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क्या अब यूपी-उत्तराखंड के बरसों से अटके मसलों का निकलेगा हल?

नवंबर 2000 को यूपी से कटकर उत्तराखंड का नए राज्य के तौर पर निर्माण हुआ था.

Namita Singh Updated On: Apr 11, 2017 02:09 PM IST

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क्या अब यूपी-उत्तराखंड के बरसों से अटके मसलों का निकलेगा हल?

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लखनऊ में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाकात की है. इस मुलाकात से उत्तराखंड के लंबे वक्त से लटके पड़े कई मसलों के हल होने की उम्मीद पैदा हुई है. नवंबर 2000 को यूपी से कटकर उत्तराखंड का नए राज्य के तौर पर निर्माण हुआ था.

संपत्ति-देनदारी का बंटवारा नहीं 

तकरीबन हर महत्वपूर्ण विभाग के कुछ लंबित मसले हैं जिनकी वजह से राज्य में विकास की कई योजनाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं.

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच संपत्तियों और देनदारियों का बंटवारा एक बेहद अहम मसला है और यह पिछली सरकारों के वक्त से चला आ रहा है. लेकिन, राज्यों में तीन पार्टियों की सरकारों के होने से इसका कोई हल नहीं निकल पाया और यह मसला जस का तस बना हुआ है.

इतिहास में पहली बार ऐसा मौका आया है जबकि केंद्र और दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार है और इससे बेहतर आपसी तालमेल के साथ लंबे वक्त से अटके हुए मसलों का हल निकालने में मदद मिलेगी.

एक दर्जन से ज्यादा विभागों के लंबित मसले

एक दर्जन से ज्यादा विभागों के एसेट्स और लाइबिलिटीज अभी भी दोनों राज्यों के बीच बांटे जाने हैं. इनमें सिंचाई, ऊर्जा, ट्रांसपोर्ट, फाइनेंस, हाउसिंग, फूड एंड सिविल सप्लाइज, होम, टूरिज्म, ट्रेनिंग एंड टेक्निकल एजूकेशन, इंफॉर्मेशन एंड पब्लिक रिलेशंस, एनिमल हसबेंड्री, रूरल डिवेलपमेंट, फॉरेस्ट, एग्रीकल्चर, सोशल वेल्फेयर और पेयजल और स्वच्छता जैसे विभाग शामिल हैं.

उत्तराखंड के सिंचाई विभाग की कई संपत्तियां यूपी के हाथ

उत्तराखंड कई नदियों का स्रोत है, ऐसे में कैनाल, डैम और बैराज जैसे जल संबंधी संसाधनों का सिंचाई विभाग की जमीन के साथ विभाजन दोनों राज्यों के बीच बड़ा मुद्दा बना हुआ है.

हरिद्वार जिले की 28 नहरें और ऊधम सिंह नगर जिले की 9 नहरें भौगोलिक रूप से उत्तराखंड में आती हैं. कई रिहायशी कॉम्प्लेक्स और गेस्टहाउस जो कि अभी भी यूपी सिंचाई विभाग के कब्जे में हैं, उन्हें उत्तराखंड के सिंचाई विभाग को हस्तांतरित किया जाना है.

हाल में ही उत्तराखंड असेंबली इलेक्शंस के बाद राज्य ने 28 नहरें और 266 इमारतों का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास अभी भी हरिद्वार के कुंभ मेला की जमीन है, इसके अलावा भीमगौड़ा बैराज पर भी इसका ही कंट्रोल है.

Uttarakhand Village 4

(फोटो: फेसबुक से साभार)

इन मसलों का जल्द समाधान जरूरी

उत्तराखंड सिंचाई विभाग की 13,800 हेक्टेयर जमीन, 4,384 बिल्डिंग्स और 42 कैनाल अभी भी यूपी के कंट्रोल में हैं. कई महत्वपूर्ण जगहें और जमीन, जिनमें वीआईपी घाट और अलकनंदा घाट आते हैं, अभी भी यूपी इरिगेशन डिपार्टमेंट के पास हैं.

जामरानी डैम पर सहमति भी दोनों राज्यों के बीच नहीं बन पाई है. इस प्रोजेक्ट से अगले 20 साल के लिए बिजली की समस्या से निजात मिल जाएगी, साथ ही यह दिल्ली और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों को भी बिजली दे पाएगा.

बिजली विभाग में उत्तराखंड जल विद्युत निगम के कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश से अभी तक लंबित जीपीएफ राशि नहीं मिली है. ट्रांसपोर्ट में, दिल्ली और लखनऊ में राज्य गेस्ट हाउसेज की संपत्तियों का बंटवारा भी अभी तक नहीं हुआ है.

उत्तराखंड का आवास विकास विभाग अभी भी अपने प्रोजेक्ट्स को हैंडओवर किए जाने की राह तक रहा है. इसकी करीब 60.91 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी उत्तर प्रदेश आवास और विकास परिषद के पास है.

गृह विभाग में, पिथौरागढ़ के धारचुला में 27,000 वर्गफुट जमीन यूपी पुलिस के हाथ है और इसे उत्तराखंड को दिया जाना है. रूरल डिवेलपमेंट में, यूपी रूरल डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट को 3.10 लाख रुपये उत्तराखंड रूरल डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट को देने हैं.

औद्योगिक विकास में, उत्तर प्रदेश को 15 करोड़ रुपये से ज्यादा ब्याज देना है, जबकि यूपीएसआईडीसी की एसेट्स का अभी तक बंटवारा नहीं हुआ है.

सामाजिक कल्याण में, उत्तर प्रदेश बैकवर्ड फाइनेंस एंड डिवेलपमेंट ने उत्तराखंड के विभाग पर 1.36 करोड़ रुपये का दावा किया है.

उत्तर प्रदेश सीड डिवेलपमेंट लिमिटेड और उत्तराखंड सीड डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट एसेट्स और लाइबिलिटीज को लेकर अभी भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.

उत्तराखंड पेयजल लिमिटेड और उत्तर प्रदेश जल निगम को अपने एंप्लॉयीज को जीपीएफ की बड़ी रकम बांटना है.

सेंट्रल सिल्क बोर्ड को 1985 में 15 लाख रुपये का लोन मिला था जो कि अब बढ़कर 66 लाख रुपये हो गया है. इसे अब दोनों राज्यों के बीच में लाइबिलिटी के तौर पर बांटा जाना है.

नई सरकार बनने के बाद पैदा हुई उम्मीद

दिसंबर 2014 में यूपी के सीएम अखिलेश यादव और उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत के बीच देहरादून में मुलाकात हुई थी और इसमें दोनों राज्यों के बीच एसेट्स की शेयरिंग पर सहमति बन गई थी.

लेकिन, योगी आदित्यनाथ और त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच मुलाकात से टेहरी डैम से पैदा होने वाली बिजली को शेयर करने, यूपी के सिंचाई विभाग पर बकाया बिजली के बिलों के भुगतान, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में पैसेंजर टैक्स के भुगतान, किच्छा बस स्टेशन को हैंडओवर करने और पेंशन और जीपीएफ के मसलों को सुलझाने की दिशा में तेजी से काम होने की उम्मीद है.

देनदारियो और संपत्तियों के बंटवारे से दोनों राज्यों को आपसी विवाद खत्म करने में मदद मिलेगी और इससे दोनों राज्यों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी.

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