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उत्तराखंड में कांग्रेस बनाम कांग्रेस की लड़ाई, जीत किसकी होगी?

दलबदलुओं को अपने पाले में लाकर बीजेपी ने इस बार लड़ाई को कांग्रेस बनाम कांग्रेस बना दिया है.

Updated On: Feb 07, 2017 11:43 AM IST

Amitesh Amitesh

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उत्तराखंड में कांग्रेस बनाम कांग्रेस की लड़ाई, जीत किसकी होगी?

सर्द मौसम के बावजूद पहाड़ों पर गर्मी देखने को मिल रही है. देवभूमि में जारी सियासी सरगर्मी ने न सिर्फ सियासी पारा बढ़ा दिया है. बल्कि, पहाड़ों का राजा कौन होगा इस बात को लेकर चुनाव से पहले ही जोड़तोड़ की सुगबुगाहट तेज हो गई है.

दलबदल के इस मौसम में कौन ,कब, कहां पाला बदल ले इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है.

लेकिन उत्तराखंड में तो यह कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है. मजे की बात यह है कि यह दलबदल का बहाव बस एक ही दिशा की ओर हो रहा है.

कांग्रेस छोड़ कर नेता लगातार बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. बस आपकी योग्यता यही होनी चाहिए कि आपका नाम बड़ा हो, भले ही आप पुराने कांग्रेसी क्यों न हो.

आपने बीजेपी और आरएसएस को अबतक कितना भी भला बुरा क्यों ना कहा हो, केवल अपने विधानसभा क्षेत्र में आपकी जीत की संभावना हो तो बीजेपी गले लगाने से तनिक भी नहीं हिचकेगी.

इस बात से फिलहाल बीजेपी को कोई मतलब नहीं कि अपनी पार्टी के पुराने कार्यकर्ता भले ही नाराज हो जाएं.

एन डी तिवारी मांगेंगे बीजेपी के लिए वोट

अब बुजुर्ग एन डी तिवारी बीजेपी के समर्थन में वोट मांगेगें. खुद कांग्रेस के भीतर उनकी हालत क्या है यह बात जगजाहिर है, लेकिन, अब अपने बेटे रोहित शेखर का राजनीति में पदार्पण चाहते हैं,

ND Tiwari

एन डी तिवारी लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद उत्तराखंड चुनाव के पहले बीजेपी में शामिल हुए हैं

लिहाजा बीजेपी के दरवाजे पहुंच गए. 91 साल के एन डी तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन, सियासत में जितने विख्यात रहे, उतना ही निजी जीवन में कुख्यात भी रहे हैं. बीजेपी कभी उनके ऊपर न जाने किस-किस तरह से ताने मारती थी.

लेकिन, आज चुनावी मौसम में बीजेपी को शायद इस बात का एहसास हुआ कि एन डी तिवारी ब्राह्मणों के सबसे बड़े नेता हैं. तभी तो कांग्रेस के भीतर किनारे हो चुके तिवारी को पार्टी ने गले लगा लिया. अब उनके बेटे रोहित शेखर के बीजेपी से उत्तराखंड में चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है.

इसके पहले 16 जनवरी को सुबह-सुबह उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष यशपाल आर्य ने हाथ छोड़कर कमल का साथ होने का फैसला किया. यशपाल आर्या अपने साथ-साथ अपने बेटे के लिए भी टिकट मांग रहे थे. लेकिन, कांग्रेस ने एक साथ पिता-पुत्र दोनों को टिकट देने की बात नहीं मानी तो पाला बदल लिया.

पार्टी में शामिल होने के दिन शाम को ही बीजेपी ने यशपाल आर्या को बाजपुर सुरक्षित और बेटे संजीव आर्या को नैनीताल सुरक्षित सीट से टिकट दे दिया. लेकिन, बीजेपी के भीतर कांग्रेसी नेताओं के आने का सिलसिला अचानक शुरू नहीं हुआ है.

करीब दस महीने पहले उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार से बगावत कर चुके नेताओं को पहले बीजेपी ने अपने साथ शामिल कर लिया. अब उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में उतार दिया है.

BJP parliamentary party meeting

हरक सिंह रावत को कोटद्वार से बीजेपी ने दिया टिकट

बीजेपी की उत्तराखंड के लिए जारी पहली सूची में हरीश रावत सरकार में मंत्री रह चुके हरक सिंह रावत को कोटद्वार से टिकट दिया गया है, जबकि, पूर्व सांसद सतपाल महाराज को चौबातखल से कुंवर प्रणवेंद्र सिंह चैंपियन को खानपुर से और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा को सितारगंज से चुनाव मैदान में उतारा गया है.

ये सभी कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी में शामिल हुए हैं. भगवा ब्रिगेड की तरफ से उत्तराखंड में चुनाव जीतने को लेकर दावे किए जा रहे हैं. लेकिन, पार्टी कैडर्स के बीच यह सवाल लगातार खड़ा हो रहा है क्या बीजेपी के पास अपनी ताकत इतनी कमजोर हो गई है कि कांग्रेसी उम्मीदवारों को अपने साथ लाकर अपनी जमीन मजबूत की जा रही है.

लेकिन, पार्टी के भीतर दबी जुबान से चर्चा तो इसी बात की हो रही है कि उत्तराखंड में बीजेपी का कांग्रेसीकरण हो गया है तो कोई कह रहा है कि देवभूमि की लड़ाई में जीत तो ‘कांग्रेस’ की ही होगी. फिलहाल दलबदलुओं को अपने पाले में लाकर बीजेपी ने इस बार लड़ाई को कांग्रेस बनाम कांग्रेस बना दिया है.

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