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माल्या का भूत फिर कांग्रेस को डराने लौट आया है

माल्या को यूपीए सरकार में दी गई मदद एक बड़ा राजनैतिक मुद्दा बन गया है.

Updated On: Jan 31, 2017 04:57 PM IST

Sanjay Singh

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माल्या का भूत फिर कांग्रेस को डराने लौट आया है

उद्योगपति विजय माल्या भले ही दस महीने पहले देश छोड़कर भाग गए हों, मगर उनका भूत, कांग्रेस को डराने भारत आ गया है. माल्या के भूत ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को नई परेशानी में डाल दिया है.

किंगफिशर घोटाले की जांच में कई नए सबूत सामने आए हैं. इनमें विजय माल्या की मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम को लिखी चिट्ठियां भी शामिल हैं. इसके अलावा माल्या और उनके यूबी ग्रुप के बड़े अधिकारियों के बीच ई-मेल पर हुई बातचीत भी सामने आई है.

ये ई-मेल 2010 से 2013 के बीच के हैं. इनमें विजय माल्या ने अधिकारियों को बताया है कि कैसे उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी सरकार के मंत्रियों ने उनकी मदद की. किस तरह से पीएम रहते हुए मनमोहन सिंह और उनके कुछ मंत्रियों ने विजय माल्या को कर्ज देने को लेकर बैंकों के ऐतराज खारिज कर दिए, और माल्या को कर्ज दिलाया.

ये सबूत सामने आने के कुछ घंटों के भीतर मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम ने एक साझा प्रेस कांफ्रेंस की. हालांकि ये प्रेस कांफ्रेंस पहले से तय थी. और इसका मकसद मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था के बुरे हाल की पोल खोलना था. लेकिन दोनों ही नेताओं ने न तो इन चिट्ठियों की सच्चाई को नकारा और न ही इसमें हुई बातचीत से इनकार किया.

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इन चिट्ठियों और ई-मेल से जो जानकारियां सामने आई हैं, उनसे पता चला है कि मनमोहन सरकार, विजय माल्या को किस तरह मदद कर रही थी. हालांकि मनमोहन और चिदंबरम ने इन सबूतों को औसत दर्जे का दस्तावेज करार देते हुए कहा कि उन्होंने माल्या की मदद करने में कोई भी नियम-कानून नहीं तोड़ा.

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एक तकनीकी मसले की आड़ में खुद को बचाने की मनमोहन और चिदंबरम की कोशिश बेहद कमजोर थी. इसके मुकाबले वो सबूत जो उनके खिलाफ सामने आए हैं, वो जाहिर करते हैं कि किंगफिशर को मुसीबत से उबारने में किस तरह से मनमोहन सरकार ने नैतिकता को परे रख दिया था.

स्टेट बैंक, इसके सहयोगी बैंक और आईडीबीआई ने माल्या को कर्ज देने का कड़ा विरोध किया था. मगर यूपीए सरकार के दौरान माल्या को खूब तरजीह दी गई. ये बात अब पूरी तरह से सामने आ गई है. इसके बावजूद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरे कांग्रेसी नेता मोदी सरकार पर आलोप लगा रहे हैं कि उन्होंने विजय माल्या को देश से भागने में मदद की. इस मुद्दे पर कांग्रेस और दूसरे दलों ने संसद में भी खूब हंगामा किया था.

विजय माल्या मार्च 2016 में देश छोड़कर भाग निकले थे. जब वो देश से भागे उस वक्त माल्या पर 9 हजार करोड़ का कर्ज था.

माल्या की चिट्ठियों और ई-मेल्स की खबर सीएनएन-न्यूज 18 ने ब्रेक की थी. इससे माल्या के विदेश भागने का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले माल्या को यूपीए सरकार में दी गई मदद एक बड़ा राजनैतिक मुद्दा बन गया है.

बीजेपी ने इस मुद्दे को फौरन लपक लिया. एक प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जो खुद डूबता जहाज थी उसने एक डूबती एयरलाइन यानी किंगफिशर को बचाया. सीएनएन-न्यूज 18 और टाइम्स नाऊ के ये सबूत जनता के सामने रखने के बाद बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा कुछ और दस्तावेजों के साथ मीडिया से रूबरू हुए और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला.

VIJAY MALLYA

पात्रा के आरोपों और तेवर से साफ है कि बीजेपी, विजय माल्या के मुद्दे को विधानसभा चुनाव में जमकर भुनाएगी. ताकि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर फिर से कांग्रेस को घेरा जा सके.

कुछ दिनों पहले ही आईडीबीआई के पूर्व चेयरमैन योगेश अग्रवाल के साथ आईडीबीआई के चार और पूर्व अधिकारियों को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था. इनमें आईडीबीआई के पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बी के बत्रा भी शामिल थे. इन पर आरोप है कि बैंक की अपनी रिपोर्ट में कर्ज न देने की सिफारिश के बावजूद इन अधिकारियों ने विजय माल्या को करोड़ों रुपए का कर्ज दिया. आईडीबीआई का अपना आकलन था कि माल्या के पास कर्ज चुकाने की ताकत नहीं. इन पूर्व बैंक अधिकारियों को ये भी पता था कि माल्या ने कर्ज के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं जमा किये हैं.

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बीजेपी प्रवक्ता पात्रा ने आरोप लगाया कि ये साफ है कि जनता के पैसे से ठगी की गई. पात्रा ने आरोप लगाया कि आम आदमी को कर्ज लेने के लिए तमाम तरह के दस्तावेज देने पड़ते हैं. मगर करोड़ों रुपए का कर्ज माल्या को बिना जरूरी दस्तावेजों के बांट दिया गया. जबकि इससे पहले ही माल्या की कंपनियां नॉन पर्फॉर्मिंग एसेट्स घोषित हो चुकी थीं. इसके बावजूद दिसंबर 2010 में उनके कर्ज की शर्तों को नए सिरे से तय किया गया. जबकि तब तक माल्या ने उस वक्त लिए हुए कर्ज का दसवां हिस्सा भी नहीं वापस किया था.

संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचारी लोगों ने माल्या की मदद की, क्योंकि ये काम बैंक अकेले नहीं कर सकते थे. पात्रा ने पूछा कि ये भगवान के वो हाथ नहीं थे, जो राहुल गांधी को तस्वीरों में दिखते हैं. बल्कि ये हाथ उस वक्त के पीएम मनमोहन सिंह और उस वक्त के वित्त मंत्री पी चिदंबरम के थे.

अपनी प्रेस कांफ्रेंस में पात्रा ने 4 अक्टूबर 2011 को पीएम मनमोहन सिंह को लिखी गई विजय माल्या की चिट्ठी पढ़कर सुनाई, जिसमें लिखा था, 'किंगफिशर एयरलाइन जो दिक्कतें झेल रही है उन्हें बताने के लिए मुझे आपने सितंबर में जो मिलने का वक्त दिया, उसके लिए शुक्रिया. मैंने आपको ये भी बताया था कि हमने कर्ज देने वाले बैंकों से भी संपर्क किया है. इसमें स्टेट बैंक भी शामिल है. हमने बैंकों से तुरंत और कर्ज देने की अपील की है. आपने कहा था कि मैं इस मसले पर आगे श्री टीकेए नायर से बात करूं. मैंने ऐसा ही किया था. मैं शुक्रगुजार हूं कि श्रीमान नायर ने मंत्रालय में उन अधिकारियों से फौरन बात की, जो इस मामले को देख रहे थे'.

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. फोटो: गेटी

22 नवंबर 2011 को लिखी दूसरी चिट्ठी में माल्या ने फिर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उन पर 'कृपा करने' की अपील की. विजय माल्या ने मनमोहन सिंह को लिखी चिट्ठियों की कॉपी उनके सलाहकार और मुख्य सचिव टीकेए नायर, और पुलक चटर्जी को भी भेजी थी.

पात्रा ने मनमोहन सिंह के सलाहकार संजय बारू की किताब, 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के हवाले से बताया कि, 'पुलक चटर्जी ये सभी फाइलें लेकर 10 जनपथ जाया करते थे. कई बार तो पीएम मनमोहन सिंह भी ये फाइलें नहीं देख पाए होते थे, तब भी पुलक चटर्जी उसे लेकर दस जनपथ चले जाते थे'. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि विजय माल्या, यूपीए सरकार की बेहद खराब विरासत के तौर पर एनडीए सरकार को मिले हैं.

नवंबर 2011 में एक विदेश यात्रा से लौटने वक्त विमान में मीडिया से बात करते हुए उस वक्त के पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि, 'मुसीबतजदा निजी एयरलाइंस का प्रबंधन सही तरीके से करना होगा. हमें उनकी मदद के तरीके खोजने होंगे, ताकि वो अपने घाटे से उबर सकें. लेकिन मैंने किंगफिशर एयरलाइन की दिक्कतों पर ध्यान नहीं दिया है. जब मैं स्वदेश पहुंचूंगा तो मैं नागरिक उड्डयन मंत्री व्यालार रवि से बात करूंगा. ताकि हम ये पता लगा सकें कि हम किन एयरलाइन्स की मदद कर सकते हैं.'

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विजय माल्या से जुड़ा जो सबसे तगड़ा सबूत है वो है माल्या की 21 मार्च 2013 को उस वक्त के वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लिखी गई चिट्ठी है. इसमें चिदंबरम से तुरंत दखल देकर स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों को निर्देश देने की अपील विजय माल्या ने की थी.

माल्या ने कहा था कि चिदंबरम इन बैंकों को कहें कि वो उन्हें फौरन नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी करें, ताकि वो पूंजी जुटाने के लिए प्रेफरेंशियल शेयर जारी कर सकें. इसके अगले ही दिन माल्या ने अपने सीएफओ को एक मेल लिखा था, जिसमें वित्त मंत्री चिदंबरम से मुलाकात को 'पॉजिटिव कदम' बताया था. वित्त मंत्री के तौर पर चिदंबरम की फटकार के बाद स्टेट बैंक बैंगलोर ने माल्या को एनओसी जारी कर दी थी.

माल्या ने अपने मेल में लिखा था, 'वित्त मंत्री और एसजीपी से मेरी मुलाकात के बाद कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं. एसबीआई बैंगलोर ने यूएसएल को एनओसी जारी करने की इच्छा जताई है, ताकि हम प्रेफरेंशियल शेयर जारी कर सकें. उम्मीद है कि एसबीआई को भी इस बात का निर्देश मिला होगा कि वो हमसे मिलकर इस बारे में बात करें. आप एसबीआई चेयरमैन के दफ्तर से संपर्क करें और श्यामल के दफ्तर को भी ई-मेल और फोन करें. इसमें आप दोनों के साथ 25 मार्च यानी सोमवार को मीटिंग करना तय करें.'

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सीएनएन-न्यूज 18 के एक सीधे सवाल के जवाब में मनमोहन सिंह ने कहा कि, 'सभी सरकारों में प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों से कारोबारी और उद्योगपति मदद की अपील करते हैं. ये आम बात है कि ऐसी अपील हम अधिकारियों को सौंप देते हैं. मैंने जो किया उससे मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं. हमने कोई कानून तोड़ने वाला काम नहीं किया. ये चिट्ठी जिसकी चर्चा हो रही है वो बेहद आम सा दस्तावेज है.'

इसके बाद मनमोहन सिंह ने माइक, पी चिदंबरम को दे दिया. पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि, 'सरकार, खास तौर से प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के दफ्तर को रोज ऐसी सैकड़ों चिट्ठियां मिलती हैं. ऐसी चिट्ठियां संबंधित विभागों को भेज दी जाती हैं, और विभागों को आगे कार्रवाई का निर्देश दिया जाता है. अगर कोई आदमी किसी नीति में बदलाव की मांग की चिट्ठी पीएम को भेजता है, प्रधान सचिव को भेजता है. दूसरे मंत्रालयों को भेजता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं'.

मार्च 2013 में उनको लिखी गई चिट्ठी के बचाव में चिदंबरम ने कहा कि माल्या को दिए गए कर्ज की जांच 2009 से चल रही थी. उस वक्त तो वो वित्त मंत्री भी नहीं थे. और उस चिट्ठी में किंगफिशर नहीं, यूनाइटेड ब्र्यूअरीज ग्रुप की बात हो रही थी. फिर ये चिट्ठी कर्ज के लिए नहीं थी. ये तो एनओसी जारी करने के लिए मदद मांगने की अपील थी.

बीजेपी के आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने जवाबी सवाल किए और अपने ऊपर लगे सवालों के जवाब नहीं दिए. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सरकार ने विजय माल्या को क्यों देश से भागने दिया? सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि 2010 में विजय माल्या को सांसद बनने में किसने मदद की?

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