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यूपी चुनाव 2017: विनय कटियार न तो मार्गदर्शक हैं और न मूकदर्शक

बीजेपी नेता विनय कटियार का बयान अब महिलाओं के सम्मान से जुड़ कर राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है

Updated On: Jan 25, 2017 06:15 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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यूपी चुनाव 2017: विनय कटियार न तो मार्गदर्शक हैं और न मूकदर्शक

यूपी के चुनाव में अब प्रचार के साथ बयानों की आंधी चल पड़ी है. नेताओं की सबसे बड़ी कमजोरी अब खुलकर सामने आने लगी है. बिना बोले वो रह नहीं सकते और वो जो बोल जाते हैं उसके बवाल में पार्टियां फंस जाती हैं.

यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी के प्रचार से आहत बीजेपी नेता विनय कटियार का बयान अब महिलाओं के सम्मान से जुड़ कर राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है.

बेबाक बयान की वजह 

इस बयान के दो पहलू हैं. एक तो पार्टी द्वारा हाशिए पर फेंके गए कटियार की तवज्जो के लिए कातर पुकार है. दूसरा ये प्रियंका गांधी के बारे में उनका आंकलन है.

कटियार की हाशिए की खास बात ये भी है कि विनय कटियार भी यूपी में बीजेपी की प्रचार टीम का हिस्सा नहीं हैं. ऐसे में विनय कटियार का ये बयान भी पार्टी के लिये मुसीबतें खड़ी कर सकता है.

विनय कटियार को प्रियंका के प्रचार में केवल बॉलीवुड का स्टारडम और खूबसूरती दिखाई दी.

लेकिन वो ये भूल गए कि प्रियंका गांधी राजनीति की वो शख्सियत हैं जिनके सिर्फ एक बयान ने अरुण नेहरू की राजनीति कमाई पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी थी.

एक वाकया यह भी

यूपी का ही वाकया था और रायबरेली में चुनाव का मौका था. जब प्रियंका ने चुनाव प्रचार में सिर्फ इतना भर कहा था कि ‘मुझे आप लोगों से बहुत शिकायत है कि आपने उस आदमी को यहां आने कैसे दिया जिसने मेरे पिताजी को धोखा दिया.’

प्रियंका की भावुक अपील का ही असर था कि अरुण नेहरु एक झटके में सीट हार गए. फिर नेपथ्य से कभी उनकी वापसी नहीं हो सकी.

इस बार प्रियंका के प्रचार में उतरने से पहले ही विनय कटियार कह रहे हैं कि उनके पास प्रियंका से ज्यादा खूबसूरत प्रचारक हैं.

जाहिर तौर पर कटियार एक तीर से दो शिकार कर रहे हैं. एक तो वो यह बताना चाह रहे हैं कि उनके लिये प्रियंका की हैसियत सिर्फ एक खूबसूरत महिला से ज्यादा नहीं, वहीं वो ये भी बता रहे हैं कि प्रियंका से उन्हें कोई डर नहीं है.

डर छिपाए नहीं छिपता है. डर जुबान पर, चेहरे पर, आंखों में उतर आता है. विनय कटियार का बयान भी उसी अप्रत्याशित और अदृश्य डर का हिस्सा है.

हार का मुंह देख चुके हैं कटियार 

सोनिया गांधी से उपचुनाव में विनय कटियार तकरीबन पांच लाख वोटों से हार चुके हैं. वो हार अबतक नहीं भूल सके हैं.

यूपी में ही उनका विदेशी मूल का मुद्दा जनता खारिज कर चुकी थी. एक बार फिर वो प्रियंका पर निशाना साध रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में  विनय कटियार की ख्याति "हिंदुओं के हृदय सम्राट' के रुप में है. राजनीति की जमीन पर उनकी पकड़ मानी जाती रही.

राम मंदिर आंदोलन से उभरा ये चेहरा यूपी में बड़ा कद रखता है.

यूपी में कटियार बीजेपी की कश्ती के खेवनहार माने जाते रहे हैं लेकिन अब उनका बयान किनारे पर कश्ती डुबाने का काम कर सकता है.

बीजेपी की रणनीति में विनय कटियार के लिये छोटी सी भूमिका भी नहीं दिखाई देती है.

खुद को प्रचारक ना बनाए जाने पर कटियार की सफाई है कि, 'पार्टी हाईकमान ने जो फैसला लिया है, सही ही होगा. उन्हें लगता है कि मैं इस सूची में जाने लायक नहीं हूं.'

कटियार का दर्द या गुस्सा 

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कटियार के दर्द को भी समझने की कोशिश करनी चाहिए. अब  रिमी सेन ने बीजेपी ज्वाइन की है तो शायद कटियार ये भी सोच रहे हों कि बीजेपी के पास फिल्मी चेहरा है जिसकी खूबसूरती देखने के लिये भीड़ उमड़ पड़ेगी.

तभी उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास ज्यादा खूबसूरत अभिनेत्रियां हैं. सवाल ये है कि राजनीति क्या सिनेमाई पर्दा है? क्या नेताओं का किरदार पटकथा का हिस्सा है?

क्या चुनाव में वोट डालने वाली जनता भी सिनेमाघर का टिकट लेकर फिल्म देखने वाली जनता के बराबर है?

नेताओं की नजर में चुनाव उनके अभिनय का हिस्सा हो सकता है लेकिन जनता के लिये पांच साल की जिंदगी का सबसे बड़ा सवाल होता है.

लेकिन कटियार की ये सोच यूपी की जनता को लुभाने के लिये स्टार प्रचारकों पर जा टिकी है.

बीजेपी में स्टार प्रचारकों में हेमा मालिनी भी हो सकती हैं तो अब रिमी सेन भी .

लेकिन उस लिस्ट में मार्गदर्शक लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का नाम नहीं है.

बड़बोलेपन में कोई कम नहीं 

लेकिन सिर्फ बीजेपी ही नहीं बयानों के मामले में कोई किसी से कम नहीं. जेडीयू नेता शरद यादव ने तो सारी सीमाएं ही लांघ दी.

उन्होंने कहा कि ‘बेटी की इज्जत से वोट की इज्जत बड़ी है. पैसे की बदौलत आजकल वोट खरीदा और बेचा जाता है.’

शरद यादव ऐसा नाम भी नहीं जिन्हें देश नहीं जानता. संसद में शरद यादव  बहस को सत्ता और विपक्ष बड़े गौर से सुनता है.

सियासत की भट्टी में तपा ये चेहरा हर बयान के वजन को जानता और समझता है. लेकिन ये बयान सियासत की जमात को शर्मिंदा करने के लिये काफी है.

इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सर्जिकल स्ट्राइक के मामले में पीएम मोदी पर खून की दलाली करने का आरोप लगाया था.

बहरहाल ‘बयानवॉर’ से आगाज हो चुका है कि यूपी चुनाव को लेकर राजनीति के शोले भड़क चुके हैं और अब सब अपनी अपनी जुबान को धार देने में जुट गए हैं.

हर दिन किसी का एक बयान कभी मर्यादाओं का चीर हरण करेगा तो कभी किसी के दिल पर गहरा जख्म देने की कोशिश करेगा.

यूपी के इस दंगल में ताल ठोंकने वाले ज़बांदानी के उस्ताद फिलहाल अंगड़ाई ले रहे हैं.

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