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नागमणि बने आरएलएसपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

नागमणि बिहार में कुशवाहा समाज से ही आते हैं जिस समाज से उपेंद्र कुशवाहा आते हैं

FP Staff Updated On: Aug 29, 2017 05:26 PM IST

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नागमणि बने आरएलएसपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि को राष्ट्रीय लोक समता पार्टी यानी आरएलएसपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने नागमणि को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है.

उपेंद्र कुशवाहा केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री हैं और वो मंत्रालय के साथ-साथ पार्टी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. लेकिन, अब पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नागमणि पार्टी विस्तार पर पूरी तरह फोकस करेंगे.

आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशवाहा ने उम्मीद जताई है कि नागमणि नई जिम्मेदारी मिलने के बाद बिहार के साथ-साथ पूरे देश में पार्टी का जनाधार बढ़ाएंगे. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी प्रवक्ता फ़ज़ल इमाम मल्लिक ने इस बाबत जानकारी दी है.

दरअसल, नागमणि पिछले महीने ही अपने समर्थकों के साथ आरएलएसपी में शामिल हुए थे और उनके पार्टी में शामिल होने के बाद बिहार में आरएलएसपी अपने-आप को नए विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है.

पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शंकर झा आजाद, दशई चौधरी, भगवान सिंह कुशवाहा, राष्ट्रीय प्रधान महासचिव राम बिहारी सिंह सहित दूसरे राष्ट्रीय नेताओं ने नागमणि को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का स्वागत करते हुए उन्हें बधाई दी है और उम्मीद जताई है कि पार्टी अब अपने मिशन को पूरा करने में सफल होगी.

कुशवाहा का जातीय समीकरण

दरअसल, नागमणि बिहार में कुशवाहा समाज से ही आते हैं जिस समाज से उपेंद्र कुशवाहा आते हैं. साथ ही वो कुशवाहा समाज के एक बड़े नेता दिवंगत जगदेव प्रसाद के बेटे हैं. बिहार के जातीय समीकरण और उस पर होती सियासत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि सभी सियासी दल खासतौर से बिहार के क्षेत्रीय दल जातीय संतुलन को लेकर सचेत रहते हैं.

उपेंद्र कुशवाहा भी इस वक्त बिहार के जातीय समीकरण को साधने में लगे हैं.

नीतीश कुमार के वापस एनडीए में शामिल होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा अपने आप को समाज के सबसे बड़े नेता के तौर पर अपने-आप को स्थापित करना चाहते हैं. उन्हें डर है कि कहीं नीतीश की इंट्री के चलते उनका महत्व एनडीए में कम ना हो जाए.

लिहाजा, अभी से ही अपने समाज के नेताओं को एकजुट करने में लगे हैं. कुछ दिन पहले ही नागमणि की पार्टी में इंट्री और अब सीधे पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर बैठाने के पीछे कुशवाहा की सोची-समझी रणनीति है. जिसके दम पर वो एनडीए में अपने वजूद को बनाए रखना चाहते हैं.

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