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केंद्रीय विद्यालय जमीन आवंटन को लेकर कुशवाहा ने नीतीश सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

उपेंद्र कुशवाहा केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन आवंटन में बरती जा रही लापरवाही से नाराज हैं. वो रविवार को लगातार दूसरे दिन उपवास पर बैठे हैं

Updated On: Dec 09, 2018 11:49 AM IST

FP Staff

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केंद्रीय विद्यालय जमीन आवंटन को लेकर कुशवाहा ने नीतीश सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा नीतीश सरकार के विरोध में एक दिन के उपवास पर चले गए हैं. बिहार के औरंगाबाद में विरोध-प्रदर्शन कर रहे कुशवाहा का कहना है कि नीतीश सरकार ने अब तक राज्य में केंद्रीय विद्यालय बनाने के लिए जमीन का आवंटन नहीं किया है.

एनडीटीवी की खबर के अनुसार कुशवाहा ने दावा किया कि 4 महीने पहले ही औरंगाबाद जिले के देवकुंड इलाके में उन्होंने केंद्रीय विद्यालय बनवाने का प्रस्ताव भेजा था. इसके निर्माण के लिए जमीन की जरूरत पड़ती, ऐसे में मुख्यमंत्री की हामी के बिना यह काम संभव नहीं हो सकता. इस बात के 4 महीने बीत जाने के बाद भी मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कुछ नहीं किया.

कुशवाहा ने कहा कि बिहार सरकार के असहयोगीय रवैये की वजह से केंद्रीय विद्यालय का प्रोजेक्ट अटका पड़ा है. यही हाल नवादा जिले का भी है. हम रविवार को वहां भी विरोध-प्रदर्शन के साथ उपवास करेंगे. बिहार सरकार ने जमीन के अनुदान के लिए 'बहुत अव्यवहारिक' मांग की है, वो चाहते हैं कि जो स्कूल बनकर तैयार होंगे उनमें 75 प्रतिशत छात्र राज्य के होने चाहिए.

कुशवाहा ने राज्य सरकार को भेजी है शिक्षा से जुड़ी 25 मांगों का चार्टर

कुशवाहा ने कहा, 'अगर हम उनकी इस मांग को मान भी लेते हैं, तो हमें अन्य राज्यों में भी इसी तरह के प्रावधानों के लिए अपनी सहमति देनी होगी. अब बिहार सरकार को यह नहीं पता कि पटना को छोड़कर, किसी और राज्य का कोई छात्र शायद ही यहां के केंद्रीय विद्यालय में हो.

उन्होंने कहा, दूसरी तरफ, बिहार के छात्रों की बड़ी संख्या में अन्य राज्यों के केंद्रीय विद्यालयों में अध्ययन करना पड़ता है, इसलिए उनके द्वारा निर्धारित शर्त हमारे अपने लड़कों और लड़कियों को नुकसान पहुंचाएगी.

बता दें कि कुशवाहा बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर भी नीतीश कुमार से नाराज चल रहे हैं. वो 2013 में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से अलग हो गए थे. उन्होंने हाल ही बिहार सरकार को शिक्षा से जुड़ी 25 मांगों का एक चार्टर भेजा है. चार्टर में राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा शिक्षकों की भर्ती, शिक्षण कर्मचारियों को मध्य-भोजन के भोजन की तैयारी करने और छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य बनाने से छूट जैसी मांगे शामिल हैं.

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