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उपराष्ट्रपति चुनाव 2017: छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं वेंकैया नायडू

एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के नाम की घोषणा की है

FP Staff Updated On: Jul 17, 2017 09:07 PM IST

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उपराष्ट्रपति चुनाव 2017: छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं वेंकैया नायडू

जैसा कि पहले से अनुमान लगाया जा रहा था एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के नाम की घोषणा की है. संसद के दोनों सदनों को मिलाकर एनडीए की संख्या को देखते हुए उनका चुना जाना तय माना जा रहा है. उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष ने महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी को उतारा है.

वेंकैया नायडू अपने छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं और आपातकाल के दौरान जिन युवा नेताओं ने जेपी आंदोलन ने हिस्सा लिया था उसमें वेंकैया नायडू भी थे.

वेंकैया नायडू का जन्म 1 जुलाई 1949 को चावटपलेम, नेल्लोर जिला, आंध्र प्रदेश के एक कम्मा परिवार में हुआ था. उन्होंने वी.आर. हाई स्कूल, नेल्लोर से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और वी.आर. कॉलेज से राजनीति और राजनयिक अध्ययन में बीए किया. इसके बाद उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम से कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की.

छात्र-जीवन में वे आरएसएस की स्टूडेंट विंग एबीवीपी से जुड़े और 1974 में वे आंध्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में चुने गए. कुछ दिनों तक वे आंध्र प्रदेश के छात्र संगठन समिति के संयोजक भी रह चुके हैं.

वेंकैया नायडू का पूरा नाम मुप्पवरपु वेंकैया नायडू है. वे 2002 से 2004 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. फिलहाल वे मोदी सरकार में शहरी विकास, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन और संसदीय कार्य मंत्री हैं. इससे पहले, वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं.

आपातकाल विरोधी आंदोलन में सक्रिय योगदान 

वेंकैया नायडू की पहचान हमेशा एक 'आंदोलनकारी' के रूप में रही है. वे 1972 में 'जय आंध्र आंदोलन' के दौरान पहली बार सुर्खियों में आए. उन्होंने इस दौरान नेल्लोर के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुये विजयवाड़ा से आंदोलन का नेतृत्व किया.

छात्र जीवन में उन्होने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की विचारधारा से प्रभावित होकर आपातकालीन संघर्ष में हिस्सा लिया. वे आपातकाल के विरोध में सड़कों पर उतर आए और उन्हें जेल भी जाना पड़ा. आपातकाल के बाद वे 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के युवा शाखा के अध्यक्ष रहे.

नायडू का दक्षिण भारत की पार्टियों और नेताओं के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं से भी काफी अच्छे संबंध रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इस वजह से उनके पक्ष ने कई गैर-एनडीए दल भी आ सकते हैं.

बीजेपी ने वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार दक्षिण भारत में अपने विस्तार की रणनीति के तहत बनाया है. बीजेपी को उम्मीद है कि वेंकैया के उपराष्ट्रपति बनने से पार्टी को दक्षिण भारत के राज्यों में उनकी छवि का लाभ मिलेगा.

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