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शिवसेना के नए 'सैंडलवीर' बन चुके हैं रवींद्र गायकवाड़

रवींद्र की हरकत उनकी पार्टी के पुराने इतिहास से मेल खाती हैं.

Arun Tiwari Arun Tiwari Updated On: Mar 23, 2017 09:42 PM IST

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शिवसेना के नए 'सैंडलवीर' बन चुके हैं रवींद्र गायकवाड़

एयर इंडिया की फ्लाइट में स्टाफ को औरंगाबाद के सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने चप्पल से पीट दिया. ये खबर आते ही सभी चैनलों में ब्रेकिंग शुरू हो गई 'शिवसेना सांसद ने एयर स्टाफ को चप्पलों से पीटा'. कमाल की बात है थोड़ी ही देर बाद रवींद्र गायकवाड़ की बाइट भी चनलों पर दौड़ने लगी. रवींद्र बेहद हास्यास्पद तर्क के जरिए अपनी हरकत छिपाने की कोशिश कर रहे थे. रवींद्र ने कहा कि हां, मैने एयर स्टाफ को मारा तो है लेकिन चप्पल से नहीं बल्कि सैंडल से.

अब रवींद्र गायकवाड़ को ये समझा पाना मुश्किल है कि अव्यवस्था की वजह से किसी को पीट देना जुर्म है. इससे फर्क नहीं पड़ता कि रवींद्र ने चप्पल चलाया या सैंडल. हालांकि रवींद्र की बाइट के दौरान ये महसूस नहीं हुआ कि उन्हें अपनी हरकत का कोई दुख भी है.

फिर मैं ये सोचने लगा कि आखिर ये सांसद ऐसा व्यवहार कर रहा है तो ध्यान गया कि रवींद्र तो शिवसेना के सांसद हैं. ध्यान में दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान में खोदी गई पिच से लेकर दक्षिण और उत्तर भारतीयों को मुंबई में पीटे जाने के कई ऐसे प्रकरण एक बारगी दिमाग में घूम गए.

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दरअसल शिव सेना का इतिहास जूतमपैजार से भरा हुआ है. हिंसा के न जाने कितने आरोप शिव सेना के नेताओं पर लगे होंगे. इतना ही नहीं शिवसेना से टूट कर बनी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने तो अपने आगाज के साथ ही मुंबई की सड़कों पर उधम मचाना शुरू कर दिया था. रेहड़ी-पटरी वाले लोगों के साथ मारपीट की घटनाओं को मराठा अस्मिता से जोड़कर देखना ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का सर्वोपरि कर्तव्य बन गया था.

समय को थोड़ा और रिवाइंड कीजिए तो बालासाहब ठाकरे द्वारा दक्षिण भारतीयों के खिलाफ चलाया गया उग्र आंदोलन तो बिल्कुल भूल सकने के काबिल नहीं है. मतलब सिर्फ रवींद्र गायकवाड़ ही नहीं उनकी पार्टी के इतिहास की तरफ भी जैसे ही पीछे जाएंगे तो आपको सिर्फ मार-धाड़ से भरपूर हिंदी फिल्मों के सीन ही याद आएंगे.

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कहने का मतलब ये है कि रवींद्र गायकवाड़ द्वारा एयर स्टाफ की पिटाई करना अफसोसजनक तो है लेकिन शिवसेना का इतिहास देखा जाए तो ये बहुत आश्चर्यजनक नहीं लगता. जब शिवसेना के कार्यकर्ता सड़क पर चलते गैर प्रांतीय लोगों को बिना वजह पीट सकते हैं तो उनके सांसद से दूसरी उम्मीद ही क्या की जा सकती है. पिटाई के बाद जिस ढिठाई के साथ चप्पल की बजाए सैंडल से पीटने की बात की वो भी शिवसेना परंपर का ही हिस्सा है.

इस भारत देश में शायद ही किसी को याद हो कि शिवसैनिकों ने अपनी हरकतों पर कभी क्षमा मांगने जैसा काम किया हो. इसलिए रवींद्र कुछ और नहीं कर रहे हैं बस अपनी पार्टी के मार-धाड़ के गौरवमयी इतिहास में चार चांद लगा रहे हैं. उनसे समझदारी की उम्मीद करना बेमानी है.

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