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यूपी निकाय चुनाव 2017: पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में... ये राह नहीं आसां!

बीजेपी को आशंका है कि वाराणसी के उत्तरी, दक्षिणी समेत कैंट विधानसभा क्षेत्र की पार्षद की अधिकांश सीटों पर टिकट बंटवारे से नाराज नेता भीतरघात कर सकते हैं

Utpal Pathak Updated On: Nov 18, 2017 04:52 PM IST

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यूपी निकाय चुनाव 2017: पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में... ये राह नहीं आसां!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में होने वाले नगर निकाय और नगर पंचायत चुनावों में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. दरअसल इस पूरी कवायद के पीछे का कारण पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर हुए विवाद को माना जा रहा है.

उच्च पदस्थ पार्टी सूत्रों ने बताया कि टिकट वितरण के बाद पार्टी को संघ समेत खुफिया एजेंसियों से यह सूचना मिली कि शहर के उत्तरी, दक्षिणी समेत कैंट विधानसभा क्षेत्र की पार्षद की अधिकांश सीटों पर पार्टी के लोग टिकट नहीं मिलने की नाराजगी जताने के लिए भीतरघात कर सकते हैं.

इसके बाद शीर्ष नेतृत्व सकते में आ गया और पार्टी ने फौरन ही सभी जनप्रतिनिधियों समेत मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों को चुनाव प्रचार में उतरने के निर्देश दे दिए. इसका नतीजा यह है कि वार्ड के चुनावों में दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर है. वाराणसी के सभी 8 विधानसभा क्षेत्रों के सभी विधायक (जिनमें 3 मंत्री भी हैं) और 3 एमएलसी समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी अब हर तरफ चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. बीजेपी ने नगर निगम, नगर पालिका परिषद रामनगर और नगर पंचायत गंगापुर के चुनावों में सभी जिम्मेदारी भी तय कर दी है.

कौन से हैं संवेदनशील इलाके-

बीजेपी के लिये सबसे बड़ा सिरदर्द है शहर का दक्षिणी विधानसभा जहां इस क्षेत्र से जुड़े 25 वार्ड पुराने शहर में स्थित हैं. बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता यह विधानसभा क्षेत्र और यहां से पार्टी ने हर बार भारी मात्रा में वोट पाया है. पार्टी सूत्र बताते हैं कि इन 25 में से 22 वार्डों में टिकट इसी इलाके से विधायक और राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी की मर्जी से दिए गए हैं. इस इलाके में भीतरघात की अपार संभावना देखने के बाद पार्टी ने नीलकंठ की मदद के लिये पूर्व विधायक श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' को भी चुनाव प्रचार में उतार दिया है. दादा कई दशकों तक लगातार इस क्षेत्र से विधायक थे और उनकी साफ-सुथरी छवि को पार्टी एक बार फिर से भुनाने में लगी हुई है.

नरेंद्र मोदी

अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो: पीटीआई)

दूसरी तरफ शहर उत्तरी में भी आधा दर्जन से अधिक सीटों पर भीतरघात का डर पार्टी पर इस कदर हावी है कि प्रत्याशियों समेत शीर्ष पदाधिकारियों की भी नींद उड़ी हुई है. इस विधानसभा क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक वार्डों में स्थानीय विधायक रविंद्र जायसवाल के प्रत्याशियों के बजाय प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय के कहने पर टिकट दिए गए हैं. ऐसे में रविंद्र को न सिर्फ अपने करीबियों को मनाना है बल्कि भीतरघात से भी पार्टी को बचाना है अन्यथा उनके खुद के रिपोर्ट कार्ड पर गलत प्रभाव पड़ेगा.

वार्डों में अंतरकलह ने पार्टी के कान खड़े कर दिए हैं 

ठीक उसी तरह गंगा के उस पार नगर पालिका परिषद रामनगर में काशी क्षेत्र के अध्यक्ष और एमएलसी लक्ष्मण आचार्य की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है क्योंकि पालिका के चेयरमैन से लगायत लगभग 25 पार्षदों को टिकट उनकी मर्जी से दिये गए हैं. यहां पर उनके साथ कैंट के विधायक सौरभ श्रीवास्तव को लगाया गया है. और अन्य वरिष्ठ नेताओं को रामनगर आते-जाते रहने के निर्देश दिए गए हैं. रामनगर में पार्टी के सामने न सिर्फ चेयरमैन पद पर विपक्ष से कड़ी चुनौती मिल रही है वहीं दूसरी तरफ वार्डों में भी अंतरकलह ने पार्टी के कान खड़े कर दिए हैं.

गंगापुर में बीजेपी को अपने बागी कुबेर चंद गुप्ता के विरोध से जूझना पड़ रहा है. अटकलें लगाई जा रही थी कि नाम वापसी के दिन वो अपना पर्चा वापस ले लेंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ. गंगापुर नगर पंचायत में पार्टी को बल देने के लिए रोहनिया विधायक सुरेंद्र सिंह के अलावा सेवापुरी से अपना दल के विधायक नील रतन पटेल उर्फ नीलू और संयोजक के रूप में स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े सुरेश सिंह को भी लगाया गया है. पिंडरा विधायक डॉ. अवधेश सिंह को भी गंगापुर में चुनाव प्रचार के अलावा अन्य जिम्मेदारियां दी गई हैं.

निकाय चुनाव के महत्व का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गुरुवार को बीजेपी के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल ने वाराणसी में काशी प्रांत से जुड़े सभी 14 जिलों के अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष और चुनाव संयोजकों के साथ बैठक की. प्रधानमंत्री का लोकसभा क्षेत्र होने के कारण सुनील बंसल समेत प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय भी वाराणसी की पल-पल की खबर ले रहे हैं. इसके अलावा जल्दी ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी वाराणसी दौरा प्रस्तावित है.

Yogi Adityanath

निकाय चुनावों को उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए परीक्षा के तौर पर माना जा रहा है (फोटो: पीटीआई)

कौन होगा जो पार्षद चुनाव हार कर अपना विधानसभा का टिकट गंवाएगा?

वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य बीजेपी की इस कवायद को एक सोची-समझी रणनीति मानते हुए बताते हैं कि 'यह जो पूरी बीजेपी की पावर बैटरी आज सड़क पर उतर गई है, वो सिर्फ इसलिये क्योंकि उन सबके रिपोर्ट कार्ड पर आखिरी दस्तखत दिल्ली में होना है, ऐसे में कौन होगा जो पार्षद चुनाव हार कर अपना विधानसभा का टिकट गंवाएगा भला? यह सभी मंत्री और पदाधिकारी अपनी-अपनी कुर्सियां बचाने के क्रम में जी-तोड़ मेहनत नहीं करेंगे तो और क्या करेंगे? ऐसे में सही-गलत का प्रश्न नहीं रहता, जीतना है और येन केन प्रकारेण जीतना ही है और बीजेपी इसी लक्ष्य पर है.'

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