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यूपी चुनाव: अब यूपी में शुरू हुई राहुल बनाम मोदी की जंग

पीएम और राहुल के बीच जारी राजनीतिक जंग अब यूपी के चुनावी मैदान में पहुंच गई है

Updated On: Dec 20, 2016 07:56 AM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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यूपी चुनाव: अब यूपी में शुरू हुई राहुल बनाम मोदी की जंग

संसद का सत्र खत्म होने के बाद नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच जारी राजनीतिक जंग अब उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में पहुंच गई है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को परिवर्तन रैली के तहत कानपुर में दहाड़ लगाते हुए कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों को काले धन व भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ा कर दिया.

वहीं जौनपुर में राहुल गांधी ने अपने पुराने रिकॉर्ड को फिर बजाते हुए कहा कि मोदीजी गरीबों का पैसा बैंकों में जमा करवाकर अपने चंद उद्योगपतियों मित्रों को बांट देंगे. मोदी की तरह राहुल ने नारा दिया ‘गरीबों का पैसा खींचों, अमीरों को सींचो’.

मोदी को भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ा करने के लिए राहुल ने कहा कि बैंकों के हजारों करोड़ रुपए लेकर भागा विजय माल्या लंदन में ऐश कर रहा है. राहुल को यह याद रखना चाहिए कि मनमोहन सिंह सरकार के समय ही विजय माल्या को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कर्ज उपलब्ध कराया था.

मोदी ने नहीं लिया राहुल का नाम 

दिलचस्प बात यह थी कि मोदी ने अपने लंबे भाषण के दौरान एक बार भी राहुल का नाम नहीं लिया. लेकिन राहुल ने लगभग हर चौथे वाक्य में मोदीजी का जिक्र करना जरूरी समझा. इसका अर्थ यह है कि राहुल मोदी से बेहद आक्रांत दिखाई देते हैं. वहीं मोदी राहुल को राजनीतिक चुनौती के तौर पर कोई महत्व नहीं देते हैं.

कानपुर की परिवर्तन रैली में मोदी ने यह रेखांकित करने की कोशिश की कि नोटबंदी पर जारी राजनीतिक संग्राम ईमानदार-बेईमान और अमीर-गरीब के बीच हो रहा है. उनका यह कहना तथ्य से परे है कि मैं काले धन व भ्रष्टाचार को बंद करना चाहता हूं और विपक्ष संसद को बंद कर रहा है.

कानपुर रैली में मोदी. (फोटो. पीटीआई).

कानपुर रैली में मोदी. (फोटो. पीटीआई).

टीवी के पर्दे पर देश की जनता ने यह देखा है कि शीतकालीन सत्र के अंतिम चार दिनों में विपक्ष ने नहीं, बल्कि भाजपा के मंत्रियों व सांसदों ने संसद की कार्यवाही में बाधा उपस्थित की है.

शायद मोदीजी यह मानकर चल रहे हैं कि जनता की स्मरण शक्ति इतनी कमजोर हो गई है कि तीन दिन पहले क्या हुआ, वह भी उसे याद नहीं है?

दूसरी तरफ राहुल गांधी भी सच का सामना नहीं करना चाहते हैं. जौनपुर की रैली में उन्होंने संसद में क्या हुआ, इसका जिक्र करना जरूरी नहीं समझा. वे कहते हैं कि मोदीजी ने उनको संसद में बोलने नहीं दिया. वास्तविकता यह है कि सत्र के पहले 17 दिनों तक कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने मिलकर संसद की कार्यवाही चलने नहीं दी.

जौनपुर की रैली में चुप्पी लगा गए राहुल

तीन दिन पहले राहुल गांधी कहते हैं कि यदि उनको संसद में बोलने दिया गया तो भूकंप आ जाएगा. वे यह दावा भी करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निजी भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी उनके पास हैं, जिसका खुलासा वे संसद में ही करेंगे. लेकिन सोमवार को जौनपुर की रैली में वो इस संदर्भ में चुप्पी लगा गए.

प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीतिक दलों की फंडिंग के संदर्भ में चुनाव आयोग द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन करके कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों को चुनौती दी है कि वे भी अपना रवैया स्पष्ट करें. चुनाव आयोग ने सुझाव दिया है कि 2000 रुपए से अधिक का चंदा देनेवाले की पहचान बताई जाए. अभी यह सीमा 20 हजार रुपए है.

चुनाव आयोग के प्रस्ताव पर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों की खामोशी आश्चर्यजनक है. सभी जानते हैं कि लगभग सभी राजनीतिक दलों की फंडिंग काले धन के माध्यम से ही होती है. मोदी ने इस संदर्भ में पहल करके सबसे बड़े चुनाव सुधार की दिशा में कदम उठाया है.

यह तथ्य चौंकानेवाला है कि 1850 रजिस्टर्ड राजनीतिक दलों में से केवल 400 दल चुनाव लड़ते हैं और सभी दलों को आयकर से छूट मिली हुई हैं.

राजनीतिक दलों के माध्यम से काले धन को सफेद किया जाता रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी व अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश की राजनीति को काले धन के प्रभाव से मुक्त कैसे किया जाए? यदि राजनीति को कालेधन से मुक्त नहीं किया गया तो मोदीजी की नोटबंदी बहुत बड़ा पाखंड साबित होगी.

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