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यूपी चुनाव 2017: उत्तर प्रदेश में विनय कटियार ने फिर छेड़ा 'राम' राग

राजनीतिक दलों की सोच व व्यवहार आज भी धर्म व जाति के कटघरों में कैद है

Updated On: Feb 07, 2017 11:36 AM IST

Suresh Bafna
वरिष्ठ पत्रकार

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यूपी चुनाव 2017: उत्तर प्रदेश में विनय कटियार ने फिर छेड़ा 'राम' राग
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकास-आधारित चुनावी रणनीति के विपरीत भाजपा के राज्यसभा सांसद विनय कटियार ने घोषणा की है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा भाजपा का बुनियादी मुद्दा है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है.

कटियार ने कहा कि राम मंदिर का मामला जोर-शोर से उठाएंगे, और इसका कानून के अनुसार समाधान करेंगे. जरूरत पड़ी तो आगे भी कदम उठाएंगे. उनका दावा है कि 30 साल पहले इस मुद्दे को मैंने उठाया था, जिससे भाजपा के जनाधार में कई गुना बढ़ोतरी हुई थी.

भाजपा का चुनावी इतिहास यह रहा है कि जब भी उस पर संकट के बाद मंडराने लगते हैं, वह राम मंदिर की शरण में जाने लगती है. 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने विकास व मनमोहन सरकार के भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाकर विजय प्राप्त कर यह संकेत दिया था कि भाजपा मंदिर-आधारित राजनीति से मुक्त होकर नई दिशा में आगे बढ़ रही है.

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भाजपा के कई वरिष्ठ नेता कई बार यह बात दोहराते रहे हैं कि राम मंदिर का मुद्दा हिन्दुअों की आस्था से जुड़ा सवाल है, यह हमारे लिए चुनावी मुद्दा नहीं है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने के बाद भाजपा की राजनीतिक परेशानी बढ़ती हुई दिखाई दे रही है.

Hathras: BJP National President Amit Shah addressing a public meeting in Hathras on Saturday. PTI Photo (PTI2_4_2017_000193B)

बीजेपी अध्यक्ष विनय कटियार ने राम मंदिर से जुड़े कटियार के बयान को नजरअंदाज किया है

शाह की चुप्पी

विनय कटियार के राम मंदिर संबधी बयान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वे भी राम मंदिर निर्माण को चुनावी मुद्दा बनाने की इस कोशिश का समर्थन कर रहे हैं.

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने निर्णय दिया था कि चुनाव में धर्म या जाति के आधार पर मतदाताअों से समर्थन पाने की अपील करना संविधान की भावना के विपरीत है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की खुलेआम अवहेलना की जा रही है. बसपा नेता मायावती खुलेआम मुस्लिम मतदाताअों से समर्थन पाने की कोशिश कर रही है.

भाजपा के नेता अब राम मंदिर के निर्माण को चुनावी मुद्दा बनाकर हिन्दुअों के वोट पाना चाहते हैं. वही सपा-कांग्रेस गठबंधन की भी कोशिश है कि मुसलमानों के सभी वोट उसकी झोली में गिर जाए.

मुस्लिम मतदाताअों के एकमुश्त वोट पाने की इस दौड़ का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा उछालकर हिन्दुअों के वोट एकजुट करने का अभियान शुरु कर दिया है.

ram mandir

ऐसा माना जा रहा है कि कटियार मोदी से नाराज होने के कारण मंदिर का मुद्दा उठा रहे हैं

मोदी को नुकसान

भाजपा के भीतर कुछ नेता यह भी मानते हैं कि मोदी को नुकसान पहुंचाने के लिए विनय कटियार ने राम मंदिर का राग छेड़ा है. कटियार की इस कोशिश में वे मोदी-विरोध देख रहे हैं.

यह ऐतिहासिक सत्य है कि राम मंदिर निर्माण के मुद्दे ने भाजपा को सत्ता के शिखर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन आज की वास्तविकता यह भी है कि 1992 के बाद 24 सालों के दौरान गंगा-जमुना में काफी पानी बह चुका है.

देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी सामाजिक स्तर पर कई बदलाव हो चुके हैं.

यह कहना गलत नहीं होगा कि देश के लगभग सभी राजनीतिक दल जनता के स्तर पर होनेवाले बदलावों को आत्मसात कर पाने में विफल रहे हैं. जनता की सोच राजनीतिक दलों की सोच से आगे निकल गई है.

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देश की आम जनता में राजनीतिक के स्तर पर धर्म व जाति का असर तेजी के साथ कम हुआ, लेकिन राजनीतिक दलों की सोच व व्यवहार आज भी धर्म व जाति के कटघरों में कैद है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने गर्वनेंस के माध्यम से देश की राजनीति को इन कटघरों से मुक्त करने की एक हद तक कोशिश की है, लेकिन चुनाव जीतने के पुराने नुस्खों को छोड़ने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं.

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