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यूपी के नगरपालिका नतीजों से बीजेपी के लिए गुजरात की राह होगी आसान

यूपी का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा गया लेकिन नगरपालिका चुनाव योगी के नेतृत्‍व में लड़ा गया. यह एक तरह से योगी सरकार के कामकाज और लोकप्रियता पर जनमत संग्रह था

Sanjay Singh Updated On: Dec 02, 2017 02:06 PM IST

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यूपी के नगरपालिका नतीजों से बीजेपी के लिए गुजरात की राह होगी आसान

उत्‍तर प्रदेश नगरपालिका के चुनावों के घोषित नतीजों से साबित हो गया है कि भगवा रंग अब कुछ और गहरा हो चला है. यह मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ, उनकी लोकप्रियता और प्रदर्शन की परख का पहला मौका भी था जिसमें वह पूरे दमखम के साथ 100 फीसदी खरे उतरे हैं.

यह जीत योगी और बीजेपी के लिए और भी सुकून भरी इसलिए भी है क्‍योंकि कांग्रेस पार्टी की अमेठी में बुरी गत बन गई है. अमेठी में स्‍थानीय निकाय के चुनाव नतीजों से एक बार फिर साबित हुआ कि राहुल गांधी की लोकप्रियता का गुब्‍बारा उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में ही पिचकने लगा है. राजीव गांधी के जमाने से ही अमेठी क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. यह कांग्रेस के लिए गहरी परेशानी का सबब इसलिए भी है क्‍योंकि गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण में करीब एक हफ्ते का ही समय बचा है और यहां उसकी सीधी टक्‍कर सत्‍तारूढ़ बीजेपी से है.

चुनावी जीत का परचम लहराने को लेकर गहरे आश्‍वस्‍त थे

मुख्‍यमंत्री योगी ने दूसरे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों अखिलेश यादव और मायावती के विपरीत इन चुनावो में पूरी ताकत झोंकी दी थी. उन्‍होंने अपनी पार्टी के पक्ष में जमकर प्रचार किया और अपना और पार्टी का कद ऊंचा कर दिखाया. अखिलेश और मायावती के पलट, योगी हार या जीत की जिम्‍मेदारी उठाने में किसी जोखिम से भयभीत नहीं दिखे. या इसे यूं भी कह सकते हैं कि वो चुनावी जीत का परचम लहराने को लेकर गहरे आश्‍वस्‍त थे.

योगी का जमकर प्रचार और बीजेपी की सांगठनिक मशीनरी ने जीत की कहानी लिख डाली. इससे यह भी संकेत मिलता है कि सत्‍तारूढ़ पार्टी चुनावों को किस नजर से देखती है. बीजेपी अध्‍यक्ष के रूप में गद्दी संभालने के बाद अपनी पहली राष्‍ट्रीय कार्यकारी बैठक में अमित शाह ने कहा था कि पार्टी सभी चुनावों को पूरी गंभीरता से लेगी और जीतने का ही संघर्ष करेगी चाहे वो चुनाव पंचायत का हो या‍ फिर संसद का.

Yogi-Adityanath-and-AMit-Shah

बीजेपी ने यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सफलता के सिलसिले को बरकरार रखा है

अंतिम नतीजे उनके और बीजेपी के लिए बहुत सुखद रहे हैं. बीजेपी 16 महानगर पालिकाओं, 118 नगर पालिका परिषद और 438 नगर पंचायतों में अपने तीन निकटतम प्रतिद्वंद्विंयों एसपी, बीएसपी और कांग्रेस से मीलों आगे चली गई. 16 महानगर पालिकाओं जिसमें नवगठित अयोध्‍या और मथुरा शामिल हैं, उनमें बीजेपी ने 14 सीटें जीती जबकि बीएसपी को दो सीटें ही मिल सकीं. इन सीटों पर प्रत्‍यक्ष चुनाव होता है.

परिणामों से यह भी पता चलता है कि लोगों ने कानून-व्‍यवस्‍था बनाए रखने के तौर तरीकों और बिजली आपूर्ति के सुधार के कदमों पर समर्थन दिया है. यह दो मुद्दे ही खास चर्चित बने हुए थे और गोरखपुर के बी आ डी अस्‍पताल में हुई बच्‍चों की मौतों को लेकर कोई खराब असर नहीं दिखा.

एक तरह से योगी सरकार के कामकाज और लोकप्रियता पर जनमत संग्रह 

नवंबर 2017 में हुए उत्‍तर प्रदेश नगरपालिका के इन चुनावों ने राष्‍ट्रीय स्‍तर पर लोगों का ध्‍यान खींचा. इसकी चार वजहें हैं- पहली यह कि योगी आदित्‍यनाथ के बतौर मुख्‍यमंत्री चुने जाने के 8 महीने बाद ये चुनाव हुए. बीजेपी उन चुनावों में तीन चौथाई बहुमत हासिल कर के राज्‍य में 25 साल बाद सत्‍ता में वापस लौटी थी.

उत्‍तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा गया लेकिन नगरपालिका चुनाव योगी के नेतृत्‍व में लड़ा गया. यह एक तरह से योगी सरकार के कामकाज और लोकप्रियता पर जनमत संग्रह ही था.

Modi-Yogi

उत्तर प्रदेश के नगरपालिका चुनावों में जबरदस्त जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी से मिलते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (फोटो: पीटीआई)

दूसरी वजह यह है कि यह एक ऐसा अवसर था जिससे यह पता चलता कि अखिलेश यादव (एसपी), मायावती (बीएसपी) और कांग्रेस ने अपनी पिछली ग‍लतियों से क्‍या सबक सीखा है. और क्‍या उन्‍होंने अपनी खोई जमीन वापस पाने के लिए कड़ी मेहनत की है.

तीसरी वजह यह है कि ये चुनाव ऐसे समय में हुए हैं जबकि गुजरात चुनाव सिर पर हैं और पूरा का पूरा राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है. उत्‍तर प्रदेश नगरपालिका चुनावों का परिणाम भले ही गुजरात में कोई असर नहीं डाल सके लेकिन यह बात निश्चित है कि विजेता पक्ष अपनी रैलियों में इस जीत का गुणगान करेगा. बीजेपी इस जीत के जरिए अपने शासन, सांगठनिक क्षमता और सभी तरह के चुनावों में जीत हासिल करने की योग्‍यता को लेकर अपना स्‍तुति गान गाएगी.

चौथी बात यह है कि चुनाव परिणाम जीएसटी लागू होने के बाद सबसे पहले हुए हैं और यह सबसे पहला अवसर था कि जब यह पता चल सके कि यह कदम कितना लोकप्रिय है. और क्‍या व्‍यापारियों के एक वर्ग में जो शुरूआती नाराजगी थी, उसने वोटिंग के तौर तरीको को कितना प्रभावित किया है. यहां यह ध्‍यान रखना होगा कि नगरपालिका चुनाव केवल शहरी इलाको में होते हैं.

अमेठी की हार राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए बहुत शर्मनाक

यह परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है. कुल 652 स्‍थानीय निकाओं में से कांग्रेस को केवल 19 में ही जीत हासिल हो सकी. बीजेपी की झोली में 341, मायावती की बीएसपी 116 जीत के साथ दूसरे पायदान पर और एसपी केवल 81 जगह ही अपना खाता खोल सकी. जबकि 95 जगहों पर दूसरे लोग काबिज हुए. अमेठी की हार राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों के लिए बहुत शर्मनाक है.

अमेठी और रायबरेली लंबे समय से कांग्रेस पार्टी की परंपरागत सीटें रही हैं (फोटो: पीटीआई)

अमेठी और रायबरेली लंबे समय से कांग्रेस पार्टी की परंपरागत सीटें रही हैं (फोटो: पीटीआई)

हालांकि एक राज्‍य में जीत हासिल करना या हारने का दूसरे राज्‍य में हार-जीत का कोई सीधा रिश्‍ता नहीं बनता है. दूसरी बात यह है कि एक राज्‍य में नगरपालिका के चुनाव थे और दूसरे राज्‍य में विधानसभा चुनाव का दौर है, लेकिन इस पर निर्भर करता है कि इस चुनावी संघर्ष में शामिल नेतृत्‍व और दल इसका कि जीत का फायदा किस तरह उठाते हैं. महाराष्‍ट्र, चंड़ीगढ़, ओडिशा के पंचायत चुनाव और दूसरे राज्‍यों में हुए इसी तरह के स्‍थानीय निकाय के चुनाव के परिणामों ने मीडिया में और उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में बीजेपी नेताओं की चुनावी रैलियों में चर्चा का विषय बने. उन राज्‍यों में शहरी निकाय और जिला पंचायत चुनाव नोटबंदी के बाद हुए और उन्‍हें प्रधानमंत्री मोदी के भ्रष्‍टाचार विरोधी बड़े कदम के रूप में समर्थन के रूप में देखा गया.

बीजेपी को खुशी का मौका मिलने और विरोधियों को निराशा हाथ लगने की वजह यह भी है कि शहरी इलाकों के वोटरों ने देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्‍य ने जीएसटी को लेकर शुरूआती ऊहापोह के बाद के बाद भी उसे समर्थन दिया है. अब बीजेपी उत्‍तर प्रदेश के स्‍थानीय निकाय के चुनावों के परिणामों को जीएसटी को लोगों के समर्थन के रूप में रखेगी और गुजरात में बीजेपी नेतृत्‍व इसे चर्चा का विषय बनाएंगे.

राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ और आक्रामक

अब योगी आदित्‍यनाथ राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ और आक्रामक हो गए हैं. वो कहते हैं कि जो (कांग्रेस) गुजरात की बात करते हैं उन्‍हें उत्‍तर प्रदेश में करारी शिकस्‍त का सामना करना पड़ा है, यहां तक कि वो खाता भी नहीं खोल सके. अमेठी में कांग्रेस की जो करारी हार हुई है वो राहुल की जिम्‍मेदारी है. सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी ने भी राहुल गांधी की पार्टी की अमेठी में हार पर मजाक बनाया है.

Yogi Adityanath

नगरपालिका चुनावों में मिली जीत को योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज के लिए जनमत संग्रह के तौर पर देखा रहा है

योगी आदित्‍यनाथ और सुब्रह्मण्‍यम स्‍वामी ने कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना दिया है. गुजरात में बीजेपी के नेता निश्चित ही इसे और हवा देंगे.

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