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मनोज सिन्हा क्यों चल रहे हैं सीएम की रेस में सबसे आगे?

बीजेपी अब तक अपने नेता के नाम का ऐलान नहीं कर पाई है, लिहाजा सस्पेंस और भी ज्यादा बढ़ता चला जा रहा है

Updated On: Mar 18, 2017 08:16 AM IST

Amitesh Amitesh

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मनोज सिन्हा क्यों चल रहे हैं सीएम की रेस में सबसे आगे?

11 मार्च को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से ही कयासों का बाजार गर्म है कि किसके हाथों में यूपी की कमान होगी, किसके सिर सजेगा यूपी का ताज, कौन बनेगा यूपी का मुख्यमंत्री.

यूपी में प्रचंड बहुमत के बावजूद बीजेपी अब तक अपने नेता के नाम का ऐलान नहीं कर पाई है, लिहाजा सस्पेंस और भी ज्यादा बढ़ता चला जा रहा है.

जितनी मुंह उतनी बातें हो रही हैं. कभी रेस में गृह-मंत्री राजनाथ सिंह आगे दिखते हैं तो कभी संचार मंत्री मनोज सिन्हा का नाम आ जाता है. यूपी बीजेपी अध्यक्ष से लेकर योगी आदित्यनाथ तक सब अफवाहों की रेस में दौड़ लगाते दिख रहे हैं.

इसके अलावा और भी कई नाम अचानक सामने आ जाते हैं और ख्वाबों के सागर में गोता लगाने लगते हैं.

बीजेपी संसदीय बोर्ड ने यूं तो यूपी का मुख्यमंत्री चुनने की जिम्मेदारी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को सौंपी है. लेकिन उसके पहले कि कोई एलान होता अफवाहों का बाजार गर्म हो गया.

सबके अपने-अपने तर्क भी हैं और अपने-अपने दावे भी.

लेकिनअब इस सस्पेंस से जल्द ही पर्दा उठने वाला है. लखनऊ में शनिवार को विधायक दल की बैठक में नेता का चुनाव हो जाएगा. इस बात का ऐलान हो जाएगा कि यूपी का सरताज कौन होगा.

विधायक दल की बैठक में होगा एलान

विधायक दल के नेता के चुनाव से पहले संचार मंत्री मनोज सिन्हा का नाम अब सबसे ऊपर हो गया है. मनोज सिन्हा एक साफ-सुथरी छवि के नेता हैं, जिनका विवादों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है. इसके पहले भी मनोज सिन्हा गाजीपुर से 2 बार सांसद रह चुके हैं. जबकि मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें रेल राज्य मंत्री की अहम जिम्मेदारी दी गई है.

यूपी से लेकर दूसरे राज्यों में रेल राज्य मंत्री के रूप में उनके कामकाज की खूब तारीफ भी हुई, जिसका ईनाम भी उन्हें उस वक्त मिला जब मंत्रिमंडल विस्तार के वक्त उन्हें प्रमोशन दिया गया. रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री के ओहदे के साथ उन्हें संचार मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी दी गई.

Manoj Sinha

पार्टी और सरकार के भीतर मनोज सिन्हा का कद धीरे-धीरे बढ़ता गया. लोकसभा चुनाव के ठीक पहले पूर्वांचल इलाके में मनोज सिन्हा को चुनाव जिताने की बड़ी जिम्मेदारी भी दी गई थी. लगातार उन्होंने वाराणसी, गाजीपुर और आस-पास के जिलों में कैंप कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश की.

विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल इलाके में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत का श्रेय काफी हद तक मनोज सिन्हा को भी जाता है.

बीएचयू से सिविल इंजीनियर मनोज सिन्हा बीएचयू छात्र संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इनके काम करने का अंदाज, लो प्रोफाइल व्यक्तित्व और विवादों से परे रहने की छवि ही उनको मोदी-शाह की पसंद के तौर पर सामने ला रही है.

बनारस से लेकर पूर्वांचल की रैलियों में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से उनकी कई बार तारीफ भी की है.

यूपी में बीजेपी को चाहिए दमदार नेतृत्व 

जाति और सामाजिक समीकरण के बंधन को तोड़कर विकास के रास्ते को तरजीह देने की प्रधानमंत्री की कोशिश हमेशा से ही रही है. तभी तो कभी महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस, हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर और झारखंड में रघुवर दास उभरकर सामने आ जाते हैं. अब यूपी में मनोज सिन्हा के हाथों में कमान आती है तो वही कहानी एक बार फिर से दोहरायी जाएगी, जिसमें जातीय समीकरण पर विकास हावी होता दिखेगा.

Manoj Sinha

दरअसल, यूपी के भीतर तीन-चौथाई से भी ज्यादा बड़ी जीत के बाद से ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि इतने बड़े जनादेश को संभालने के लिए एक दमदार और मजबूत नेतृत्व की जरूरत है.

इसी के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह का नाम भी चर्चा में आया था. राजनाथ सिंह यूपी के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और सियासी कद के हिसाब से आज की तारीख में यूपी से आने वाले बड़े नेता भी हैं.

लेकिन उनके दिल्ली से लखनऊ जाने के बाद केंद्र में आए खालीपन को भरने में खासी मशक्कत हो सकती है. ऐसी सूरत में मनोज सिन्हा ज्यादा मजबूती से बड़े दावेदार के रूप में सामने आ रहे हैं. सीएम के दावेदार के तौर पर उनकी चर्चा जारी है. हालांकि कुछ टेलीविजन चैनल्स के हवाले से उन्होंने इन खबरों से इनकार किया है. लेकिन सब जानते हैं कि हाईकमान के ऐलान किए बिना कोई ऐसे मसलों पर जुबान नहीं खोलता.

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