरी गायक मनोज तिवारी को दिल्ली के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है उसके बाद आप के खेमे में खलबली है. पूर्वांचली लोगों ने विधानसभा चुनाव के वक्त केजरीवाल का साथ दिया था. अब अगर मनोज तिवारी सेंधमारी कर जाते हैं तो ये केजरीवाल  के लिए भारी मुश्किल होगी.

जेडीयू भी कर रही परेशान

nitish kumar

दूसरी तरफ, जेडीयू ने भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बेहतर छवि को आगे कर पूर्वांचली और बिहारी मतदाताओं को साथ लाने की पूरी तैयारी की है. जेडीयू की आप के वोलंटियर्स में सेंधमारी से भी आप परेशान है.

ऐसे में केजरीवाल की परेशानी को समझा जा सकता है. शायद इसी वजह से उनकी तरफ से इस तरह की बात कही जा रही है.

केजरीवाल एंड कंपनी पंजाब में जीत को लेकर इस कदर आश्वस्त थी कि मतगणना से पहले ही जश्न मनाया जाने लगा था. जश्न था पंजाब में भारी जीत का और यहां तक कि मुख्यमंत्री के नाम तक की चर्चा होने लगी थी.

पंजाब प्रभारी संजय सिंह की अगुआई में आप के कार्यकर्ताओं के साथ जो वीडियो वायरल हुआ है वो तो पूरी कहानी ही बयां कर देता है. लेकिन, नतीजों ने ऐसा झटका दिया कि अब तो वो मानने को तैयार ही नहीं हो रहे कि पंजाब में वो अब पस्त हो चुके हैं.

बहरहाल इस वीडियो से भी केजरीवाल और उनकी पार्टी का खूब मजाक उड़ाया जा रहा है.

बेहतर यही होगा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरिवंद केजरीवाल एक बार फिर से दिल्ली पर अपना ध्यान फोकस कर दिल्ली की जनता से किए वादों को पूरा करने में अपना वक्त गुजारें. वरना पंजाब और गोवा की तरह एमसीडी में भी उनको झटका लग सकता है भले ही वोटिंग ईवीएम से हो या बैलेट पेपर से.

वरना, दिल्ली के मुख्यमंत्री दिल्ली के भीतर उपहास के पात्र बनकर रह जाएंगे.

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