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मिशन 2019 के लिए सभी दलों की निगाहों में हैं युवा वोटर

2019 के आम चुनाव में 18 से 23 साल की उम्र के करीब 28 करोड़ वोटर होंगे, 13 करोड़ से ज्यादा युवा तो पहली बार मतदान करेंगे

Updated On: Jan 20, 2018 10:51 PM IST

FP Staff

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मिशन 2019 के लिए सभी दलों की निगाहों में हैं युवा वोटर

राजस्थान विधानसभा सचिवालय में चपरासी के पद एवं चतुर्थ श्रेणी के 18 पदों के लिए 129 इंजीनियरों, 23 वकीलों, एक सीए और 393 पोस्ट-ग्रेजुएट उम्मीदवारों ने आवेदन किया. यूपी में ठेके पर भर्ती होने वाले सफाई कर्मचारियों के लिए 2016 में आवेदन मांगे गए थे. जिसमें ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन भी प्राप्त हुए, जिनकी शैक्षिक योग्यता पीएचडी, एमबीए, बीटेक और पॉलीटेक्निक तक थी. जबकि इस पद के लिए अधिकतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास होती है.

ये स्थिति सिर्फ राजस्थान और यूपी की नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी है. बीजेपी इस हालात के लिए देश में सबसे ज्यादा वक्त तक सत्ता में रही कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराती है. पीएम मोदी कह रहे हैं 'मैं चाहता हूं कि मेरे देश का नौजवान 'जॉब क्रिएटर' बने. इसीलिए सरकार ने स्किल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाएं चलाईं.'

फिर भी युवाओं के सहयोग से सत्ता के शिखर पर पहुंची बीजेपी के लिए रोजगार सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. वर्ष 2014 में युवा वोटरों के भरोसे ही बीजेपी को जीत मिली थी.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, एसपी प्रमुख अखिलेश यादव सहित पूरा विपक्ष सरकार से रोजगार पर सवाल कर रहा है. गुजरात में पटेल, महाराष्ट्र में मराठा, हरियाणा में जाट और राजस्थान में गुर्जर मांग रहे हैं अपने युवाओं के लिए आरक्षण ताकि नौकरी में भागीदारी बढ़े.

कितना कारगर साबित होगा बीजेपी का युवा उद्घोष 

इस चिंता के बीच शनिवार को भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से मिशन 2019 का आगाज करने जा रही है. फोकस किया गया है युवाओं पर. कार्यक्रम का नाम रखा गया है युवा उद्घोष. संदेश साफ है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के कर्णधार युवा ही होंगे.

युवा उद्घोष में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शिरकत करेंगे. पार्टी युवाओं को कनेक्ट करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगी. स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर मनाए जाने वाले युवा दिवस पर झारखंड की सत्ता पर काबिज बीजेपी की सरकार ने निजी क्षेत्र में 25 हजार युवाओं को रोजगार देने का सर्टिफिकेट बांटा. यह दिखाने और जताने की कोशिश है कि सरकार और पार्टी युवाओं पर फोकस कर रही है.

बीएचयू मामले में ऐक्शन लेते हुए यूपी सरकार ने तीन अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ और एसओ को हटा दिया है.

2019 के आम चुनाव में 18 से 23 साल की उम्र के करीब 28 करोड़ वोटर होंगे. 13 करोड़ से ज्यादा युवा तो पहली बार मतदान करेंगे. इसलिए यह संख्या काफी अहम है.

युवा मतदाताओं पर बीजेपी, कांग्रेस दोनों दलों की नजर टिकी है. खास तौर से बीजेपी उन मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो 2018 में 18 वर्ष के हो जाएंगे. बताया गया है कि बीजेपी 25 जनवरी से 10 फरवरी तक मिलेनियम वोटर अभियान चलाएगी. इसमें इस साल 18 वर्ष पूरे करने वाले किशोरों को मतदाता सूची से जोड़ने का अभियान चलेगा. बीजेपी में युवा मोर्चा के अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद युवाओं को जोड़ने का काम कर रही है.

कांग्रेस भी लगी है युवाओं को रिझाने में

अब बात की जाए अन्य पार्टियों की. कांग्रेस में युवाओं को जोड़ने का काम यूथ कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के जरिए जोड़े जाते हैं. राहुल गांधी भी युवा नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया जाता है. लेकिन इसमें युवाओं को रिझाने, मनाने के लिए बीजेपी जैसी रणनीति का अभाव दिख रहा है.

एसपी में युवा विंग है. अखिलेश यादव खुद युवा नेता और युवाओं को रोजगार देने के हितैषी के तौर पर खुद को प्रोजेक्ट करते हैं. इसमें समाजवादी युवजन सभा, मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड के बैनर तले युवाओं को प्रतिनिधत्व मिलता है. एसपी के कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदार दिखती है. लेकिन अखिलेश यादव युवाओं की भीड़ को वोट में कन्वर्ट कर पाएंगे या नहीं, यह बड़ा सवाल है.

मुंबई यूथ कांग्रेस के सदस्य बीएचयू में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.

बहुजन समाज पार्टी में न युवा मोर्चा है और छात्र विंग. पार्टी पारंपरिक तौर पर ही चुनावी मैदान में उतरती है. वह मानकर चलती है कि उसका वोटर उसके साथ है. हालांकि जिग्नेश मेवाणी और चंद्रशेखर जैसे दलित नेताओं का उभार बीएसपी के लिए चिंता का विषय हो सकता है. दलित युवाओं के एक बड़ा वर्ग इन नए क्षत्रपों में अपनी आवाज खोज रहा है.

सेंटर फॉर द स्‍टडी ऑफ सोसायटी एंड पॉलिटिक्‍स के निदेशक प्रोफेसर एके वर्मा कहते हैं कि 'युवा वोटर पार्टियों के लिए चुनौती नहीं अवसर हैं. यह परंपरागत मतदान व्यवहार नहीं करते. सभी युवा जानते हैं कि उनके लिए कौन कितना काम कर रहा है.'

राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया का मानना है कि 'युवा वोटर राजनीतिक दलों के लिए चुनौती और अवसर दोनों हैं. जॉब के नजरिए से वे बड़ी चुनौती हैं. लुभावने नारों की एक सीमा होती है. आंकड़े आंशिक सच होते हैं. युवाओं को लुभाने की कोशिश सबसे ज्यादा बीजेपी कर रही है. ऐसे में उम्मीद कर सकते हैं कि जॉब क्रिएशन को लेकर बजट में बड़ी घोषणा हो सकती है.'

(न्यूज18 हिंदी के लिए ओम प्रकाश की रिपोर्ट)

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