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बीजेपी और कांग्रेस, दोनों से रहे हैं माल्या के गहरे रिश्ते

विजय माल्या की फरारी को लेकर मोदी सरकार पर आक्रामक रही कांग्रेस अब अपने ही दांव में घिरती नजर आ रही है.

Updated On: Jan 30, 2017 11:30 PM IST

Sitesh Dwivedi

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बीजेपी और कांग्रेस, दोनों से रहे हैं माल्या के गहरे रिश्ते

एक समय 'किंग आफ गुड टाइम्स' रहे विजय माल्या की फरारी को लेकर मोदी सरकार पर आक्रामक रही कांग्रेस अब अपने ही दांव में घिरती नजर आ रही है.

माल्या की मदद को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की कथित चिट्ठियों के सामने आने के बाद अब कांग्रेस बैक फुट पर है. सोमवार को सरकार को घेरने के लिए मीडिया से मुखातिब हुए.

पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेता इन सवालों से बचने की कोशिश करते नजर आए. मनमोहन सिंह ने बीजेपी के आरोपों से पल्ला झाड़ने वाले अंदाज में कहा, 'मैंने जो किया वह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा था, जिस चिट्ठी की बात की जा रही है, वह एक सामान्य चिट्ठी थी'.

चिट्ठी ने की कांग्रेस की धार कुंद 

लेकिन इस 'सामान्य चिट्ठी' के असमय खुलासे से बजट से पहले कांग्रेस के तीखे हमले को कुंद जरूर कर दिया. ऐसे में बजट से पहले सरकार को आर्थिक मोर्चे पर घेरने की कांग्रेस की कोशिश, बचाव के प्रयास में बदल गई.

दरअसल, माल्या की फरारी को लेकर कांग्रेस के हमले की कमान खुद उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संभाल रखी थी. वे इस मामले को लेकर लगातार सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साध रहे थे.

ऐसे में जबकि, माल्या को सारे कर्जे कांग्रेस नीत सरकार के कार्यकाल में दिए गए. बीजेपी चाह कर भी राहुल के आरोपों पर कोई तीखा पलटवार नहीं कर पा रही थी. चिठ्ठियों के सामने आने के बाद अब स्थितियां बदल गई हैं.

बीजेपी इन चिट्ठियों के जरिए कांग्रेस के दामन को एक बार फिर दागदार साबित करेगी, इसकी गूंज विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में भी सुनाई देगी.

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तस्वीर: पीटीआई

विजय माल्या फिलहाल फरार चल रहे हैं. उनके फरार होने के साथ ही देश के शीर्ष राजनीतिक दलों में माल्या को मदद देने के नाम पर जबानी जंग शुरू हो गयी थी.

कांग्रेस ने बीजेपी पर माल्या को देश से भागने में मदद देने का आरोप लगाया. जवाब में बीजेपी ने कांग्रेस पर सबूतों के जरिए हमला बोला. बीजेपी ने चार चिट्ठियों के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को निशाने पर लिया.

बीजेपी के मुताबिक तत्कालीन किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या उस समय प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह से मिले थे. बाद में पीएम की सलाह पर माल्या उनके सलाहकार टी. के. ए. नायर से मिले.

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बीजेपी के मुताबिक मनमोहन सिंह ने माल्या की मदद के लिए संबंधित मंत्रालयों से खुद बात की थी. बीजेपी के आरोपों के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा माल्या का एकाउंट फ्रीज होने के बाद मनमोहन सिंह के दबाव में एकाउंट अनफ्रीज हुआ.

जबकि, विजय माल्या ने तीसरी चिट्ठी पी. चिदंबरम को 21 मार्च 2013 को लिखी, इस चिट्ठी में माल्या ने चिदंबरम से स्टेट बैंक से किंगफिशर एयरलाइन को दिए कर्ज पर थोड़ी नरमी की मांग की थी.

जिसके बाद एसबीआई बेंगलुरु किंगफिशर एयरलाइन को प्रेफरेंशल अलॉटमेंट के लिए एनओसी जारी करने पर राजी हो गया. जाहिर है बजट से ऐन पहले और चुनावी मौसम में यह जानकारी कांग्रेस को असहज करने के लिए काफी है.

2002 में माल्या ने की थी राजनीति में एंट्री 

राष्ट्रीय राजनीति में विजय माल्‍या ने पहली एंट्री 2002 में बतौर राज्य सभा सांसद के तौर पर की. इस दौरान माल्या बेहद खास समितियों के सदस्य रहे. उनके उद्योग समिति में रहने के दौरान कई सवाल उठे लेकिन पक्ष या विपक्ष किसी ने इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई.

2004 में उद्योग समिति में रहे माल्या ने 2005 में खुद की एयरलाइंस शुरू की. यह भारत में पहली एयरलाइन थी जिसने सभी नए विमानों के साथ काम शुरू किया था. किंगफिशर एयरलाइंस, एयरबस ए380 खरीदने वाली भारत की पहली एयरलाइन थी.

इस एयरलाइन में कांग्रेस के एक कैबिनेट मंत्री के पैसे लगे होने की बात जब तब उठती रही है. हालांकि, उनकी असमय मृत्यु के बाद यह सुगबुगाहट अचानक यह बंद हो गई.

माल्या ने 2010 में बतौर निर्दलीय राज्यसभा चुनाव लड़ा और जीते. 2010 में कर्नाटक में बीजेपी की सरकार थी. यह माल्या का करिश्मा ही था कि, उन्होंने बीजेपी की उम्मीदवार तारादेवी सिद्धार्थ को 46 वोटों से हरा दिया.

बीजेपी भी पिछले एक साल से यूपी में अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगी है

जाहिर है, माल्या के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक साथ हो लिए थे. दोस्तों ने दलों को तोड़ कर उनकी मदद की. हालांकि, दिल्ली में वे सत्तारूढ़ कांग्रेस के करीबी बनते चले गए.

यूपीए-1 के दौरान दो केंद्रीय मंत्रियों से व्यापारिक रिश्तों को लेकर भी उन पर सवाल उठे. लेकिन हर मुद्दे पर यूपीए के विरुद्ध को आतुर बीजेपी ने खामोशी ओढ़े रखना बेहतर समझा.

यहां तक उस दौरान बजट के ऐन पहले दिल्ली में उनकी सक्रियता को लेकर भी नौकरशाहों के बीच होने वाली सुगबुगाहट भी कभी मीडिया सुर्खी नहीं सकी.

इसी तरह माल्या के जेट को चुनावों व निजी इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच कभी कोई वाद विवाद नहीं हुआ. इस दौरान विजय माल्या के शरद पवार सहित कई बड़े नेताओं और मीडिया घरानों से नजदीकी रिश्ते की बात सामने आई.

इसी समय माल्या को बड़े कर्जे दिए गए. 2004 में माल्या को दिए कर्ज का 2008 में नवीनीकरण कर दिया गया. इसके बाद एक बार फिर 20 दिसंबर 2010 में उनके लोन का नवीनीकरण किया गया.

इस समय तक विजय माल्या को बैंको द्वारा दी गई रकम बढ़ कर 9900 करोड़ रुपए के करीब हो गई थी. जबकि, सरकार को पता था कि विजय माल्या की कंपनी की हालत खस्ता है.

कांग्रेस ने की थी मदद, बीजेपी रही चुप

फिर भी सरकार उन्हें आगे बढ़कर मदद कर रही थी, उस समय विपक्ष में रही बीजेपी ने भी रहस्यमय खामोशी ओढ़ ली थी. उसके तमाम नेता माल्या के जेट पर और उनकी पार्टियों में देखे जाते थे. इस बीच देश के कई बैंकों को खोखला कर रहे माल्या अचानक देश के गौरव की रक्षा करने वाले बन गए थे.

2004 में एक नीलामी में माल्या ने टीपू सुलतान की तलवार को लंदन में सफलतापूर्वक बोली लगाकर हासिल किया और इसे भारत लाए. मार्च 2009 में गांधी जी से संबंधित वस्तुओं को माडिसन एवेन्यू की नीलामी से 11 करोड़ की बोली लगाकर वापस लाए माल्या ने इसे भारत की प्रतिष्ठा से जोड़ा.

देश को अरबों का चूना लगा रहे माल्या पर खामोशी अख्तियार किए मीडिया ने इन प्रयासों को खूब प्रचारित किया था.

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हालांकि, माल्या के व्यापारिक शिखर से ढलते ही स्थितियां बदल गई. इस समय माल्या के खिलाफ 25 मामले दर्ज हैं. सरकार उन्हें वापस लाने के प्रयासों में लगी हुई है. जबकि कांग्रेस और बीजेपी इस मुद्दे पर गुत्थमगुत्था हैं. बेहद कम समय में सफलता के शिखर पर पहुचे माल्या की कहानी 'नाटकीयता और रूमानियत' से भरी है.

उनके दोस्त पार्टी, देश और उम्र व क्षेत्र की परिधि से बाहर थे. वे संसद आते थे तो अलग-अलग पार्टियों के दर्जन भर संसद सदस्य उनके आस-पास होते थे.

'समरथ को नहीं दोष'

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उनकी गाड़ियां, एयरलाइंस और विदेशों व देश भर में फैले बंगले उनके दोस्तों के लिए हमेशा प्रतीक्षा में रहते. उनकी पार्टियां देश के राजनीतिक चेहरों, क्रिकेट, हॉकी, फार्मूला वन रेसर्स से लेकर हॉलीबुड और बॉलीबुड के खूबसूरत चेहरों का संगम सरीखी होती.

तकरीबन 17 बैंकों के 7800 करोड़ कर्ज के बोझ तले दबे माल्या फिलहाल देश से फरार चल रहे हैं. लेकिन कहते हैं 'समरथ को नहीं दोष' सो माल्या कानून से दूर हैं, शानों शौकत और रंगीनियों से नहीं.

वे अपने करीबी दोस्त ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स के देश में अपने आलीशान बंगले में रह रहे हैं. लंदन के निकट हर्डफोर्डशायर के तिवेन गांव में 30 एकड़ में फैला यह बंगला ब्रिटेन के सबसे बड़े घरों में से एक है. 2008 में माल्या ने इसे फॉर्मूला-वन रेस के चैंपियन लुईस हैमिल्टन से खरीदा था.

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लंदन में अपनी इस आरामगाह में बैठे माल्या का साम्राज्य दुनियाभर में फैला है. उनके पास अमेरिका के कैलिफोर्निया में 11 हजार वर्गफीट का घर है. फ्रांस में ग्रैंड जैर्डिन नाम का घर है. द. अफ्रीका के जोहानसबर्ग में माल्या के पास करीब 25 हजार एकड में फैला मबूला गेम लॉज है.

माल्या के पास मोंटे कार्लो नाम का एक द्वीप भी है, जिसे 11 करोड़ डॉलर में खरीदा गया था. उनके पास इंडियन एम्प्रेस नाम का प्राइवेट याट है.

जबकि, वे 260 से ज्यादा रोल्स रॉयस, पोर्शे, मर्सिडीज, फरारी जैसी करों के मालिक भी हैं. माल्या के पास बेंगलुरु में कुनिगल स्टड फार्म है, जो 250 साल से भी पुराना है.

इस फार्म में देशी-विदेशी नस्ल के 200 घोड़े हैं. घोड़ों की रेस के शौकीन माल्या देश-विदेश में होने वाली रेस ऑर्गनाइज कराते रहे हैं.

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