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ममता-राव की मुलाकातः कहा, UPA-NDA से अलग होगा नया गठबंधन

राव ने कहा यह मोर्चा भारत के लोगों के लिए होगा, न कि कुछ राजनीतिक दलों एक मात्र गठबंधन होगा

Updated On: Mar 19, 2018 06:20 PM IST

FP Staff

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ममता-राव की मुलाकातः कहा, UPA-NDA से अलग होगा नया गठबंधन

थर्ड फ्रंड बनाने की रफ्तार धीरे-धीरे ही सही, जोर पकड़ रही है. सोमवार को तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात की.

बातचीत के बाद दोनों मीडिया के सामने आए. ममता बनर्जी ने कहा कि 'यह एक अच्छी शुरुआत है मुझे लगता है कि राजनीति एक निरंतर प्रक्रिया है, जो भी हमने चर्चा की है वह देश के विकास के उद्देश्य से है.'

उन्होंने कहा कि राजनीति आपको उन स्थितियों से अवगत कराता है जहां आपको अलग-अलग लोगों के साथ काम करना पड़ता है. और मैं राजनीति में विश्वास करती हूं.

यूपीए-एनडीए से अलग तरह का होगा हमारा गठबंधन

वहीं तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने कहा कि 'यह एक सामूहिक नेतृत्व होगा, यह एक संघीय नेतृत्व होगा. लोग 201 9 से पहले सोच रहे हैं कि एक और मोर्चा होगा. मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह मोर्चा भारत के लोगों के लिए होगा, न कि कुछ राजनीतिक दलों एक मात्र गठबंधन होगा. यह लोगों के लिए होगा. क्योंकि वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या कांग्रेस उन्हें समर्थन देगी, या फिर बाहर से समर्थन की बात होगी? तो उन्होंने कहा कि आप एक पुरानी चली आ रही राजनीतिक गठबंधन की बात कर रहे हैं, जबकि यह उससे अलग होगा.

देशभर की क्षेत्रिय पार्टियों का मिल रहा है साथ 

इससे पहले ममता बनर्जी ने उनके सुर में सुर मिलाया था. उन्होंने सीएम चंद्रशेखर राव को फोन कर कहा था कि 'हम आपसे एक मत हैं. आपके साथ रहेंगे'. यही नहीं उनके साथ झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने भी कहा था कि अगर थर्ड फ्रंट की बात होती है, तो वह उसके साथ जाना चाहेंगे. इस कड़ी में महाराष्ट्र के भी कुछ सांसद शामिल थे.

तेलंगाना के सीएम ने कहा था कि '2019 के चुनावों के लिए लोग भारत में बदलाव चाहते हैं. राष्ट्रीय राजनीति में गुणात्मक परिवर्तन की आवश्यकता है. मैं एक समान विचाराधार वाले लोगों की बात कर रहा हूं. यदि आवश्यक हो तो मैं आंदोलन का नेतृत्व करने को तैयार हूं.'

उन्होंने कहा कि 'यदि लोग नरेंद्र मोदी से गुस्‍सा हो गए तो राहुल गांधी या कोई और गांधी नया प्रधानमंत्री बन जाएगा. इससे क्‍या फर्क पड़ेगा. हमने पहले भी दशकों तक उनकी सरकार को देखा है. बीजेपी आती है तो दीनदयाल उपाध्‍याय या श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की चर्चा करती है. कांग्रेस की सत्‍ता हो तो वे राजीव गांधी और इंदिरा गांधी की चर्चा करते हैं. दोनों पार्टियां बड़बोलेपन की शिकार हैं.'

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