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क्या स्वाति मालीवाल को राज्यसभा भेजने का मन बना चुके हैं केजरीवाल!

कुछ वक्त पहले तक पार्टी सर्किल के भीतर इन तीन सीटों के लिए कुमार विश्वास, संजय सिंह और आशुतोष को ‘तय’ उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन अब ऐसा नहीं है

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey Updated On: Nov 25, 2017 11:26 PM IST

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क्या स्वाति मालीवाल को राज्यसभा भेजने का मन बना चुके हैं केजरीवाल!

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी (आप) ने तमाम उतार-चढ़ावों के बीच 5 साल पूरे कर लिए हैं. दिल्ली की गद्दी के साथ-साथ पार्टी पर भी अरविंद केजरीवाल की पकड़ बरकरार है. रविवार को दिल्ली में पार्टी की स्थापना के 5 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली में जब आप का मजमा जुटेगा तो हर खास-ओ-आम के मन में एक ही सवाल होगा कि अगले साल केजरीवाल किसे राज्यसभा में भेजने वाले हैं.

दिल्ली की सभी तीन राज्यसभा सीटें अगले साल जनवरी में कांग्रेस के जनार्दन द्विवेदी, कर्ण सिंह और परवेज हाशमी का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो जाएंगी. दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के प्रचंड बहुमत के चलते यह तीनों सीटें ‘आप’ के खाते में जाना तय है. सवाल है कि वह तीन ऐसे कौन लोग होंगे जिन्हें केजरीवाल 6 साल के लिए राज्यसभा में भेजने वाले हैं.

यह सवाल कुछ वक्त पहले तक इतना पेचीदा नहीं था. पार्टी सर्किल के भीतर इन तीन सीटों के लिए कुमार विश्वास, संजय सिंह और आशुतोष को ‘तय’ उम्मीदवार माना जा रहा था. लेकिन अब ऐसा नहीं है. पिछले दिनों केजरीवाल ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को राज्यसभा की सीट ऑफर की थी. हालांकि राजन ने यह ऑफर ठुकरा दिया लेकिन इससे एक बात तो कंफर्म हो गई कि इन तीन ‘तय’ दावेदारों में से किसी एक को तो केजरीवाल ने राज्यसभा में ना भेजने का फैसला कर लिया है.

इसके अलावा आप की ओर से कभी खुद केजरीवाल के राज्यसभा जाने या फिल्म अभिनेता कमल हासन को राज्यसभा भेजने की खबरें भी प्लांट कराई गईं. यानी बाकी दो दावेदारों को भी यह संकेत दिए गए कि वो भी अपनी दावेदारी को पक्का न समझें. तो फिर सवाल उठता है कि आखिरकार केजरीवाल के दिमाग में चल क्या रहा है...

Arvind Kejriwal

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निर्भर करता है कि वो किन 3 नेताओं को पार्टी के कोटे से राज्यसभा भेजते हैं

स्वाति मालीवाल हैं रेस में सबसे आगे!

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी को अपने सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जनवरी में राज्यसभा जाने की रेस में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल सबसे आगे हैं. अन्ना आंदोलन के वक्त से ही केजरावील के साथ जुड़ी स्वाति मालीवाल को आम आदमी पार्टी के भीतर काफी पावरफुल माना जाता है. केजरीवाल के पुराने सहयोगी और हरियाणा के पार्टी प्रभारी नवीन जयहिंद की पत्नी स्वाति मालीवाल को राज्यसभा भेजने पर केजरीवाल गंभीरता से विचार कर रहे हैं. पार्टी को करीब से जानने वाले लोगों को पता हैं  कि स्वाति मालीवाल का पार्टी के भीतर रुतबा कितना बड़ा है. मनीष सिसोदिया के बाद स्वाति मालीवाल ही केजरीवाल की सबसे भरोसेमंद हैं.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जब स्वाति को मुख्यमंत्री की सलाहकार नियुक्त किया गया था तब इसे लेकर काफी सवाल उठे थे. उस वक्त खुद केजरीवाल ने जोरदार तरीके से उनका बचाव किया था. फिर जब उन्हें दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त करने वाली फाइल पर तत्कालीन एलजी नजीब जंग ने दस्तखत करने में देरी की तो खुद केजरीवाल ने उन्हें कन्विंस करने की कोशिश की थी.

पार्टी से जुड़े कुछ सूत्रों ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी को बताया है कि स्वाति मालीवाल भी केजरीवाल की इच्छा को भांप चुकी हैं. इसी वजह से पिछले एक-दो महीने से वो लगातार एक्टिव हैं. पार्टी के एक नेता का कहना है कि अगर पिछले एक-डेढ़ महीने से मीडिया में पार्टी के चेहरे के तौर पर कोई दिखाई दे रहा है तो वह स्वाति मालीवाल ही हैं. दिल्ली की तमाम झुग्गी बस्तियों में वह अवैध शराब को लेकर छापे मार रही हैं, जिसे आप के सोशल मीडिया अकाउंट से जोरदार तरीके से प्रमोट किया जा रहा है.

Swati Maliwal

आप नेता और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों में एक के लिए दावेदार माना जा रहा है

हाल ही में उन्होंने दिल्ली के कंजावला इलाके में 7 साल की एक बच्ची से बलात्कार के बाद इस तरह से मामलों में रेपिस्टों के लिए फांसी की मांग की थी. इसे केजरीवाल ने खुद बिना वक्त गंवाए ट्वीट कर के इंडोर्स कर दिया.

जाहिर है आम आदमी पार्टी और खुद मुख्यमंत्री की ओर से स्वाति मालीवाल की इमेज को और बड़ा करने की कोशिश की जा रही है. इसका मतलब साफ समझा जा सकता कि लगभग दो महीने बाद होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए जो तीन ‘तय’ उम्मीदवार थे उनमें से एक की जगह स्वाति मालीवाल ले सकती हैं.

क्या फिर होगी प्रशांत भूषण की एंट्री!

यह बात आम आदमी पार्टी के साथ-साथ उसके कैडर को भी चौंका सकती है लेकिन एक दूर की  संभावना यह भी है कि केजरीवाल अपने पुराने साथी और सुप्रीम कोर्ट के धाकड़ वकील प्रशांत भूषण को राज्यसभा भेज दें. हांलांकि यह बात दूर की कौड़ी लगती है. दिल्ली में सरकार बनने के बाद प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को पार्टी से बेइज्जत कर के निकाला गया था.

इसके बाद इन दोनों ने स्वराज इंडिया के नाम से एक नया मंच भी खड़ा किया लेकिन केजरीवाल और प्रशांत भूषण एक दूसरे के ऊपर अब तक व्यक्तिगत हमले करने से बचते रहे हैं. यही नहीं, दोस्ती टूटने के बाद एक वक्त ऐसा भी आया जब इन दोनों ने साथ मिलकर काम किया. आम आदमी पार्टी में काफी अंदर तक पकड़ रखने वाले एक सूत्र ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी को बताया कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में एक बड़े मामले के दौरान प्रशांत भूषण और केजरीवाल पूरी तरह से संपर्क में थे.

नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर एक सूत्र ने तो यहां तक दावा किया किया इस मसले से जुड़े कुछ दस्तावेजों को लेकर खुद अरविंद केजरीवाल ने प्रशांत भूषण से संपर्क किया था. हांलांकि फ़र्स्टपोस्ट हिंदी स्वतंत्र तौर पर इस दावे की पुष्टि नहीं करता है. लेकिन उस वक्त जिस तरह इस मसले पर प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में और केजरीवाल ने कोर्ट के बाहर मोर्चा खोला था उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि केजरीवाल और प्रशांत भूषण के बीच बात अब भी इतनी नहीं बिगड़ी है कि वो बन न सके.

Prashant Bhushan-Kejriwal

आप से निकाले जाने के बावजूद प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल अब भी संपर्क में रहते हैं

अगर दोनों के गिले-शिकवे दूर हो गए तो प्रशांत भूषण का राज्यसभा जाना तय हो सकता है. अगर बात नही बनी तो फिर केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट के एक और बड़े वकील और अपने पुराने सहयोगी कॉलिन गोंसाल्विस को भी राज्यसभा भेजने पर विचार कर सकते हैं.

क्या होगा उन तीन 'तय' दावेदारों का!

अब सवाल उठता है कि पहले से ‘तय’ उन तीन उम्मीदवारों का क्या होगा. कुमार विश्वास तो अब केजरीवाल के ‘विश्वासपात्र’ नहीं रहे हैं. उन्हें राजस्थान का इंचार्ज बनाकर दिल्ली की राजनीति से दूर कर दिया गया है.

वहीं एक और दावेदार संजय सिंह केजरीवाल के भरोसेमंद बने हुए हैं. संजय सिह पंजाब विधानसभा में पार्टी के प्रभारी थे. पार्टी हालांकि पंजाब विधानसभा में  मुख्य विपक्षी दल के तौर पर जरूर स्थापित हो गई लेकिन नतीजे पार्टी की अपेक्षा से कमतर ही रहे थे. संजय सिंह एक बार फिर से खुद को साबित करने के मिशन पर हैं. इस बार केजरीवाल ने उन्हें यूपी के निकाय चुनाव की आजमाइश में डाला है. आम आदमी पार्टी संजय सिंह की अगुआई में यूपी में चुनाव लड़ रही है. इस चुनाव में संजय सिंह अपनी उसी टीम के साथ उतरे हुए हैं जिसके साथ वह पंजाब विधानसभा चुनाव में उतरे थे.

दुर्गेश पाठक और दिलीप पांडेय यूपी में संजय सिंह से साथ हैं. संजय सिंह की कोशिश है कि यूपी के शहरी इलाकों में आम आदमी पार्टी के वोट प्रतिशत को किसी भी तरह बढ़ाकर अपनी काबिलीयत को केजरीवाल की निगाहों में फिर से साबित किया जाए.

वहीं तीसरे ‘तय’ दावेदार आशुतोष के पास खुद को साबित करने के लिए कोई तीर नहीं है. पत्रकारिता छोड़ कर, अन्ना के कामयाब आंदोलन के बाद बनी आम आदमी पार्टी में शामिल हुए आशुतोष को 2014 में केजरीवाल के दिल्ली में ही लोकसभा का चुनाव लड़वाया था लेकिन वह नाकाम रहे.

हाल के दिनों में पार्टी और अरविंद केजरीवाल का कुमार विश्वास पर से भरोसा कम हुआ है

पिछले कुछ समय के दौरान पार्टी और अरविंद केजरीवाल का कुमार विश्वास पर भरोसा कम हुआ है

एक अलग और जनता के सरोकारों की राजनीति का दावा करने वाले नेता केजरीवाल को 5 साल पूरे हो चुके हैं. दो बार वह विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता का भरोसा जीत चुके हैं. निगाहें फिर से उन्हीं पर हैं. जनता के इस भरोसे के कायम रखते हुए क्या वह राज्यसभा की तीन सीटों पर जनता के हितों की बात करने या उनके लिए लड़ने वालों को राज्यसभा भेजेंगे या फिर बाकी पार्टियों की तरह तुष्टिकरण का रास्ता चुनेंगे.

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