S M L

टू जी मामले में सीबीआई अदालत का फैसला : क्या होगी बीजेपी की आगे की रणनीति ?

फिलहाल तो सरकार चला रही बीजेपी को इस मुद्दे पर सीबीआई की अदालत के फैसले पर जवाब देना और लोगों को समझाना मुश्किल हो रहा है.

Amitesh Amitesh Updated On: Dec 21, 2017 06:51 PM IST

0
टू जी मामले में सीबीआई अदालत का फैसला : क्या होगी बीजेपी की आगे की रणनीति ?

टू जी घोटाले को लेकर सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला जैसे ही सामने आया, उसके बाद बीजेपी के उन आरोपों पर सवाल खड़े होने लगे जिसमें बीजेपी अबतक यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए टू जी घोटाले को लेकर यूपीए पर हमलावर रही है.

बीजेपी के नेताओं की तरफ से भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर लगातार कांग्रेस पर हमला किया जाता रहा. यहां तक कि भ्रष्टाचार के प्रतीक के तौर पर टू जी घोटाले को ही केंद्र में रखकर बीजेपी ने विपक्ष में रहते मनमोहन सिंह की सरकार पर वार किया था. उस वक्त बीजेपी ने लगातार मनमोहन सिंह सरकार के दौरान हुए टूजी घोटाले को लेकर पूरे देश में मुहिम चलाई थी.

लेकिन, अब टू जी घोटाले को लेकर सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले ने बीजेपी को थोड़ा असहज जरूर कर दिया है. कांग्रेस की तरफ से मनमोहन सिंह से लेकर सभी बड़े नेता मैदान में उतर गए. सबने बीजेपी पर जानबूझकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रोपगेंडा फैलाने का आरोप लगा दिया.

बीजेपी की तरफ से कांग्रेस के आरोपों का जवाब देने के लिए कमान संभाली वित्त मंत्री अरुण जेटली ने. जेटली ने फिर कहा कि टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में भ्रष्टाचार हुआ है. जेटली ने कहा कि जांच एजेंसी इस मामले पर गौर करेगी.

घोटाला तो हुआ है: बीजेपी

Hindustan Times Leadership Summit

ये बात साफ है कि सीएजी की रिपोर्ट सामने आने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ही टू जी स्पेक्ट्रम मामले में आवंटन रद्द कर दिया गया था. दोबारा आवंटन के दौरान सरकार को काफी फायदा हुआ था. उस दौरान बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के 2012 में दिए आदेश और सीएजी की 2010 में सौंपे रिपोर्ट को ही आधार बनाकर यूपीए सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया था.

बीजेपी के रणनीतिकारों का तर्क है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही सीएजी ने घोटाले को उजागर किया था, सुप्रीम कोर्ट ने भी आवंटन रद्द कर दिया तो घोटाले से इनकार कैसे किया जा सकता है? बीजेपी के नेताओं का तर्क यही है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने  टू जी मामले में आवंटन रद्द कर फिर से निविदा निकालने का आदेश दिया था तो इससे साफ है कि घोटाला हुआ था.मले में कुछ लोगों को पहले ही स्पेक्ट्रम दे दिए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने भी पूरी प्रक्रिया को गलत माना था.

ये भी पढ़ें: टू जी फैसलाः स्वामी ने कहा निराश होने की जरूत नहीं, सरकार HC में करे अपील

हालांकि जेटली ने कहा कि फैसला कुछ दलों के लिए तमगा हो सकता है. जेटली का इशारा कांग्रेस की तरफ था. जेटली ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि 'टू जी मामला एक बेइमान और भ्रष्ट नीति थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट 2012 में पहले ही खारिज कर चुका है. ऐसे में कांग्रेस को इसे सर्टिफिकेट नहीं समझना चाहिए.'

अब जांच एजेंसियों ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बाद की है. लेकिन, इस फैसले के बाद ए राजा और कनीमोझि तो बरी हो गए हैं.

अब कैसा हो सकता है सियासी समीकरण ?

2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त यह पूरा मामला काफी बड़ा रंग ले चुका था. बीजेपी के कैंपेन के केंद्र में भ्रष्टाचार का मुद्दा था और उस भ्रष्टाचार के मुद्दे के केंद्र में 1 लाख 76 हजार करोड़ का टू जी घोटाला था.

अब जबकि इस पूरे मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके प्रमुख करुणानिधि की बेटी कनिमोझि की रिहाई हो गई है तो इसको लेकर कई तरह के सियासी समीकरण के भी कयास लगाए जाने लगे हैं.

पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीएमके प्रमुख  करुणानिधि से मुलाकात की थी. लेकिन, उस मुलाकात के दौरान किसी सियासी समीकरण से इनकार किया गया था. हालांकि उस वक्त भी कयास लग रहे  थे कि पीएम की मुलाकात 2019 के पहले एक नए समीकरण की संभावना को बल देने वाला है.

अब जबकि ए राजा और कनिमोझि इस पूरे मामले बरी हो गए हैं तो फिर से इस तरह के कयासों और अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके प्रमुख और  राज्य की मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद एक खालीपन दिख रहा है.

ये भी पढ़ें: 2G फैसला: ट्विटर ने कहा- घोटाले पर फैसला नहीं, फैसले पर घोटाला

एआईएडीएमके के दोनों ही धड़े काफी मशक्कत के बाद एक हुए हैं लेकिन, शशिकला और उनके भतीजे दिनाकरन से उनकी तनातनी जारी है. जयललिता की राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही लड़ाई एआईएडीएमके को दिनोंदिन कमजोर ही कर रही है. ऐसे में राज्य की राजनीति आने वाले दिनों में नई करवट ले सकती है.  2019 में बीजेपी की रणनीति और तमिलनाडु में कुछ नए समीकरण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

क्या साथ आएंगे बीजेपी-डीएमके ?

PM Modi in Chennai

ए. राजा और कनिमोझि का बरी होना डीएमके के लिए नैतिक और राजनीतिक तौर पर बड़ी जीत है. इस फैसले से डीएमके को अगले विधानसभा चुनाव और साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है. ऐसे में बीजेपी के लिए एक संभावना दिख सकती है.

लेकिन, जिस घोटाले को लेकर बीजेपी इतनी आक्रामक रही है कि उसी घोटाले में बरी डीएमके के नेताओं के साथ साझीदारी करना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा.

फिलहाल तो सरकार चला रही बीजेपी को इस मुद्दे पर सीबीआई की अदालत के फैसले पर जवाब देना और लोगों को समझाना मुश्किल हो रहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
सदियों में एक बार ही होता है कोई ‘अटल’ सा...

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi