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दिल्ली में सीलिंग की सियासत में किस पार्टी को उठाना पड़ सकता है नुकसान?

व्यापारियों का मानना है कि सीलिंग को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर दोष मढ़ने के सिवा कुछ और नहीं कर रहे हैं

Updated On: Mar 18, 2018 06:56 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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दिल्ली में सीलिंग की सियासत में किस पार्टी को उठाना पड़ सकता है नुकसान?

दिल्ली में सीलिंग की शुरुआत हुए तीन महीने होने को हैं. इस दौरान न तो दिल्ली सरकार और न ही केंद्र सरकार के पास सीलिंग का कोई हल नजर आया है. केंद्र या राज्य सरकार सीलिंग के मुद्दे पर गंभीरता दिखाने से क्यों बचना चाह रही है? क्या वाकई में दोनों सरकारों को सीलिंग नाम की बीमारी का वैक्सीन खोजने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है? या फिर वाकई में दोनों जानबूझकर और एक सोची समझी रणनीति के तहत सीलिंग के मुद्दे को उलझा कर रखना चाह रही है? यह कुछ सवाल हैं, जिसका जवाब दिल्ली के व्यापारी दोनों सरकारों से मांग रहे हैं.

दिल्ली के कारोबारी इन्हीं कुछ सवालों को ले कर बीते 3 महीने से अपने जनप्रतिनिधियों के चौखट पर जा कर हाजिरी दे रहे हैं, लेकिन वहां से उनको हर बार आश्वासन और निराशा के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लग रहा है.

दिल्ली में सीलिंग के लिए राजनीतिक दल एक-दूसरे पर दोष मढ़ने के अलावा कुछ और नहीं कर रहे हैं. इससे जहां दिल्ली के कारोबारी दहशत में जीने को मजबूर हैं वहीं नेता बयान देकर अपना पल्ला झाड़ने में मस्त हैं.

ऐसा लग रहा है कि सीलिंग के मुद्दे पर दिल्ली की तीनों बड़ी राजनीतिक पार्टियां एक सोची समझी रणनीति के तहत व्यापारियों को मूर्ख बना रही हैं. कारोबारियों के दर्द को कोई भी सुनने को तैयार नहीं है. सीलिंग की मार झेल रहे कारोबारी उठते-बैठते, सोते-जागते हर वक्त सीलिंग को लेकर परेशान रहते हैं. इन्हें लगता है कि कोई मसीहा आएगा और उन्हें इस दहशत से निकाल कर बाहर ले जाएगा. लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है कारोबारियों का यह सपना, सपना ही बनता जा रहा है.

New Delhi: Traders and workers raise slogans on the second day of protest called by traders against MCD and BJP government for ongoing sealing in all wholesale and commercial markets, in Chandni chowk at Delhi on Saturday. PTI Photo (PTI2_3_2018_000087B)

दिल्ली में जारी सीलिंग को लेकर व्यापारी और कारोबारी सड़कों पर उतर विरोध कर रहे हैं

दिल्ली के कर्ता-धर्ता कहलाने वाले यह नेता और मंत्री सीलिंग के मुद्दे पर अपनी बेबसी, लाचारगी और इधर-उधर की बातों में उलझा कर कारोबारियों को बहकाने का काम कर रहे हैं. नेता बड़े साफगोई से अपना पल्ला झाड़ कर दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं.

क्या करें जिससे दिल्ली में चल रहे सीलिंग की कार्रवाई खत्म हो जाए

इतना समय बीत जाने के बाद भी राजनीतिक दलों का सीलिंग का कोई कारगर हल नहीं ढूंढ पाना अपने आप में बड़ा सवाल पैदा करता है. सीलिंग की मार झेल रहे व्यापारी यह जानना चाह रहे हैं कि वो क्या करें जिससे दिल्ली में चल रहे सीलिंग की कार्रवाई खत्म हो जाए.

सरकार या कोर्ट की तरफ से राहत नहीं मिलने के बाद अब कयास लगाया जा रहा है कि सीलिंग के खिलाफ व्यापारियों का आंदोलन और बड़ा स्वरूप ले सकता है. दिल्ली के कारोबारियों ने 28 मार्च को रामलीला मैदान से मार्च करने का एलान कर दिल्ली की राजनीति में तूफान ला दिया है.

शनिवार को केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने सीलिंग को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया. उनके इस बयान के बाद दिल्ली में सीलिंग को लेकर एक बार फिर से राजनीति गर्मा सकती है.

हरदीप सिंह पुरी ने सीलिंग की कार्रवाई को दिल्ली के बेहतर भविष्य की पहल करार दिया है. पुरी ने साफ कहा कि जो लोग सीलिंग को एक गंभीर समस्या के तौर पर पेश कर रहे हैं, वो ओछी राजनीति कर रहे हैं. दिल्ली को रहने लायक शहर बनाने और पूर्व में राजनीतिक दलों के संरक्षण में हुई गलतियों को सुधारने के लिए ही सुप्रीम कोर्ट को सीलिंग जैसे कड़े कदम उठाने पड़े हैं.

हरदीप सिंह पुरी (फोटो: फेसबुक)

हरदीप सिंह पुरी (फोटो: फेसबुक)

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'सरकार को मास्टर प्लान में संशोधन और समीक्षा करने का पूरा अधिकार है. दिल्ली के मास्टर प्लान में पहले भी 248 बार संशोधन हो चुके हैं. जहां तक व्यापारियों को हो रही परेशानियों का सवाल है तो मंत्रालय ने मास्टर प्लान में संशोधन कर समस्या का समाधान निकालने की पहल की है. सोमवार को हम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिल कर इस समस्या का समाधान खोज निकालेंगे और जल्द ही इसके परिणाम दिखाई देने शुरू हो जाएंगे.’

सीलिंग पर नेताओं के बयान दिन और घंटे के हिसाब से बदलते रहते हैं

आपको बता दें कि सीलिंग के मुद्दे पर नेताओं के बयान दिन और घंटे के हिसाब से बदलते रहते हैं. हर दिन नेताओं के बयान दूसरे नेताओं के दिए बयान के अनुसार बदल जाते हैं.

इन बयानों पर दिल्ली में राजनीतिक ड्रामेबाजी का खेल भी शुरू हो जाता है, लेकिन इन राजनीतिक दलों को अब भी व्यापारियों के दर्द पर राजनीति के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता है या फिर वो जानबूझ कर इससे कन्नी काटना चाहते हैं.

आपको बता दें कि विदेश यात्रा से लौटने के बाद शुक्रवार को दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी अपने 4 वरिष्ठ नेताओं के साथ मीडिया से मुखातिब हुए. इन सभी ने एक-एक कर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकार पर हमला बोला.

मनोज तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मेरे विदेश दौरे को देखते हुए अरविंद केजरीवाल ने जानबूझकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का ढोंग किया, जबकि अरविंद केजरीवाल जानते थे कि वह राष्ट्रपति महोदय के साथ विदेश में हैं.’

Delhi Sealing

आम आदमी पार्टी और दिल्ली बीजेपी सीलिंग की समस्या के लिए एक-दूसरे को कसूरवार ठहरा रहे हैं

वहीं, दिल्ली से ही बीजेपी सांसद रमेश बिधुड़ी ने केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘अरविंद केजरीवाल ओवरसाइज शर्ट और सस्ती चप्पल पहनकर खुद को आम आदमी की तरह दिखाने का ढोंग करते हैं. केजरीवाल लोगों को इमोशनली ब्लैकमेल करते हैं और बार-बार झूठ बोलते हैं.’

दिल्ली के एक और सांसद महेश गिरी का कहना था कि जिनकी वजह से व्यापारियों को यह दिन देखने को मिल रहा है, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए. गिरी के मुताबिक, दिल्ली सरकार और एमसीडी के उन अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जिनकी लापरवाही की गाज आज कारोबारियों पर गिर रही है.

वहीं अरविंद केजरीवाल से खुद को सुपिरियर (बेहतर) बताने वाले और दिल्ली के एक और सांसद उदित राज ने कहा, 'दिल्ली सरकार ने अनधिकृत कॉलनियों को रेगुलराइज कर दिया, जिसके कारण ही आज दिल्ली में सीलिंग की तलवार लटक गई है.’

मास्टर प्लान में खामियों के लिए कांग्रेस-आप को जिम्मेदार ठहराया 

रही-सही कसर दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने पूरी कर दी. गुप्ता ने मीडिया के सामने मास्टर प्लान में खामियों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आप को भी सीलिंग के लिए जिम्मेदार बताया. विजेंद्र गुप्ता के मुताबिक, यूपीए सरकार द्वारा तैयार किए गए मास्टर प्लान में जल्दी ही संशोधन कर नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. कानून में बदलाव होने के बाद दिल्ली में 90 प्रतिशत सीलिंग अपने आप रुक जाएगी. जहां सीलिंग हुई भी है वहां फिर से खुल जाएगी.’

अगर बात करें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तो उनके तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि दिल्ली समस्या के समाधान की दिशा में लगातार प्रयासरत है, लेकिन दिल्ली के व्यापारी वर्ग दिल्ली सरकार के कदम से निराश हैं.

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सीलिंग के विरोध में व्यापारियों ने 31 मार्च को रामलीला मैदान से मोर्चा निकालने की धमकी दी है

आपको बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीलिंग की समस्या के समाधान के लिए बीते 13 मार्च को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी. इसमें कांग्रेस नेता तो आए लेकिन बैठक से बीजेपी के नेता नदारद थे.

सीलिंग के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल और आप सरकार के मंत्री लगातार कहते आ रहे हैं कि सीलिंग के मुद्दे पर जो करेगी वह केंद्र सरकार और एलजी ही करेंगे. इसके बावजूद दिल्ली के अमर कॉलनियों में व्यापारियों के बीच पहुंच कर अरविंद केजरीवाल राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल का यह कहना कि 31 मार्च तक दिल्ली में अगर सीलिंग नहीं रुकती है तो वह भी व्यापारियों के साथ भूख हड़ताल पर बैठेंगे. केजरीवाल के इस कदम पर कारोबारियों को कोई गहरी साजिश की बू आ रही है.

सीलिंग मुद्दे से दोबारा दिल्ली की राजनीति में वापसी करने का सपना 

दूसरी तरफ दिल्ली की राजनीतिक परिदृश्य से गायब हुई कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे के बहाने दोबारा से वापसी करने का सपना संजोए हुई है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी शायद केंद्र के बड़े नेताओं में पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने सीलिंग के मुद्दे पर बीजेपी और आप को तू-तू मैं-मैं बंद कर समस्या सुलझाने की नसीहत दी थी. इसके बाद दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन अरविंद केजरीवाल के द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लिया था.

दिल्ली में चल रही सीलिंग पर सियासी ड्रामेबाजी के बाद यह कहा जा सकता है कि दिल्ली दरबार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. व्यापारी परेशान हैं. कारोबारियों से हर रोज उनकी रोजी-रोटी छीनी जा रही है तो दूसरी तरफ काम करने वाले कर्मचारी भी बेरोजगार हो रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दिल्ली में बीते तीन महीने से सीलिंग की कार्रवाई जारी है

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दिल्ली में बीते तीन महीने से सीलिंग की कार्रवाई जारी है

इन्हीं सब कारणों को लेकर दिल्ली के व्यापारियों ने आखिरकार अपने हक की लड़ाई खुद ही लड़ने का फैसला किया है. व्यापारी 31 मार्च को रामलीला मैदान कूच कर केंद्र और दिल्ली सरकार को कड़ा संदेश दे सकते हैं.

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