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यूपी का नया सीएम आज तय होगा? इन चेहरों की है चर्चा

यूपी की सत्ता में बीजेपी का पन्द्रह साल पुराना वनवास खत्म हो गया है

FP Staff Updated On: Mar 12, 2017 09:10 AM IST

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यूपी का नया सीएम आज तय होगा? इन चेहरों की है चर्चा

उत्तर प्रदेश  की सत्ता में बीजेपी का 15 साल पुराना वनवास खत्म हो गया है. बीजेपी को एेतिहासिक जीत मिली है. अब सवाल बीजेपी का संभावित सीएम कौन होगा?

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मुताबिक रविवार को सीएम का नाम तय हो जाएगा.

रविवार शाम बीजेपी मुख्यालय पर पार्टी कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करेंगे. इसके बाद भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक होगी.

शाह ने बताया कि संसदीय बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर विचार किया जायेगा और जो सबसे योग्य उम्मीदवार होगा, उसे ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

राजनाथ सिंह

उत्तर प्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर ज्यादातर लोग केंद्रीय गृहमंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के नाम पर शर्त लगाने को तैयार होंगे.

rajnath singh

राजनाथ सिंह सूबे में बीजेपी के सबसे कद्दावर नेता हैं. उन्होंने मार्च 2002 में मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने अपना कदम राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ाया.

वो पहले केंद्रीय मंत्री बने फिर दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. बतौर स्टार कैंपेनर राजनाथ सिंह विधानसभा चुनावों के दौरान 26 दिनों तक सूबे में जमे रहे. इस दौरान उन्होंने 120 जनसभाओं को संबोधित किया.

चुनाव प्रचार के दौरान राजनाथ सिंह ने 20 हजार किलोमीटर की यात्रा भी की. उनके बारे में कहा जाता है कि वो संगठन के काफी अनुशासित सिपाही हैं, जो हमेशा से पार्टी के फैसलों के साथ आगे बढ़ने के लिए जाने जाते हैं.

फिजिक्स (भौतिकी) में उन्हें मास्टर की डिग्री हासिल है. जबकि 1964 से वो आरएसएस से जुड़े हुए हैं और यही बात उन्हें एक ऐसा सियासी चेहरा बनाती है जो जमीनी स्तर पर लोगों से मजबूती जुड़े हुए हैं.

मनोज सिन्हा

Manoj Sinha

बीजेपी की तरफ मुख्यमंत्री का चेहरा दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा भी हो सकते हैं

मुख्यमंत्री की रेस में राजनाथ सिंह के बाद जिस दूसरे केंद्रीय मंत्री का नाम आता है वो दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा हैं.

आईआईटी बीएचयू से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल करने वाले मनोज सिन्हा ने अपने काम से बतौर संगठनात्मक रणनीतिज्ञ का दर्जा हासिल किया है.

इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का भरोसा भी जीता है. सभी इस बात को जानते हैं कि उन्हें यूपी की हर एक विधानसभा सीट की जानकारी है.

इतना ही नहीं वो प्रधानमंत्री की हाई प्रोफाइल सीट वाराणसी का जिम्मा भी संभाले हुए हैं. वो एक मजबूत पार्टी कार्यकर्ता हैं जो हमेशा लो-प्रोफाइल में रहना पसंद करते हैं.

बावजूद इसके पूर्वी यूपी में मनोज सिन्हा खासे चर्चित नेता हैं. सिन्हा के साथ बस एक ही कमी है वो है उनकी जाति. वो भूमिहार जाति से ताल्लुक रखते हैं और पूर्वी यूपी के कुछ जिलों तक ही भूमिहारों की संख्या सीमित है.

लेकिन यही कमी उनके लिए वरदान भी साबित हो सकती है क्योंकि अगर वो मुख्यमंत्री पद का जिम्मा संभालते हैं तो उनकी छवि जाति को लेकर पक्षपात नहीं करने वाले नेता की बनेगी.

केशव प्रसाद मौर्य

Agra: UP BJP President Keshav Prasad Maurya addresses an election rally in Agra on Thursday. PTI Photo (PTI2_2_2017_000230B)

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या राज्य के ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं

मुख्यमंत्री की रेस में फुलपुर से पहली बार चुने गए सांसद और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का भी नाम शामिल है.

केशव प्रसाद मौर्य ने राजनाथ सिंह और मनोज सिन्हा के मुकाबले कम जनसभाओं को संबोधित किया है, क्योंकि वो पर्दे के पीछे रहकर संगठनात्मक जिम्मेदारियों को निभाने में लगे थे.

एक बात जो उनके पक्ष में जाती है वो ये कि कल्याण सिंह के उत्कर्ष के दौरान जो गैर-यादव ओबीसी तबका बीजेपी के साथ खड़ा दिखता था. वही मतदाता इस बार पार्टी के साथ दिखा.

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अगर सूबे में बीजेपी को भारी जनसमर्थन ओबीसी जातियों की वजह से मिलता है तो इस समुदाय से किसी नेता को नेतृत्व का मौका दिया जाना चाहिए.

हालांकि, केशव प्रसाद मौर्य के लिए जो सबसे कमजोर कड़ी है वो ये कि उन्हें थोड़ा भी प्रशासकीय अनुभव नहीं है. ऐसे में यूपी जैसे बड़े राज्य को संभालना काफी मुश्किल भी साबित हो सकता है.

संतोष गंगवार

GANGWARNE

केंद्रीय वित्तमंत्री संतोष गंगवार भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं

एक और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जो वित्त-राज्यमंत्री का जिम्मा संभाल रहे हैं. वो भी मुख्यमंत्री की रेस में शामिल हैं.

हालांकि, उनके नाम की चर्चा खूब जोर-शोर से नहीं की जा रही है. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में 16 वीं लोकसभा के लिए बतौर सांसद उन्होंने चुनाव जीता और अपने सियासी विरोधी को 2.4 लाख मतों से चुनाव में शिकस्त दी.

जहां तक बात प्रशासकीय अनुभव की है तो संतोष गंगवार को इसकी कमी नहीं है. वित्त-राज्यमंत्री बनने से पहले गंगवार  पेट्रोलियम और नेचुरल गैस राज्यमंत्री थे.

जबकि इसके साथ ही उन्हें संसदीय कार्य की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी.

वर्ष 1999 में वो साइंस एंड टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री भी रह चुके हैं. 1989 के बाद से ही गंगवार बीजेपी के स्टेट वर्किंग कमेटी के सदस्य भी हैं.

योगी आदित्यनाथ

yogi adityanath

पार्टी के फायर ब्रांड नेताओं में से एक योगी आदित्यनाथ का नाम पूर्वांचल की राजनीति में अहम माना जाता है. उनकी इस छवि का इस्तेमाल पार्टी ने इस बार के चुनावों में भी जमकर किया.

पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक स्टार प्रचारक की हैसियत से आदित्यनाथ की ताबड़तोड़ सभाएं इसका गवाह हैं. संघ में भी उनकी अच्छी पैठ मानी जाती है लेकिन पार्टी संगठन में योगी के लिए काफी चुनौतियां भी हैं.

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