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यूपी और बिहार में 11 मार्च को होंगे उपचुनाव, नतीजे 14 मार्च को

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटें खाली हुई थीं

Updated On: Feb 09, 2018 01:38 PM IST

FP Staff

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यूपी और बिहार में 11 मार्च को होंगे उपचुनाव, नतीजे 14 मार्च को

चुनाव आयोग ने यूपी और बिहार में होने वाले लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव की तारीख का एलान कर दिया है यूपी में गोरखपुर और फूलपुर जबकि बिहार के अररिया, भभुआ और जहानाबाद क्षेत्र में 11 मार्च को मतदान होगा. उपचुनावों के नतीजे 14 मार्च को आएंगे.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटें खाली हुई थीं. दोनों ही खाली पड़ी सीटों पर 22 मार्च तक चुनाव कराए जाने थे. चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 20 फरवरी है. 20 फरवरी तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकते हैं.

बिहार में एक लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होगा. आरजेडी सांसद तस्‍लीमुद्दीन के निधन के बाद अररिया लोकसभा सीट खाली हुई थी, जबकि जहानाबाद के आरजेडी विधायक मुंद्रिका सिंह यादव और भभुआ के बीजेपी विधायक आनंद भूषण पांडेय की मृत्यु के बाद ये दोनों सीटें खाली हुई थीं.

गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों को लेकर बीजेपी पहले ही तैयारियां शुरू कर चुकी है. सीएम योगी अपने गोरखपुर दौरे के वक्त करोड़ों की योजनाओं की सौगात गोरखपुर को दे चुके हैं. उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का भी जायाज लिया. उधर राज्य बीजेपी संगठन ने गोरखपुर लोकसभा के लिए प्रदेश मंत्री कौशलेन्द्र सिंह, अनूप गुप्ता और विधायक राम चौहान को जिम्मेदारी सौंपी है. जबकि फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के लिए प्रदेश मंत्री गोविन्द शुक्ल और अमर पाल मौर्य और विधायक भूपेश चौबे को जिम्मेदारी दी गई है. ये सभी पदाधिकारी लोकसभा क्षेत्रों में चुनावी तैयारियों की कमान संभालेंगे.

राजस्थान में लोकसभा उपचुनाव में दो सीटें हारने के बाद बीजेपी अब लोकसभा की सीटों के आंकड़ों में गिरावट का जोखिम बिल्कुल नहीं उठाना चाहेगी. ये दोनों ही सीटें उसके लिए साख का सवाल है. इनकी जीत से जहां पार्टी के जीत के सफर को ताकत मिलेगी तो वहीं एक भी हार केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार पर भी सियासी सवाल खड़ा करने का काम करेगी. यही वजह है कि बीजेपी यहां कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है. लेकिन अब देखना है कि इन सीटों पर यूपी में समाजवादी पार्टी और बीएसपी के बीच बीजेपी को टक्कर देने के लिए क्या कोई गठबंधन होता है या नहीं.

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