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राम मंदिर के लिए अनंत काल तक इंतजार नहीं कर सकते हिंदू, बिल ही रास्ता है: VHP

VHP के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि हिंदुओं ने राम मंदिर के निर्माण को लेकर काफी लंबा इंतजार किया है और अब वे और इंतजार नहीं कर सकते

Updated On: Nov 17, 2018 01:48 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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राम मंदिर के लिए अनंत काल तक इंतजार नहीं कर सकते हिंदू, बिल ही रास्ता है: VHP

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) राम मंदिर की मांग की दिशा में पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ आगे बढ़ने को तैयार है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े इस संगठन ने इस सिलसिले में कार्य योजना भी तैयार की है. विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि हिंदुओं ने राम मंदिर के निर्माण को लेकर काफी लंबा इंतजार किया है और अब वे और इंतजार नहीं कर सकते.

फ़र्स्टपोस्ट के साथ बातचीत में कुमार ने इन बातों को भी खारिज कर दिया कि राम मंदिर के निर्माण से जुड़ी मांग सुप्रीम कोर्ट की अवज्ञा है और इसका मकसद 2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले वोटों का ध्रुवीकरण करना है. पेश हैं इस बातचीत के अंशः

राम मंदिर को लेकर इस तरह की हड़बड़ी क्यों है? इस मुद्दे के समाधान के लिए काफी लंबे समय तक इंतजार किया गया है, इसमें थोड़ा और इंतजार क्यों नहीं किया जा सकता है?

- अयोध्या में राम मंदिर को टूटे हुए तकरीबन 500 साल हो गए हैं और पिछले 68 वर्षों से हम अदालत में केस लड़ रहे हैं. साथ ही, पिछले 7 साल से इस मामले से जुड़ा मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में है.

सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ जब इस मुकदमे की सुनवाई कर रही थी, तो उत्तर प्रदेश धर्म संसद के साधुओं ने इस संबंध में सर्वोच्च अदालत का फैसला आने का इंतजार करने का फैसला किया, लेकिन दुर्भाग्य से आखिरकार ऐसा नहीं हो पाया. इसकी बजाय इसमें काफी लंबा वक्त लग गया है और अदालत ने अब तक इस मामले में कुछ तय नहीं किया है.

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- यह सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित सबसे अहम अपीलों में से एक है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिकता सूची में कहीं नहीं है. हमें विकल्प की तलाश करना है, क्योंकि हिंदुओं ने अपनी उम्मीद से परे जाकर इंतजार किया है. ऐसे में यह कहना किसी भी लिहाज से उचित नहीं माना जाएगा कि हम इस अहम और हिंदुओं की भावनाओं से जुड़े मुद्दे को लेकर जल्दबाजी में हैं. इस बात को लेकर हमारी राय साफ है कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर कानून के जरिए ही शुरुआत करनी होगी. बीते 5 अक्टूबर को बड़ी संख्या में अयोध्या समेत तमाम जगहों के साधुओं ने राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर दिल्ली में बैठक की और कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए हिंदू अनंत काल तक इंतजार नहीं कर सकते. उन्होंने सरकार से इस मसले पर संसद में कानून लाने की मांग की और इस सिलसिले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन भी सौंपा गया.

क्या राम मंदिर को लेकर फिर से शुरू हुई इस पूरी कवायद का संबंध 2019 में होने वाले चुनावों से हैं? आरोप लगाए जा रहे हैं कि इसका मकसद वोटों का ध्रुवीकरण करना है.

- न तो हमारा ऐसा कोई इरादा है और न ही हम इस दायरे में आना चाहते हैं. हालांकि, इस तरह की व्यापकता वाले आंदोलन का निश्चित रूप से चौतरफा असर होता है. जाहिर तौर पर इसे समानांतर या आनुषंगिक असर भी कहा जा सकता है.

कांग्रेस का एक नेता किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने नेता (राहुल गांधी) को जनेऊ धारी हिंदू कहता है और राहुल गांधी मंदिरों के अपने दौरे, कैलाश मानसरोवर की यात्रा और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में शिवलिंग पर दूध अर्पण करने आदि का जमकर प्रचार-प्रसार करते हैं. मध्य प्रदेश कांग्रेस के घोषणापत्र में वादा किया गया है कि अगर पार्टी सत्ता में आती है, तो वह राज्य में गौशाला खोलेगी. पार्टी के घोषणापत्र में गोमूत्र की बात भी की गई है. ऐसे में सवाल पूछा जा सकता है कि ध्रुवीकरण की कोशिश कौन लोग कर रहे हैं?

हमारी सलाह है कि इस पार्टी (कांग्रेस) को तर्कसंगत तरीके से आगे बढ़ना चाहिए और बिल (राम मंदिर के निर्माण से संबंधित) का समर्थन करना चाहिए. राम मंदिर के निर्माण की मांग हिंदुओं की वाजिब मांग है और अगर कोई पार्टी इसके खिलाफ माहौल गरमाने का प्रयास करती है, तो वह जाहिर तौर पर ध्रुवीकरण को न्योता दे रही है.

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बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की मुखिया मायावती ने 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान 97 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने का ऐलान किया था. इसका मतलब वोटरों का ध्रुवीकरण था. हमारी एकमात्र मांग मदिर मुहैया कराने की है और इसके बाद हम वापस अपने बैरक में चले जाएंगे.

VHP के वर्किंग प्रेसिडेंट आलोक कुमार.

VHP के वर्किंग प्रेसिडेंट आलोक कुमार.

इस बार लड़ाई सीधे सुप्रीम कोर्ट के साथ है. क्या आप अदालत की अवज्ञा करने के लिए तैयार हैं?

- नहीं, हम अदालत की अवज्ञा नहीं कर रहे हैं. संसद और न्यायपालिका के पास अलग-अलग अधिकार क्षेत्र और शक्तियां होती हैं. संसद के पास कानून बनाने का अधिकार है. हम हाल में यह देख चुके हैं कि किस तरह से अनुसूचित जाति/जनजाति कानून के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के व्यापक मायने थे और इस वजह से लोगों का गुस्सा देखने को मिला.

सरकार ने इसको लेकर पुनर्विचार याचिका दायर की और इस केस के लंबित रहने के दौरान ही संसद द्वारा कानून में संशोधन कर दिया गया. इससे पहले शाह बानो केस में भी तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने रूढ़िवादी मुस्लिमों के दबाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया था.

क्या आप कार्यवाही संबंधी योजना के लिए तैयार हैं?

- हां. हम साधुओं से मुलाकात कर रहे हैं. इसके अलावा सभी राजनीतिक पार्टियों के सांसदों से मुलाकात कर उनका भी समर्थन मांगा जाएगा. इसको लेकर देशभर में जागरूकता पैदा करने के लिए लोकसभा की सभी 543 संसदीय क्षेत्रों में रैलियों का आयोजन किया जाएगा. 25 नवंबर को नागपुर, अयोध्या और बेंगलुरु में अलग-अलग तीन रैलियों का आयोजन किया गया है. अयोध्या रैली में हमें एक लाख से भी ज्यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. इस तरह की सभी रैलियों के बाद 9 दिसंबर को रामलीला मैदान में एक बड़ी सार्वजनिक सभा होगी.

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यह पहले ही जन आंदोलन की शक्ल अख्तियार कर चुका है. इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, संघ परिवार से संबंधित अन्य इकाइयां, सभी हिंदू संगठन और आम लोग इस ऐतिहासिक रैली और आंदोलन का हिस्सा होंगे.

यहां तक कि एनडीए के बाहर कई पार्टियों को भी इस मांग का विरोध करने में मुश्किल हो सकती है. मई 2019 में लोकसभा चुनावों के होने का अनुमान है और राजनीतिक पार्टियों को रामजन्मभूमि मुद्दे पर जवाब देना होगा.

क्या आपको लगता है कि यह लक्ष्य आसान है, क्योंकि केंद्र और अधिकतर राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है?

- हम इस बिल पर दोनों सदनों में बड़े पैमाने पर बहुमत का आकंड़ा जुटाने का प्रयास कर रहे हैं और हमें यह आंकड़ा मिल जाएगा. भारतीय जनता पार्टी में जो लोग हैं, वे 'राम भक्त' हैं और बीजेपी ही वर्षों से इस मुद्दे को पकड़कर इस पर लगी रही है. आडवाणीजी (लालकृष्ण आडवाणी) ने बीजेपी के अध्यक्ष पद पर रहते हुए 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकाली थी. हालांकि, उन्हें बिहार में ही गिरफ्तार कर लिया गया था. भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार में काफी लोगों ने इसको लेकर काफी त्याग किया है और दशकों तक इसके लिए इंतजार भी किया है. अब अगर यह सही समय है और चीजें हमारे पक्ष में हैं, तो राम मंदिर का निर्माण क्यों नहीं होना चाहिए?

क्या आप इस बिल पर गैर-बीजेपी पार्टियों से समर्थन हासिल करने को लेकर आश्वस्त हैं?

- मुस्लिम लीग और लेफ्ट पार्टियों को छोड़कर बाकी सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए इस बिल का विरोध करना काफी मुश्किल होगा. वे देश की बहुसंख्यक आबादी (हिंदुओं) से दुश्मनी मोल लेने की हिमाकत नहीं कर सकते.

कांग्रेस के सांसद और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने बीते 13 नवंबर को कहा कि अब राम मंदिर का लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव नहीं रह गया है. उसी दिन मध्य प्रदेश से कांग्रेस के एक विधायक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को 'आतंकवादी संगठन' कह दिया था. आपकी टिप्पणी?

- इस तरह का बयान देकर कांग्रेस पार्टी खुद का मजाक बना रही है और खुद का सर्वनाश करने की तरफ बढ़ रही है. या तो वे लोग जमीन हकीकत से अनजान हैं या 'धर्मनिरपेक्ष' होने का स्वांग रच रहे हैं. सामान्य तौर पर हिंदू इसे अच्छा नहीं मानेंगे.

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