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सिग्नेचर ब्रिज संग्राम: हंगामा खड़ा करना मकसद था मनोज तिवारी का?

सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन विवादों की कई शक्लों के साथ सामने है. सिग्नेचर ब्रिज पर छिड़े संग्राम को लेकर दो वीडियो सामने आए हैं

Updated On: Nov 05, 2018 08:48 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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सिग्नेचर ब्रिज संग्राम: हंगामा खड़ा करना मकसद था मनोज तिवारी का?
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उत्तर-पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली को जोड़ने के लिए सिग्नेचर ब्रिज बनकर तैयार हो गया. लेकिन यही पुल अब टकराव के चलते आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच अखाड़ा भी बन गया है. दोनों के बीच क्रेडिट की होड़ से शुरू हुई जंग अब पुलिस थाने पहुंच चुकी है. दरअसल, सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन विवादों की कई शक्लों के साथ सामने है. सिग्नेचर ब्रिज पर छिड़े संग्राम को लेकर दो वीडियो सामने आए हैं.

एक वायरल वीडियो में उद्घाटन के मौके पर स्टेज पर खड़े दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी को आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतउल्लाह खान धक्का दे रहे हैं. अमानतउल्लाह खान के धक्के से मनोज तिवारी किसी तरह संभलते हैं और स्टेज से नीचे गिरने से बच जाते हैं. इसके बाद उनके और अमानतउल्लाह के बीच कहासुनी होती है. जबकि दूसरे वीडियो में मनोज तिवारी और दिल्ली पुलिस के बीच दंगल दिखाई दे रहा है. धक्कामुक्की के बीच मनोज तिवारी दिल्ली पुलिस के किसी अधिकारी पर हाथ उठाते दिख रहे हैं.

सवाल उठता है कि आखिर दिल्ली पुलिस के किसी जवान या अधिकारी पर हाथ उठाकर मनोज तिवारी कौन सा रौब दिखाना चाहते हैं? सार्वजनिक जीवन में आने के बावजूद वो सरेआम ये धमकी दे रहे हैं कि उन्होंने पुलिसकर्मियों को पहचान लिया है और चार दिनों में ही कार्रवाई में सबको पता चल जाएगा. क्या दिल्ली पुलिस की लगाम मनोज तिवारी के हाथ में है, जो वो खुद दिल्ली पुलिस के उन पुलिसकर्मियों को सबक सिखाने की धमकी दे रहे हैं? आखिर क्या वजह है कि दिल्ली पुलिस मनोज तिवारी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से चुप हैं?

मनोज तिवारी के लिए राजनीतिक गलियारों में एक सुगबुगाहट सुनाई देती है. उनके अध्यक्ष बनने के बाद उनके राजनीतिक विरोधियों की तादाद ज्यादा बढ़ी है. कभी दिल्ली में बीजेपी के पुराने नेताओं के साथ उनके संबंधों को लेकर भी सवाल उठे. अब सिग्नेचर ब्रिज के मामले में हंगामा खड़ा कर आखिर मनोज तिवारी दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष की कौन सी तस्वीर पेश करना चाहते हैं? दिल्ली पुलिस के साथ उनकी झूमा-झटकी में किसी युवा मोर्चा के छात्र नेता की स्टाइल दिखाई देती है.

सवाल उठता है कि क्या स्टेज पर मनोज तिवारी के पहुंच जाने से सिग्नेचर ब्रिज को लेकर क्रेडिट का 50-50 हो जाता?

एक तरफ मनोज ये कह रहे हैं कि उन्हें इलाके का सांसद होने के बावजूद न्योता नहीं दिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि फिर वो बिना बुलावे के ही जलसे में जाने के लिए इतने बेचैन क्यों हो गए? जबकि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सार्वजनिक रूप से न्योता दिया था. ऐसे में आम आदमी पार्टी भी कठघरे में खड़ी होती है. मनोज तिवारी को न्योता देने के बावजूद उन्हें स्टेज पर खड़े रहने को मजबूर क्यों किया गया? मनोज तिवारी को मंच पर जगह क्यों नहीं दी गई?  अमानतउल्लाह खान ने किसके इशारे पर मनोज तिवारी को धक्का दिया? इससे पहले मनोज तिवारी को रास्ते में क्यों रोका गया?

Manoj Tiwari

दरअसल, मनोज तिवारी उद्घाटन में शामिल होने के लिए भजनपुरा की तरफ से पुल पर चढ़ने जा रहे थे लेकिन उन्हें दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने रोक लिया. जिसके बाद हंगामा बढ़ता ही चला गया. दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर के मुताबिक आयोजक ही नहीं चाहते थे कि मनोज तिवारी समारोह में शामिल हों. ऐसे में साफ है कि सिग्नेचर ब्रिज के क्रेडिट को लेकर आम आदमी पार्टी भी इतना असुरक्षित महसूस कर रही थी कि वो किसी ‘बीजेपी वाले’ को मंच साझा करते नहीं देखना चाहती थी.

श्रेय को लेकर इसी असुरक्षा की भावना के चलते ही दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित को भी न्यौता नहीं दिया गया जबकि उनके ही कार्यकाल में साल 2004 में सिग्नेचर ब्रिज की योजना पर काम शुरू हुआ.

सिग्नेचर ब्रिज के जरिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार विकास का सेहरा अपने सिर बांध रही है तो इसके पीछे आधार भी बता रही है. सिग्नेचर ब्रिज को साकार करने के लिए दिल्ली सरकार ने रास्ते में आई तमाम रुकावटों और बाधाओं को दूर कर 8 साल देरी से चल रहे प्रोजेक्ट को पूरा किया. सिग्नेचर ब्रिज के प्रोजेक्ट को साल 2010 में ही पूरा हो जाना चाहिए था. लेकिन तय सीमा के 8 साल बाद सीएम केजरीवाल ने यमुना ब्रिज पर बने इस पुल का उद्घाटन किया.

दिल्ली में मेट्रो की नींव एनडीए सरकार के वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी. लेकिन दिल्ली की मेट्रो का सेहरा तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सिर सजा. ऐसे में केजरीवाल सरकार को भी ये सियासी अधिकार है कि वो सिग्नेचर ब्रिज की कामयाबी को लेकर अपनी तारीफों के पुल बांध सकती है.

बहरहाल, विवादों के बीच दिल्ली की शान बढ़ाने में सिग्नेचर ब्रिज के नाम से एक नया मुकाम भी जुड़ गया. दिल्ली सरकार का दावा है कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने आगरा जाएंगे तो सिग्नेचर ब्रिज देखने दिल्ली भी जरूर आएंगे.

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