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VHP के कट्टर हिंदूवादी नेता प्रवीण तोगड़िया इतने कमजोर कैसे पड़े कि आंसू निकल गए

हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए देशभर में अपनी हुंकार से हलचल मचा देने वाला शख्स मीडिया के सामने हाथ जोड़े बैठा था

Vivek Anand Vivek Anand Updated On: Jan 16, 2018 09:31 PM IST

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VHP के कट्टर हिंदूवादी नेता प्रवीण तोगड़िया इतने कमजोर कैसे पड़े कि आंसू निकल गए

मंगलवार को वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया जब मीडिया के सामने आए तो कमजोर दिख रहे थे. हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए देशभर में अपनी हुंकार से हलचल मचा देने वाला शख्स मीडिया के सामने हाथ जोड़े बैठा था. अपनी बेबसी की कहानी बयां कर रहा था. बोलते-बोलते आंखों से आंसू टपक जा रहे थे.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवीण तोगड़िया की हालत देखकर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ याद आ जा रहे थे. 2006 में लोकसभा की कार्यवाही के दौरान योगी आदित्यनाथ तोगड़िया की ही तरह फफक कर रोने लगे थे. योगी आदित्यनाथ भी तोगड़िया की ही तरह पूर्वांचल के हिंदू हृदय सम्राट थे. 2006 में यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी. योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया था कि समाजवादी सरकार उन्हें पुलिस के जरिए प्रताड़ना करवा रही है. पुलिसिया प्रताड़ना का जिक्र करते हुए वो रोने लगे थे.

प्रवीण तोगड़िया चर्चा में नहीं थे. जिस हिंदू राष्ट्र के सपने दिखाकर उन्होंने देश में अपनी राजनीति चमकाई थी, उस जमीन पर कब्जा जमाने वाले इफरात में आ गए हैं.  2014 के बाद उनका कोई बड़ा बयान भी नहीं आया था. इसके पहले 2013 में उन्होंने ऐलान किया था कि वीएचपी 2015 तक गुजरात को हिंदू राज्य का दर्जा दे देगी. लेकिन इस आखिरी कोशिश के बाद भी गुजरात में वीएचपी अपनी खोई जमीन वापस न पा सकी.

2014 में उन्होंने हिंदू समुदाय के लोगों से मुसलमान पड़ोसियों को बाहर निकालने का भड़काऊ बयान दिया था. इस बयान के लिए उनके खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था. आज जब प्रवीण तोगड़िया इस हालत में हैं तो ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर तोगड़िया इस हालत में पहुंचे कैसे और इसके लिए उनकी किन गलतियों को जिम्मेदार माना जाए.

Photo. twitter

कभी नरेंद्र मोदी के साथ स्कूटर पर संघ का प्रचार किया था

डॉ. प्रवीण तोगड़िया कैंसर के सर्जन डॉक्टर हैं. उन्होंने 14 वर्षों तक डॉक्टरी की प्रैक्टिस भी की है और अहमदाबाद में एक अस्पताल का निर्माण भी करवाया है. लेकिन बाद में वो डॉक्टरी के पेशे से हिंदूवादी राजनीति की तरफ मुड़ गए.

प्रवीण तोगड़िया और नरेंद्र मोदी ने करीब-करीब एकसाथ ही राजनीतिक करियर शुरू किया. अस्सी के दशक में अहमदाबाद में एक ही स्कूटर पर सवार होकर तोगड़िया और मोदी आरएसएस के लिए प्रचार पर निकलते थे. तोगड़िया स्कूटर चलाते और नरेंद्र मोदी उनके पीछे बैठते.

1983 में प्रवीण तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद में शामिल हो गए जबकि 1984 में नरेंद्र मोदी ने बीजेपी का दामन थाम लिया. 1995 में गुजरात में बीजेपी के उदय के वक्त दोनों एकसाथ रहकर ही एकदूसरे का हाथ मजबूत कर रहे थे. 1995 में शंकरसिंह वाघेला बीजेपी से अलग हो गए और गुजरात में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली.

नए राजनीतिक समीकरण को दुरुस्त करने के लिए तत्कालीन सीएम शंकर सिंह वाघेला ने प्रवीण तोगड़िया को जेल में डलवा दिया. तोगड़िया पर आरोप था कि उन्होंने कुछ बीजेपी नेताओं की पिटाई की थी. नरेंद्र मोदी ने उस वक्त तोगड़िया की रिहाई के लिए बड़ा कैंपेन चलाया था.

नरेंद्र मोदी जब गुजरात को छोड़कर दिल्ली आए तो राज्य में उनके लिए समर्थन जुटाने का काम तोगड़िया ने ही संभाला. मोदी से इस दोस्ती का तोगड़िया को फायदा भी मिला. 2001 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम बने तो तोगड़िया के दाहिने हाथ रहे गोरधन झड़फिया को उन्होंने अपने कैबिनेट में शामिल किया. झड़फिया को गृहराज्य मंत्री बनाया गया. अपने कट्टर हिंदूवादी विचारों और भड़काऊ भाषणों की वजह से तोगड़िया लगातार सुर्खियां बटोरते रहे.

2002 के गुजरात दंगों में हुई थी खूब चर्चा

2002 के गुजरात दंगों के दौरान प्रवीण तोगड़िया की चर्चा लगातार बनी रही. अपने बयानों के जरिए उन्होंने अपने इर्द-गिर्द विवादों का जाल बनाए रखा. कहा जाता है कि उस वक्त वो अस्पताल में जा-जाकर डॉक्टरों को हिदायत दिया करते थे कि दंगों में घायल हुए किन बीमारों का इलाज करना है और किनका नहीं.

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प्रवीण तोगड़िया से मिलते हार्दिक पटेल

उस वक्त तोगड़िया ने दंगों को हिंदुत्व के प्रयोगशाला की उपज बताया था. प्रवीण तोगड़िया का ऐलान था कि अगले दो वर्षों में हिंदू राष्ट्र का निर्माण होगा. हिंदुस्तान का इतिहास और पाकिस्तान का भूगोल बदल दिया जाएगा. दिसंबर 2002 के गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान तोगड़िया ने बीजेपी के लिए धुंआधार चुनाव प्रचार किया. उन्होंने करीब 100 रैलियां की थी.

हालांकि 2002 चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद भी प्रवीण तोगड़िया की बीजेपी सरकार में पहले की तरह पैठ नहीं रह गई. तोगड़िया के दाहिना हाथ रहे गोरधन झड़फिया को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. सरकार में तोगड़िया का हस्तक्षेप खत्म हो गया.

2003 में तोगड़िया के त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रम ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया. तोगड़िया घूम-घूम कर भड़काऊ भाषण दे रहे थे. वो खुले हाथों से वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को त्रिशूल बांट रहे थे. राजस्थान के अजमेर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. फिर इस शर्त के साथ जमानत मिली कि वो इस तरह की हरकत नहीं करेंगे लेकिन रिहा होने के बाद भी उनके त्रिशूल बांटने का अभियान चलता रहा.

कुछ सुप्रीम कोर्ट का दबाव और कुछ बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों ने प्रवीण तोगड़िया के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी. बीजेपी सरकार ने तोगड़िया के पर कतरने शुरू कर दिए. इस बीच गोरधन झडफिया ने महागुजरात जनता पार्टी के नाम से नई पार्टी बना ली.

जब बीजेपी सरकार में खत्म हुई तोगड़िया की पैठ

गोरधन झड़फिया की महागुजरात जनता पार्टी ने 2007 के विधानसभा चुनावों में केशुभाई पटेल के गुजरात परिवर्तन पार्टी के साथ विलय करके चुनाव लड़ा. 2012 के चुनावों में भी तोगड़िया और वीएचपी कार्यकर्ताओं ने गुजरात परिवर्तन पार्टी के समर्थन और बीजेपी के खिलाफ जमकर प्रचार किया. लेकिन सारा जोर लगाने के बाद भी बीजेपी के खिलाफ इस गोलबंदी को कोई फायदा नहीं मिला.

2011 में प्रवीण तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए. 2013 में वो देश के ऐसे इकलौते शख्स बन गए जिनके ऊपर भड़काऊ भाषण देने के सबसे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे. अगस्त 2013 में उनके ऊपर 19 क्रिमिनल केसेज दर्ज थे. इनमें से ज्यादातर भड़काऊ भाषण देने के मामले थे.

अगस्त 2013 में ही अयोध्या में उन्हें दूसरे वीएचपी नेताओं के साथ गिरफ्तार किया गया. तोगड़िया अयोध्या में चौरासी कोसी परिक्रमा यात्रा की शुरुआत करने पहुंचे थे. जबकि प्रशासन ने इसकी वजह से दो समुदायों के बीच तनाव पैदा होने का हवाला देकर इस यात्रा पर रोक लगा रखी थी.

2014 में गुजरात के भावनगर में तोगड़िया के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. तोगड़िया ने हिंदू समुदाय के लोगों से अपने पड़ोसी मुसलमानों को बाहर निकालने का भड़काऊ बयान दिया था.

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10 साल पुराने मामले ने तोगड़िया की मुश्किलें बढ़ाईं

पिछले दिनों 10 साल पुराने एक मामले को लेकर राजस्थान की एक कोर्ट ने तोगड़िया के खिलाफ अरेस्ट वॉरंट जारी किया था. राजस्थान की गंगापुर कोर्ट ने पहले भी जमानती वॉरंट जारी किए थे. लेकिन बार बार उसकी तामील न होने पर गैरजमानती वॉरंट जारी किया गया. इसी वॉरंट को तामील कराने के लिए राजस्थान पुलिस सोमवार को अहमदाबाद आई थी, लेकिन तोगड़िया के न मिलने पर उसे बैरंग लौटना पड़ा.

इसके बाद तोगड़िया सोमवार की सुबह से गायब हो गए. देर रात उनके बारे में जानकारी हुई. बेहोशी की हालत में उन्‍हें अहमदाबाद के शाहीबाग इलाके के चंद्रमणि अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था. मंगलवार को वो मीडिया के सामने आए. कहने लगे कि केंद्र के इशारे पर उनके खिलाफ साजिश चल रही है. उन्होंने वक्त आने पर इस साजिश के पीछे के नामों का ऐलान करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि वो हिंदु एकता के लिए काम कर रहे हैं और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है. और ये बोलते-बोलते वो रो पड़े.

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